रक्षाबंधन पर विशेष प्रवचन आकुर्डी स्थानक भवन में आयोजन ! रक्षाबंधन प्रेम का पर्व है। प्रेम न हो तो जीवन नीरस हो जाता है और प्रेम हो तो मरुस्थल भी मरुधान बन जाता है। उन्होंने कहा कि राम के समय मर्यादा का मार्ग था, कृष्ण के समय कर्मयोग की प्रेरणा थी, महावीर के समय अहिंसा उपयोगी थी, पर आज के समय में इंसान की हर समस्या का समाधान एकमात्र प्रेम के मार्ग से संभव है। उन्होंने कहा कि अब हर परिवार, समाज और देशों के बीच प्रेम की आवश्यकता है। प्रेम तो उस सूई की तरह है जो टूट चुके रिश्तों को सांधने का काम करती है। जिस घर में प्रेम और मौहब्बत है वहाँ लक्ष्मी तो छोड़ो महावीर और महादेव भी आने के लिए मजबूर हो जाते हैं। रक्षाबंधन पर आयोजित विशेष प्रवचन-सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेम से बढ़कर न तो कोई धर्म है न कोई पुण्य। प्रेम में प्रणाम भी है, प्रसाद भी है और आशीर्वाद भी। ...
चिंचवड गाँव मे चातुर्मासार्थ विराजीत उपप्रवर्तिनी पु चंदनबालाजी म.सा. पु. पदमावतीजी म.सा. आदि ठाणा 7 के पावन सानिध्य मे सुश्राविका अर्चनाजी राजेंन्द्रजी लुणावत ने 30 उपवास कर मासखमण तप का लाभ लिया! गत अनेक वर्षो से अर्चनाजी की मासखमण करने की मनिषा इस वर्ष देव गुरुधर्म के क्रुपा से पुरी हुई! इस अवसर पर अर्चनाजी को श्री संघ, जैन कॉन्फ़्रेंस, विविध महिला मंडल द्वारा सम्मानित किया गया! सन्मान करते हुये चिंचवड संघकेअध्यक्ष अशोकजी बागमार, कार्याध्यक्ष राजेंन्द्र जी जैन, पुर्वाध्यक्ष दिलीपजी नहार, सुभाषजी शिंगवी, दिलीपजी चोरडीया, अशोकजी बाफणा, मंडलेचा जी, भंडारी जी राजेंन्द्र जी लुणावत आदि पदाधिकारी गण, जैन कॉन्फ़्रेंस एवं स्वानंद महिला मंडल के और से आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी। प्रा प्रकाशजी एवं सुरेखाजी कटारिया, मनोज जी सोलंकी, सुभाषजी सुराणा, पीएम जैन आदि!
चेन्नई : अणुव्रत समिति द्वारा मानव में मानवता के विकास की तर्ज पर समिति शिष्टमंडल दक्षिण रेलवे कार्यालय में कार्यरत अधिकारीयों से मिला। अध्यक्षा श्रीमती सुभद्रा लुणावत के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने चेन्नई सेंट्रल के पास अवस्थित रेलवे कार्यालय में गया। मुख्य ट्रांसर्पोटेशन प्लानिंग मैनेजर श्री एस बालाजी अरुणकुमार से शिष्टाचार भेंट की। अध्यक्षा ने अधिकारी को राखी बांध कर उनके प्रति शुभकामना सम्प्रेषित कर अणुव्रत आंदोलन के बारे में सामान्य जानकारी प्रदान की गई। एस बालाजी ने बताया कि मुझे अपनी प्रशासनिक सेवा में विभिन्न स्थानों पर आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ और आचार्य श्री महाश्रमण से रूबरू होने का मौका मिला। आपका जैन आचार्य होते हुए भी अणुव्रत के द्वारा जो पथप्रदर्शन दिया जा रहा है, वह समाज, राष्ट्रीय और विश्व की अनेकानेक समस्याओं को रोकने, मिटाने का अचूक असाम्प्रदायिक आंदोलन ह...
