तपस्विनी पूर्वी नाहटा का तपोभिनंदन सामूहिक आयंबिल अनुष्ठान आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र जी कुमार, मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में बुधवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में पूर्वी नाहटा (धर्मपत्नी : पीयूष नाहटा) के अठाई (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तपस्विनी बहन का तेरापंथी सभा द्वारा तपोभिनंदन किया गया। मुनि श्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – जैन धर्म में आत्मशुद्धि का उपाय है प्रतिक्रमण, जिससे आत्मा की शुद्धि होती है। प्रतिक्रमण के अनेक प्रकार का उल्लेख मिलता है। प्रतिक्रमण आवश्यक क्रिया है। इसे दोनों समय किया जाता है। सबसे छोटा प्रतिक्रमण है मिच्छामि दुक्कड़म – मेरे पाप निष्फल हों। प्रतिक्रमण के पांच प्रकार का उल्लेख मिलता है R...
जालना : प्रभू महावीर कसे होते, हे सांगण्यासाठी मी आलो नाही. मात्र काहींनी गैरसमज करुन घेतला आहे, असो! देवी- देवता , श्रावक- श्राविका असूनही प्रभू महावीर वेगळेच होते. कारण ते होतेच वेगळे! परंतु दुर्देवाने संत, धर्मात फरक करणारेच प्रभू महावीरांना बदनाम करु लागले आहेत, हे मुळीच बरोबर नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, पुन्हा एकदा आपल्या सौभाग्याची अनुमोदना करावी. कारण वीरथुईच्या माध्यमातून आपल्याला ही यात्रा करायला भेटते आहे. मोठ्यातून मोठं तीर्थ आहे की, कोणत्या पुण्यवाणीने आपल्या...
ज्ञान को आवृत्त करने वाला कर्म- ज्ञानावरणीय कर्म है। आत्मा में सब कुछ जानने की शक्ति होते हुए भी इस कर्म के कारण वह सब कुछ नहीं जान पाती। यह कर्म आत्मा के ज्ञान गुण को नष्ट नहीं करता परन्तु उसी तरह ढक देता है जैसे बादल सूर्य के प्रकाश को ढ़क देते हैं। इस कर्म के प्रभाव से सुनने व देखने की शक्ति मन्द हो जाती है या बहरापन आना या उनसे प्राप्त ज्ञान की अनुभूति न हो पाना ज्ञानावरणीय कर्म का फल है। सुना हुआ या रटा हुआ ज्ञान विस्मृत हो जाना या पढ़ने-सुनने में चित्त का एकाग्र न हो पाना भी इस कर्म का परिणाम है। ज्ञान का निरादर करने से और ज्ञान की महत्ता के प्रति विद्रोह करने से यह कर्म बंधता है। ज्ञानी की प्रशंसा सुनकर मन ही मन जलना-कुढ़ना, उनकी प्रकट रूप से निन्दा करना व अफवाहें फैलाना, ज्ञानदाता का नाम छिपाना, ज्ञान प्राप्ति में विघ्न उपस्थित करना और धन या यश बटोरने हेतु ज्ञान की शक्ति का दुरुपयो...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने बुधवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि साधक को वीतराग वाणी,जिनवचन पर सच्ची श्रद्धा रखनी चाहिए। प्रभू महावीर ने श्रध्दा को परम दुर्लभ बताया है।उन्होंने कहा कि केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं हैl धर्म कथा, सत्संग का असली लाभ जब मिलता है कि श्रोता गुरु की हित शिक्षा को सुनकर अपने जीवन में, आचरण में ग्रहण करता है। आपने कितने प्रवचन सुन लिए फिर भी आत्मा का कल्याण क्यों नहीं हुआ इस पर चिंतन मनन करें तो एक ही बात परिलक्षित होती है कि आपने गुरु भगवंत महापुरुषों की वाणी तों बहुत बार सुनी है पर जिनवाणी को श्रवण करके भी उस पर अमल नहीं किया। उसे अपने जीवन में आत्मसात नहीं किया। जिसके कारण आपकी आत्मा का कल्याण संभव नहीं हो सका और मुक्ति अभी भी आपसे दूर है। आवश्यकता ...
