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धन्यवाद देना और क्षमायाचना करना कभी ना भुले- आगमज्ञाता डॉ. सुयोगऋषिजी

नवकार आराधक उपप्रवर्तक पु तारकऋषिजी म.सा. आगमज्ञाता डॉ. सुयोगऋषिजी म.सा. आदि ठाणा 7 सादड़ी सदन स्थानकभवनमे चातुर्मासार्थ विराजमान है! धर्मआराधना एवं तपआराधना के माध्यमसे चातुर्मास गतिमान है! जिनवाणी की मधुर रसना भक्तगण ग्रहण कर रहै है! आज डॉ. सुयोगऋषिजी म.सा. ने धन्यवाद एवं क्षमा का महत्व अपने मधुरवाणी से द्रुष्टांतो सह समझाया! और दो छोटे शब्दोकी महानता बतायी! जन्म देनेवाले मॉं-बापका धन्यवाद यह सबसे बड़ा पुण्यका काम है ! सॉंस- और बहु के मधुर रिश्तो मे धन्यवाद की अदाकारी एवं क्षमापना की महकता समझायी! आज के धर्मसभा मे आकुर्डी-निगडी-प्राधिकरण श्री संघ के अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी तथा चातुर्मास समिती के स्वागताध्यक्ष मोतीलालजी चोरडीया उपस्थित थे ! प्रवचन, दर्शन एवं मंगलमय आशिर्वाद का लाभ लिया! अपने उदबोधन मे सुभाषजीने गुरुचरणोमे क्रुतज्ञता व्यक्त कर गुरुमॉं पु. चंद्रकलाश्री जी पु. स्नेहाश्रीजी आद...

तपस्वी करते हैं धर्मसंघ की प्रभावना : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तपस्विनी बहिन लीला देवी के 35 दिन की तपस्या पर तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनिश्री रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में सोमवार को तेरापंथ धर्मस्थल में लीला देवी महनोत के मासखमण तप (35 दिन) एवं प्रतीक बोथरा के धर्मचक्र तप के उपलक्ष्य पर तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अच्छी संख्या में लोग उपस्थित हुए। तपस्विनी बहन लीला देवी महनोत को जुलूस के साथ समता भवन के सामने से तेरापंथ धर्मस्थल में लाया गया।   मुनि श्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – तपस्या करने वाले सिर्फ अपने कर्मों की निर्जरा ही नहीं करते हैं बल्कि जन-जन के प्रेरणास्रोत बनते हैं तथा धर्मसंघ की प्रभावना भी करते हैं। तपस्या ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र की आराधना है। सभी तपस्वियों के प्रति मंगल कामना।   मुनि रमेश कुमार जी ने कहा कि ...

गुरु अमर संयम अमृत वर्ष समापन समारोह का विराट आयोजन 5 अक्टूबर को बेंगलुरु में

कर्नाटक प्रदेश की राजधानी फूलों की नगरी बेंगलुरु की धर्मधरा पर तुरकिया जैन भवन, गांधीनगर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य गुरुदेव श्री पंकज मुनि जी म. सा., दक्षिण सूर्य अमर शिष्य प.पू. डॉ. श्री वरुणमुनि जी म. सा., मधुर गायक मुनिरत्न प.पू. श्री रूपेशमुनि जी म.सा आदि ठाणा 3 एवं बेंगलुरु में विराजित समस्त साधु-साध्वीजी भगवंतो की पावन निश्रा में 5 अक्टूबर 2025 को सरदार वल्लभ भाई पटेल सभागार, वसंतनगर, बेंगलुरु के भव्य विशाल प्रांगण में श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरु के तत्वावधान में श्रुताचार्य, साहित्य सम्राट, उत्तर भारतीय प्रवर्तक, पूज्य गुरुदेव श्री अमरमुनि जी म.सा. के संयम अमृत महोत्सव समापन समारोह के विराट आयोजन के साथ श्रमण संघीय प्रथम आचार्य सम्राट प.पू.श्री आत्मारामजी म. सा. एवं प. पू. प्रवर्तक गुरुदेव श्री शुक्लचंद्रजी म.सा. का जन्...

