शाकाहार के प्रणेता प्रसिध्द डॉक्टर श्रीमान कल्याण जी गंगवाल समाज शिरोमणी सेवा पुरस्कार से एवं ज्येष्ठ समाजसेवी आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी “ खान्देश – शिरोमणी “ पुरस्कार से नवचैतन्य सामाजिक संस्था द्वारा सन्मानीत हुये l समाज के अन्य गणमान्यों को भी नवाज़ा गया! मूलता जलगाँव जिलेसे भडगाव तहसील क़जगांव से 50 वर्ष पुना स्थित हुये अपने अनेक सामाजिक व्यावसायिक शैक्षणिक क्षेत्र का दायित्व निभानेवाले सुभाषजी सुगनमलजी ललवाणी को एक शानदार समारोह मे वाणी भुषण प्रशांत ऋषिजी महाराज साहेब, मधुरकंठी विजयस्मिताजी, करुणा श्री जी महाराज साहेब के सानिध्यमे पुनाके जगविख्यात डॉक्टर, शाकाहार के प्रणेता व्यसनमुक्ति के पक्षधर कल्याणजी गंगवाल जी के करकमलोद्वारा नवाज़ा गया! डॉक्टर साहब को भी “ समाज शिरोमणी” उपाधी देकर कार्यक्रम की आयोजिका अनिता जी नहार एवं प्रमुख अतिथि यों...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी ने सोमवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने जीवन में ज्ञानी महापुरुषों की सत्संग करने से व्यक्ति जीवन में सफलता के नये शिखर पर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि जैसा संग वैसा रंग। अर्थात् मनुष्य जिसके साथ रहता है। जिस वातावरण में काम करता है वह इंसान वैसा हि बन जाता है। दोष और गुण बुरे या अच्छे संसर्ग संगत से प्राप्त होते हैं। नीच पुरुषों के साथ समागम करने से बुद्धि की हानि होती है! समान विचार वाले, आचार वाले के साथ रहने से समानता आती हैं और विशिष्ट व्यक्तियों के साथ रहने से विशेषता प्राप्त होती है। उन्होंने आगे कहा कि साधु सज्जन पुरुषों का समागम, परिचय, संगति ही मनुष्य के जीवन का उत्तम निर्माण करती है। बबूल की छाया में कांटे मिलते है और न...
तपस्विनी विनीता दुगड़ का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनिश्री रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में सोमवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में विनीता दुगड़़ (धर्मपत्नी : संदीप दुगड़) के अठाई (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तपस्विनी बहन का तेरापंथी सभा द्वारा तपोभिनंदन किया गया। मुनि श्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – जैन धर्म की आवश्यक क्रिया है प्रतिक्रमण, जिससे आत्मा विशुद्ध होती है। जो निरंतर प्रतिक्रमण करते हैं उनके निकाचित कर्मों के बंध नहीं होते। प्रतिक्रमण चार प्रकार के होते हैं – क्रोध, मान, माया एवं लोभ। इनकी प्रवृत्तियां भावों के परिणाम को कमजोर करती हैं, इसलिए जप-तप आदि करते रहें तो कर्म बंध नहीं होंगे। मुनि र...
जिन्दगी चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो किन्तु उसे कोई भी एकाकी नहीं जी सकता। मनुष्य के लिए किसी का संग जरूरी है। इसी कारण मनुष्य नानाविध प्रकार के सम्बन्ध जोड़ता है। एक बात निश्चित है कि कोई भी व्यक्ति समूह से बिलकुल अलग नहीं रह सकता। साधु हो या गृहस्थ सामूहिक रूप से जीवन तो जीना ही पड़ता है किन्तु सम्बन्धों के सन्दर्भ में आत्मीयता के साथ सन्तुलन होना जरूरी है। परिवार या समाज के प्रति मैत्री भाव रखने के साथ यदि उनसे अत्यधिक ममत्व जुड़ गया तो व्यक्ति शुभ कर्म के बजाय पाप कर्म का उपार्जन कर लेता है। जैसे जीव की रक्षा करना या अनुकम्पा करना धर्म है किन्तु उस जीव के प्रति अत्यधिक ममत्व भाव जुड़ जाएं तो अशुभ कर्म का बन्ध भी हो सकता है। इसलिए प्राणी मात्र के प्रति आत्मीयता रखते समय तटस्थता का विवेक, अनिवार्य है। जो व्यक्ति समस्त प्राणियों के प्रति मैत्री एवं सर्व जीवों के प्रति समभाव से ओत-प्रोत ह...