कर्नाटक प्रदेश की राजधानी फूलों की नगरी बेंगलुरु की धर्मधरा पर तुरकिया जैन भवन, गांधीनगर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य गुरुदेव श्री पंकज मुनि जी म. सा., दक्षिण सूर्य अमर शिष्य प.पू. डॉ. श्री वरुणमुनि जी म. सा., मधुर गायक मुनिरत्न प.पू. श्री रूपेशमुनि जी म.सा आदि ठाणा 3 एवं बेंगलुरु में विराजित समस्त साधु-साध्वीजी भगवंतो की पावन निश्रा में 5 अक्टूबर 2025 को सरदार वल्लभ भाई पटेल सभागार, वसंतनगर, बेंगलुरु के भव्य विशाल प्रांगण में श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरु के तत्वावधान में श्रुताचार्य, साहित्य सम्राट, उत्तर भारतीय प्रवर्तक, पूज्य गुरुदेव श्री अमरमुनि जी म.सा. के संयम अमृत महोत्सव समापन समारोह के विराट आयोजन के साथ श्रमण संघीय प्रथम आचार्य सम्राट प.पू.श्री आत्मारामजी म. सा. एवं प. पू. प्रवर्तक गुरुदेव श्री शुक्लचंद्रजी म.सा. का जन्...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने मंगलवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सुनना भी एक कला है। हमारी साधना तभी सफल होगी जब हम गुरु ज्ञानी भगवंत से जिनवाणी श्रवण करके उसे अपने जीवन में उतारें। आचरण के बिना श्रवण निष्फल हो जाता है। श्रवण दही है और आचरण नवनीत है। श्रवण का सार आचरण है। भगवान महावीर ने भी कहा है कि ज्ञानी होने का सार यही है कि वह किसी जीव की हिंसा न करें।श्रवण का सार ज्ञान है और ज्ञान का सार हैं। साधक के जीवन में उसका यथार्थ रूप में सम्यक आचरण। उन्होंने आगे कहा कि धर्म कथा सुनना और सुनाना भी एक प्रकार का स्वाध्याय तप है। धर्म उपदेश सुनकर उसे कण भर भी अपने आचरण में नहीं लावे तो जीवन की यह दुर्बलता ही कही जाएगी वास्तव में वही साधक प्रशंसनीय ज्ञानी, त्यागी, तपस्वी कहलाता है...
जालना : प्रभू महावीरांनी जे- जे सांगितले त्याचे अनुकरण आम्ही करतो का? त्यांचे आपल्यावर अनंत उपकार आहेत. त्यांच्या सुंगधाचं रसपान करण्याची हीच वेळ आहे. सवाल आणि उत्तरही महावीरचं आहे. म्हणूनच म्हटले आहे की, प्रभू महावीरांना विसरल्यानंच आमच्या समस्या वाढू लागल्या. आपल्या समस्या का वाढू लागल्या याचा विचार करण्याची हीच वेळ आहे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, प्रभू महावीरांनी जे काही सांगून ठेवले आहे, ते काही उगीच सांगितले नाही. तीर्थंकरांचा परिचय एकीकडे प्रभू महावीरांंचा एकीकडे आहे. प...
युवक परिषद् तमिलनाडु के संचालन में प्रतिक्रमण सीखों अभियान के अंतर्गत चेन्नई व तमिलनाडु के अनेक केन्द्रों में परीक्षा सम्पन्न जैन परिवार के हर सदस्य को प्रतिक्रमण कंठस्थ हो आचार्य भगवन्त श्री हीराचन्द्रजी म.सा की प्रेरणा को लक्ष्य को लेकर चेन्नई में श्री जैन रत्न युवक परिषद् तमिलनाडु के तत्वावधान में प्रतिक्रमण के चतुर्थ चरण की परीक्षा का आयोजन रविवार 3 अगस्त 2025 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के तत्वावधान में रत्न स्वर्ण महोत्सव मनाया जा रहा हैं | रत्न स्वर्ण महोत्सव के अन्तर्गत प्रतिक्रमण के चतुर्थ चरण की परीक्षा चेन्नई के साहूकारपेट में बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट स्थित स्वाध्याय भवन सहित महानगर के अनेक क्षेत्रों व तमिलनाडु के अनेक केन्द्रों पर आयोजन युवक...