वेदनीय कर्म सुख-दुःख का वेदन (अनुभव) कराता है। जैसे तलवार की धार पर लगे हुए शहद को चाटने से सुख का संवेदन होता है, उसी प्रकार साता वेदनीय कर्म के उदय से साता (सुख) का अनुभव होता है। साथ ही मधुलिप्त तलवार को चाटते हुए जिह्वा के कट जाने पर दुःख का एहसास होता है, उसी भाँति असाता वेदनीय कर्म के उदय से दुःख का अनुभव होता है। साता वेदनीय कर्म के प्रभाव से सुविधाओं की सर्वत्र अनुकूलता, सुशील परिवार और ऐसी सुखद परिस्थिति प्राप्त होती है जिसमें तनाव, भय और विपत्ति का नामोनिशान नहीं होता। असाता वेदनीय कर्म के प्रभाव से इससे विपरीत, अनिष्ट का संयोग होने से दुःख का अनुभव होता है। फलितार्थ यह है कि जो भी सुख-दुःख मिलते हैं उन्हें न कोई ईश्वर या खुदा देता है और न कोई देवशक्ति या मनुष्य देता है, यह वेदनीय कर्म का ही फल है। प्राणियों को मारने-पीटने व सताने से या शोक-संताप पहुँचाकर दुःखी करने से असाता वेदन...
जालना : आत्मा हाच परमात्मा आहे, पण हे लक्षात कोण घेतो. त्यासाठी संकल्प करावा, परंतू आम्हाला तर संसाराशिवाय काहीही लागत नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, आपण डॉक्टर, इंजिनिअर, वकील काहीही बनू शकतो. परमात्मा तर आम्ही केवळ तसे बनू पाहतो, परंतू त्यासाठी त्याग करण्याची आमची इच्छा आहे का, असे सांगून ते म्हणाले की, एक गाव होते आणि त्या गावात दोन मिठाचे पुतळे होते. त्यांनी विचार केला की, आपल्याला ह्या समुद्र हा मोजयाचा आहे, त्यासाठी आपल्याला त्यात डुबकी लावावी लागेल. असा त्यांनी विचार...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने शुक्रवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को ज्ञान विकास के अनेक आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि जिसमे आत्म ज्ञान का प्रकाश हो गया फिर उस जीवात्मा को दुसरे किसी भी बाह्य प्रकाश की जरूरत नहीं रहती है। संसार में अज्ञान ही सभी दुखों का कारण है। आशा, तृष्णा, वासना, कामना, इच्छा आदि सब काम के ही रूप है, जो अज्ञान से पैदा होते है। स्वाध्याय ज्ञान प्राप्ति का प्रमुख साधन है। स्वाध्याय करने से अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है और आत्मा में सम्यक ज्ञान का प्रकाश हो जाता हैl उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य की प्रत्येक प्रवृत्ति में पद पर ज्ञान की आवश्यकता होती है। साधना के परिज्ञान के अभाव में कभी सिद्धि नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि सम्यक ज्ञान जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी है वह सुख, श...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने गुरुवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का तीसरा नेत्र कहा गया है। जिसके द्वारा जाना जाय, वह ज्ञान है। संसार के भौतिक पदार्थों और आध्यात्मिक तत्वों के स्वरूप को समझने के लिए ज्ञान के समान दूसरा और कोई नेत्र नहीं है। भगवान महावीर ने भी कहा है कि पहले ज्ञान प्राप्त करो और फिर दया, आचरण करें। उन्होंने आगे कहा कि ज्ञान आत्मा का दर्पण है। ज्ञान मन के समस्त विकारों को नष्ट करके उसे शुद्ध पवित्र, निर्मल बनाता है। पहले जानकारी ज़रुरी है। बिना ज्ञान के यह अमृत है, विष है, इसका पता नहीं चलेगा। यदि आपको जानकरी, उस चीज का सही बोध, ज्ञान हासिल है तो आप अमृत और विष को जान सकते है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने भी कहा है कि इस संसार में ज्ञान के समान प...
दर्शनावरणीय कर्म आत्मा के दर्शन गुण को आवृत्त करता है। जैसे राजा के दर्शन हेतु उत्सुक व्यक्ति को द्वारपाल रोक देता है. ऐसे ही यह कर्म आत्मा की दर्शन शक्ति पर पर्दा डाल कर वस्तु के सामान्य बोध (जानकारी) को रोक देता है। इस कर्म के प्रभाव से इन्द्रियों का सामान्य एहसास भी स्पष्ट नहीं हो पाता। कान, नाक, आँख, जबान और त्वचा विकृत या नष्ट हो जाती है अथवा यह कर्म प्राणी को मूक, बधिर, नेत्ररोगी या अपंग बना देता है। इसके अतिरिक्त निद्रा भी इस कर्म के प्रभाव से आती है जो वस्तु का सामान्य बोध नहीं होने देती। नेत्र, कान, नाक, जीभ व त्वचा का दुरुपयोग करने से इस कर्म का बन्ध होता है। बहरे-गूँगे, लूले, लँगड़े और अंधें या अंगविकल का तिरस्कार करने से, उन्हें धक्का देकर निकालने से, उनकी यथाशक्ति सहायता न करने से, उनका उपहास करने से तथा उनके प्रति दयाभाव न रखने से यह कर्म बँधता है। इसके फलस्वरूप जो कार्मिक स्...