पुणेः आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघाचे अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी यांनी महाराष्ट्र राज्याच्या राज्यमंत्री श्रीमती माधुरीताई मिसाळ यांची सदिच्छा भेट घेतली. भेटी दरम्यान माधुरीताईंनी सुभाष जींना आज डॉ. कल्याणजी गंगवाल यांचे शुभहस्ते नवचैतन्य सामाजिक संस्थेतर्फे मिळणार्या “खान्देश-शिरोमणी” सन्मानासाठी शुभेच्छा प्रदान केल्यात. या प्रसंगी ऱ्कार्यक्षम नगर सेवक व भाजप नेते प्रविणजी चोरबोले, बिबवेवाडी संघाचे अध्यंक्ष पोपटलालजी ओस्तवाल, साधना सदन श्री संघाचे विश्वस्त नितीन जी ओस्तवाल, आकुर्डी संघाचे विश्वस्त नेनसुख जी मांडोत, विजयजी ओस्तवाल,महेंन्द्र बेदमुथा आदि.
जालना : काय योग्य, काय अयोग्य हे कळायला हवे. एखाद्याला पोहता चांगले येते. मात्र बुडणेच चांगले वाटत असेल तर… आज सहाव्या अध्यायावर त्यांनी विवेचन केले. ते म्हणाले की, काही मर्यादा पाळा आणि ही मलिनता दूर करा, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, मला सुधारवे असे वाटत असेल तर जीणवाणी आत्मसात केल्याशिवाय गंत्यंतर नाही. ऑपरेशन एक घंट्याचं, लागले आठ ते दहा घंटे! हिशोब तर आपण ठेवतांच ना! आपण ऐकायला आलात, हे खरे असले तरी भगवान महावीराचं जीवन जगा, आपण सगळे जण महावीरांची संतान आहोत. तो...
आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनिश्री रमेश कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा 9 वर्ष के ज्ञानार्थियों को मंत्र दीक्षा प्रदान की गई। मंत्र दीक्षा का महत्व बताते हुए डाॅ मुनि ज्ञानेंद्र कुमार जी ने कहा- नमस्कार महामंत्र जीवन निर्माण और जीवन विकास का अनूठा उपक्रम है। मंत्र दीक्षा से दीक्षित बालक बालिकाओं की सुषुप्त शक्तियों को उजागर करना है। आपने नमस्कार महामंत्र की एक ऐतिहासिक कथा भी बच्चों को सुनाई । मुनि रमेश कुमार जी ने कहा- नमस्कार महामंत्र जैन संस्कृति का मुकुटमणि के समान है। जो साधक इसकी निष्काम भाव से साधना करता है उसके अज्ञान, मूर्च्छा और अंतराय आदि नष्ट होती है। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयेश जी महता ने कहा- बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए महाराष्ट्र के कटाटूर बोराला गांव का उदाहरण देते ...
पल्लावरम में हुआ मासखमण प्रत्याख्यान समारोह निर्मलजी रांका ने किया 28 का मासखमण पल्लावरम : तमिलनाडु के पल्लावरम क्षेत्र स्थित तेरापंथ भवन में युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री दीपकुमारजी ठाणा-2 के सान्निध्य में श्रीमान निर्मलजी रांका सुपुत्र स्व. श्री राजमलजी रांका ने 28 दिन के मासखमण तप का प्रत्याख्यान समारोह रविवार को श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा पल्लावरम द्वारा किया गया। मुनि श्री दीपकुमारजी ने कहा कि प्रबल मनोबली ही मासखमण जैसी तपस्या कर सकते हैं। निर्मलजी रांका ने मासखमण का तप कर मनोबल का परिचय दिया है। तप मंगल है क्योंकि तप शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा चारों को मंगलमय बनाता है। तप शरीर के रोग निकलता है। तप जैन शासन की प्रभावना का हेतु है। निर्मलजी ने मासखमण तप कर दृढ़ मनोबल का परिचय दिखाया है। आज के युग में इतनी बड़ी तपस्या चमत्कार से कम नहीं है, इस चातुर्मास में ...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा.ने रविवार को युवा दिवस के रूप में मनाये गये विशेष कार्यक्रम के आयोजन पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा समाज एवं राष्ट्र की रीढ़ है। उन्होंने सभी युवाओं को आव्हान करते हुए कहा कि उन्हें अपनी शक्ति ऊर्जा को समाज एवं राष्ट्र के हित में लगाना चाहिए। तभी समाज और देश सभी क्षेत्रों में और अधिक विकास एवं प्रगति कर सकता है। हमारे देश के लोकप्रिय प्रधान मंत्री जी मोदी जी ने भी सन् 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाने के लिए सभी देशवासियों और विशेष रूप से युवा शक्ति को इसके लिए आगे आने और अपनी श्रम शक्ति को इस और लगाने और विशेष पुरुषार्थ करने की बात कही है। मुनि श्री ने कहा कि अगर आपके पास शक्ति ऊर्जा, सामर्थ्य है तो उसे अपने समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने में लग...