गुरु आनंद प्रार्थना मंडल आकुर्डी निगडी प्राधिकरण द्वारा पुना दर्शन यात्रा का आयोजन किया गया प्रथम चरण मे उपाध्याय प्रवर प्रविण ऋषिजी म. सा., द्वितीय चरण पु मुकेश मुनीजी म. सा., त्रुतिय चरण पु. चैतन्यश्री जी म.सा. चतुर्थ चरण पु प्रथम दर्शनाजी एवं पंचम चरण में पु. प्रणव दर्शनाजी आदि ठाणा के दर्शन, प्रवचन, मंगलमय आशिर्वाद संग संप्पन्न हुई! त्रुतिय चरण दर्शन यात्रा में मधुर कंठी, प्रवचन प्रभाविका पु चैतन्य श्री जी ने अपने छोटे-छोटे उद् बोधन मे स्थानक भवनमे जब हम जाते है तब पॉंच अभिगम की पालना करनी चाहिये! सचित का त्याग, अचित का विवेक, उतरासंग धारण करे, अंजली करण एवं मनकी एकाग्रता बनाये रखे ! इस अवसर पर डॉ. पु जिज्ञासाजी, सुबोधीजी, नवकिर्तीजी म.सा. विराजमान थे! श्री संघ के और से सुभाषजी ललवाणी ने महासाध्वीयों को शेकेकाल मे आकुर्डी पधारने की विनंती रखी! ललवाणी कुलवंशज खद्दरधारी कर्नाटक गजकेशरी प...
अपनत्व के भाव हमे सम्रुध्द बना सकते है! साध्वी स्नेहाश्री जी म. सा. आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे महाराष्ट्र सौरभ उपप्रवर्तिनी पु. चंद्रकलाश्री जी म. सा. आदिठाणा का चातुर्मास धर्मआराधना- जप- तप के माध्यम से सुचारु रुप से मार्गस्थ है! लेने से ज्यादा देने के भाव रखे! अपनत्व से संबंध मधुर बनते है! ज्यो हमे मिला है उसे स्विकारने के भाव हम मे चाहिए! यह सभी जीवन को सम्रुध्द बना सकते है! साध्वी पु स्नेहाश्री जी म.सा. ने अपने प्रवचन मे फर्माया! आज के धर्म सभामे सुश्राविका अर्चना जी राजेंन्द्र जी लुणावत ने 26 उपवास के प्रत्याख्यान गुरुमॉं के मुखान्वे ग्रहण किये जिनके मासखमण के भाव है! और शिरुर से पधारी राखी संजयजी कोठारी जिनका पाँचवाँ वर्षितप जारी है उन्होंने भी प्रत्याख्यान लिये! दोनों तप आराधको का सन्मान श्री संघ के द्वारा विश्वस्तो ने किया! संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी ने तपस्वीय...
किलपॉक, चेन्नई : तमिलनाडु के इतिहास में प्रथम बार एवं मुनिश्री मोहजीतकुमारजी के सान्निध्य में पंचम बार ‘विघ्नहर ह्रीं कार अनुष्ठान’ का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद्, किलपॉक के तत्वावधान में हुआ। ह्रीं कार की आकृति में बैठकर 151 जोडों सह सैंकड़ो अनुष्ठानकर्ताओं ने आचार्य सिद्धसेन द्वारा रचित कल्याण मन्दिर स्तोत्र का मुनि जयेशकुमारजी के भावपूर्ण संगान के साथ उच्चारण एवं श्रवण किया। इस अवसर पर अनुष्ठान स्वर प्रस्तोता मुनि जयेशकुमारजी ने कल्याण मंदिर स्तोत्र की रचना से जुड़ी विशिष्ट चमत्कारी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु पार्श्वनाथ का माहात्म्य और प्रभाव तीर्थंकर परंपरा में अपना अलग विशिष्ट स्थान रखता है।उन पर रचित अनेक स्तोत्र भक्तों की आस्था के अनन्य केंद्र है। इन्हीं स्तोत्रों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण नाम है- कल्याण मंदिर स्तोत्र। इस स्तोत्र के रचयिता आचार्य सिद्धसेन...
जालना : कोणाच्या सहयोगातून बाहेर यायचं. आपणही परमात्मा, महात्मा, धर्मात्मा तर आपण माणूसही राहत नाहीत. मैत्रीभावही आपल्याला समक्यत्व बनू शकते. कोणीही परखा नाही, मैंत्रीभावही आणू शकतो. ना की, मिथ्याभाव! असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, भगवान महावीरांसाठीच हा चातुर्मास आहे. ही भूमि साफ ठेवली म्हणूनच या ठिकाणी थांबू वाटतं, अन्यथा कोण येथें थांबणार! आम्ही साधू- साध्वी तर केवळ- केवळ प्रभू महावीरांना तुमच्या पर्यंत पोहचू शकतो. ना की, प्रवचन! जेव्हा आम्ही खुद बुरे होते तो दुसरा भी हमे बुरा...