अनित्यतेची जाणीव – वैराग्याकडे पहिले पाऊल

प्रवचन – 11.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) जैन तत्त्वज्ञानात बार भावना (१२ भावना) साधकाला आत्मशुद्धी, वैराग्य आणि मोक्षमार्गावर दृढ करण्यासाठी सांगितल्या आहेत. त्यातील पहिली भावना म्हणजे अनित्य भावना – जगातील सर्व गोष्टी नश्वर आहेत, क्षणभंगुर आहेत, याची सतत जाणीव ठेवणे. ‘अनित्य’ म्हणजे ‘स्थिर नसलेले’, ‘जे नाश पावणारे आहे’. हा भौतिक संसार, शरीर, संपत्ती, मान-सन्मान, संबंध – हे सर्व कालांतराने बदलतात आणि नष्ट होतात. आपला जीव मात्र नित्य आहे, पण शरीर आणि त्याच्याशी जोडलेल्या वस्तू अनित्य आहेत. उदाहरण जसे आपण रोज बाजारातून ताजे फुल विकत आणतो. दुसऱ्या दिवशी ते वाळते, तिसऱ्या दिवशी टाकून द्यावे लागते. हे जाणूनही आपण फुलाचा आनंद घेतो, पण त्याच्या टिकण्याची अपेक्षा ठेवत नाही. त्याचप्रमाणे जगातील प्रत्येक वस्तू तात्पुरती आहे, त्यामुळे तिच्याशी अति आसक्ती ...

जीवन निर्माण की शाला है ज्ञानशाला : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

ज्ञानशाला दिवस का आयोजन आचार्य महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में ज्ञानशाला दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर ज्ञानशाला संयोजक रोहित सुराणा एवं मुख्य प्रशिक्षिका ममता पुगलिया के नेतृत्व में सभी ज्ञानार्थी एवं प्रशिक्षिकाएं एक जुलूस के रूप में साधना मंदिर के पास से तेरापंथ धर्मस्थल पहुंचे। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने कहा कि ज्ञानशाला हमारे जीवन निर्माण की शाला है। जीवन में संस्कारों का जागरण अपेक्षित है। संस्कारी बच्चे समाज की नींव को मजबूत बनाते हैं। गुरुदेव तुलसी ने भावीपीढ़ी को सशक्त बनाने के लिए ज्ञानशाला का उपक्रम समाज के सामने रखा। अभिभावक अधिकाधिक संख्या में बच...

कर्मो का राजा मोहनीय कर्म: साध्वी सम्बोधि

जो कर्म आत्मा को मोहित करके मूढ़ता उत्पन्न करता है वह मोहनीय कर्म है। जिस प्रकार नशीली वस्तुओं के सेवन से सोचने-विचारने की बुद्धि कुण्ठित हो जाती है, उसी प्रकार मोहनीय कर्म आत्मा की विवेक शक्ति को कुण्ठित करके उसे दुष्कृत्य में प्रवृत्त कराता है। जैसे मदिरा-पान करने वाला जहाँ-तहाँ गिर जाता है और अपना नियंत्रण खो देता है उसी भाँति आत्मा मोहनीय कर्म के कारण मूढ़ बनकर अपने हिताहित का, सत्य-असत्य का व कल्याण-अकल्याण का भान भूल जाती है। हिताहित को कदाचित् जान-समझ भी लें किन्तु मोहवश आचरण नहीं कर पाती। काम-क्रोध, मद-लोभादि अनेक प्रकार के मनोविकार इसी कर्म के आविष्कार हैं। आत्मा को संसार में रचा-पचा कर रखने वाला एवं अपने आप को बिलकुल विस्मृत कराने वाला मोहनीय कर्म है। प्रणय सम्बन्ध, एवं प्रेम-लीलाएं भी इसी कर्म के विविध नाटक हैं। यही कारण है इसे सब कर्मों का राजा कहा जाता है। तीव्र क्रोध, मान, मा...