युगप्रधान आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनि रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में गुरुवार को तेरापंथ धर्मस्थल में राजेंद्र डोसी के मासखमण तप (31 दिन) एवं सम्पत देवी नाहटा के इक्कीस (21 दिन) तप के उपलक्ष्य पर तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अच्छी संख्या में लोग उपस्थित हुए। मुनि श्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – तेरापंथ धर्मसंघ में तपस्या का अनूठा इतिहास है। उन्होंने तपस्वी मुनि अनोपचंदजी के जीवन का रोमांचकारी प्रसंग सुनाया। ”करते हैं अभिनंदन तप बारम्बार” गीत का मधुर संगान किया। मुनिश्री ने कहा राजेंद्रजी एवं सम्पत देवी ने मजबूत मनोबल से तप किया है। दोनों तपस्वियों को आध्यात्मिक आशीर्वाद। मुनि रमेश कुमार जी ने कहा तप दो अक्षर का छोटा-सा नाम बहुत बड़ा करता है काम। ‘त’ का अर्थ...
प.पू .उपप्रवर्तिनी महासती श्री प्रमिलाजी म.सा. की सुशिष्याएं तप कौमुदी महासती श्री निर्मलाजी म.सा. आदि ठाणा-5 सुख साता पुर्वक राजाजीनगर स्थानक में विराजमान है। कल शुक्रवार 08.08.2025 * प्रातः *9.00 बजे से ठीक* *10.30*तक* प्रवचन रहेगा, ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधार कर जिनवाणी श्रवण करने का लक्ष्य अवश्य रखे कल *श्रमण सुर्य, मरुधर केसरी,श्री मिश्रीमलजी म. सा का 135 वां, एवं शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक श्री रूपचन्दजी म. सा “रजत”का 98वां जन्म जयंती महोत्सव एवं पुज्य गुरुणी मैया महासती श्री चन्दा जी म. सा का 73वां पुण्य स्मृति दिवस* दो – दो सामायिक, एवं एकासन दिवस के साथ तप त्याग, से मनाई जाएगी कल प्रभावना,गौतम प्रसादी, एवं एकासन के लाभार्थी *श्री मति शान्तीदेवी स्व श्री जवरीलालजी, स्व श्री प्रकाशचन्दजी, श्री उत्तमचन्दजी, श्री पदमराजजी,मनीषजी,नितेशजी, राहुलजी, चिरागजी, यु...
जालना : प्रभू पर्यंत आम्हाला कोण जाऊ देत नसेल ते अज्ञान आहे! मनुष्याला अज्ञान कधीही पुढे जाऊ देत नाही, आम्हाला प्रभूंची आठवण आणि संसाराशी जवळीकही साधू देत नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, सर्व समस्यांचे मुळ हे अज्ञानात आहे. परमपिता परत्मा प्रभू महावीरांपासून आम्हाला कोण दूर लोटत असेल तर ते अज्ञान आहे. म्हणूनच या अज्ञानाला आम्ही घालवले पाहिजे. प्रत्येक गोष्टीला एक मर्यादा आहे. परंतू प्रभूंना कसलीही मर्यादा नाही. प्रभूंना कसलीही सिमा नाही. समुद्रालाही पण तळ आहे. परंतू प्रभूंचे ...
‘संविधान की धार, मर्यादाओं का हो आधार’ मुख्य विषय पर आधारित हुई प्रतियोगिताएं चेन्नई: अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में, चेन्नई अणुव्रत समिति की आयोजना में अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 की जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन साध्वी उदितयशा के सान्निध्य में साहुकारपेट तेरापंथ सभा भवन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्रीजी द्वारा नमस्कार महामंत्र से हुआ। निर्णायक श्रीमती रेखा डी मरलेचा ने मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया। अणुव्रत समिति अध्यक्षा एवं एसीसी राष्ट्रीय सहसंयोजिका श्रीमती सुभद्राजी लुणावत ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। मंत्री एवं एसीसी तमिलनाडू राज्य प्रभारी श्री कुशल बाँठिया ने अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय स्तर पर प्रथम आए विद्यार्थियों के बीच में यह प्रतियोगिता समायोजित है। साध्वी श्री उदितयशाजी ...