मनुष्य के स्वभाव के आधार पर जैसे उसके गुण और शक्तियों का आकलन किया जाता है वैसे ही कर्मों की प्रकृति (स्वभाव) के आधार पर उनका विभाजन किया जाता है। आत्मा और कर्म का बन्ध होने के साथ ही कर्म के स्वभाव का विश्लेषण स्वतः हो जाता है। प्रकृति बन्ध कर्म के स्वभाव का विभाजन करने की शक्ति रखता है। जैसे नीम की प्रकृति कड़वापन लिए हुए है तो गुड़ की प्रकृति में मीठापन है, इसी तरह ज्ञानावरणीय कर्म की प्रकृति ज्ञान को आवृत्त करने की है तो अन्तराय कर्म की प्रकृति आत्मा के अनन्त शक्ति को आच्छादित करने की है। कर्म विज्ञान ने प्रकृति (स्वभाव) के अनुसार कर्म समूह को आठ भागों में विभक्त किया है। उन आठ के नाम इस प्रकार हैं- ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयुष्य, नाम, गोत्र और अन्तराय। ये आठ कर्म प्रकृतियाँ आत्मा के अष्ट मूल गुणों की बाधक है। आत्मा के अनन्त ज्ञान गुण को आवृत्त करने वाला कर्म ज्ञानाव...
पुनाः आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण गुरु आनंद प्रार्थना मंडल का गुरु दर्शन यात्रा का प्रथम चरण उपाध्याय प्रवर पु. प्रविणऋषिजी म. सा. एवं मधुर गायक पु तिर्थेष ऋषिजी के दर्शन एवं मंगलमय आशिर्वाद से प्रारंभ हुई! दर्शन यात्रा मे 24 महानुभावोने सहभाग लेनेसे उपाध्याय श्री जी ने 24 तिर्थंकर कर उपमा दी! विविध धार्मिक आध्यात्मिक जप तप आराधना के माध्यमसे “परिवर्तन चातुर्मास 2025” स्वर्णिम बननेके लिए अग्रेसर है !आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघके अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी अपने धर्मपत्नी कांता सह दर्शन यात्रा में सम्मिलित हुये! सजोड दर्शन यात्रा में सम्मिलित हुये श्री सुभाषजी राका, मोतीलालजी चोरडीया, विजयजी ओस्तवाल, प्रेमचंदजी जैन, प्रेमसुख कटारिया, सुभाष खाबिया,शांतीलालजी दुगड, श्रीकांतजी नहार, वैसेही नवनीतजी मुनोत, सुर्यकांतजी मुथीयान नेनसुंखजी मांडोत, सुभाषजी सुराणा, दलीतंदजी शिंगवी, रतिलालजी चोरडीया आ...
युवक परिषद् तमिलनाडु द्वारा प्रतिक्रमण सीखों अभियान के अंतर्गत चेन्नई में 3 अगस्त को चतुर्थ चरण की परीक्षा का आयोजन आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा की प्रभावी प्रेरणा हैं कि जैनी परिवार के हर सदस्यों को प्रतिक्रमण के पाठ कंठस्थ हो | इसी लक्ष्य को लेकर अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,जोधपुर के अंतर्गत अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिक्रमण की परीक्षाओं का आयोजन इस वर्ष गतिमान हैं | रविवार 3 अगस्त 2025 को चेन्नई में श्री जैन रत्न युवक परिषद् तमिलनाडु के कुशल संचालन में प्रतिक्रमण के चतुर्थ चरण की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि रत्न स्वर्ण महोत्सव के अन्तर्गत प्रतिक्रमण के चतुर्थ चरण की परीक्षा चेन्नई के साहूकारपेट में बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट स्थित स्वाध्याय भवन सहित महानगर के...