प्रभूला जुडण्यासाठी काय कराल-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : जो शिष्य सद्गुरुंना जुडला आहे, अशा शिष्यला देवत्व आल्याशिवाय राहत नसेल परंतू देवत्व प्राप्त करणे ही गोष्ट काही सोपी नाही. भक्तीत राहून आसक्तीला कसे जवळ करता येईल, हे दोन्ही रस्ते वेगळे आहेत, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, परमवीर म्हणजे महावीर! परिपूर्ण आहेत ते! केवळ पूर्ण नाही तर परिपूर्ण आहेत. परिवार म्हणजे चारही बाजूंनी वार येत असतात ना! तो परिवार! तसे हे परिपूर्ण नाही. जे खरोखरच परिपूर्ण आहेत. विचार करा, चार गतीने फिरणे म्हणजे हा आपला झाला परिगृह! आप जिसको देखते नही कल...

महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें- डॉ वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म . सा. ने धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महापुरुषों का जीवन जगत के प्राणी मात्र के लिए एक आदर्श प्रेरणा स्त्रोत होता है। उन्होंने श्रमण सूर्य मरुधर केसरी पूज्य प्रवर्तक श्री मिश्रीमल जी महाराज की 135वीं जन्म जयंती पर उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी महाराज मानवता के सच्चे मसीहा थे। उनके सद्प्रेरणा में जीवदया, मानव सेवा और गौशाला, स्कूल, कालेज, आदि समाज सेवा, उत्थान में समर्पित अनेकों धार्मिक, सामाजिक, पारमार्थिक संघ संस्थाएं वर्तमान में भी अनेक स्थानों पर सुन्दर रूप से संचालित गतिमान है। लोकमान्य सन्त , वरिष्ठ प्रर्वतक श्री रुप मुनि जी महाराज की 98वीं जन्म जयंती पर उनके गुणानुवाद करते हुए कहा कि वे आध्यात्मिक ऊर...

णीकमुनीक्रोध, मान, माया, लोभ हे अठरा पाप म्हणजे कौरवांची सेना-प.पू.रमजी म.सा.

जालना : क्रोध, मान, माया लोभ हे अठरा पाप म्हणजे कौरवांची सेना आहे. आपण बर्‍याचदा म्हणतो की, मला क्रोध येतच नाही. पण समोरचा तसा वागतो म्हणून… हे मोहनिया कर्माचा खेळ आहे. ही मोहनिया कर्माची ही औलाद आहे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, आत्माचे स्वभावीक गुण कोणता असेल तर तो म्हणजे क्षमा! माफ करणे म्हणजे किसी का दिल भर गया तो मेरी तो सब भडास निकाल गयी! कोई सुनेवालाही नही मिला था! डॉक्टरकडे आपण का जातो? तर तो आपल्याला ठिक करेल म्हणून. तोच जर बिमार पडत असेल तर त्याच्याकडे कोण जाईल....

साधना से सिद्धि की प्राप्ति- डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित श्रमण संघीय उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज, दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म. सा. एवं मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी म सा के पावन सानिध्य में शनिवार को धर्म सभा में आज सुरक्षा कवच मंत्र विधान रुप महा मंगलकारी कल्याणकारी और सर्व सिद्धि समृद्धिदायक आनंदकारी श्री पैसठिया छंद जाप अनुष्ठान का विशाल भव्य कार्यक्रम सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित किया गया। परम पूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से तीर्थंकर भगवान की स्तुति उर्जा मय भक्ति भाव से ओतप्रोत होकर बड़े ही श्रद्धा भक्ति आनंद से सराबोर होकर इस मंत्र जाप अनुष्ठान संपन्न किया। इस अवसर पर डॉ श्री वरुण मुनि जी ने पैसठिया मंत्र जाप अनुष्ठान की विधिवत साधना संपन्न कराते हुए इसके विशिष्ट साधना फल के बारे में सारगर्भित प्रकाश डाला। र...

अणुव्रत से होता हित अहित का ज्ञान – साध्वी उदितयशा

 नशा मुक्त रहने का संकल्प स्वीकार कर श्रावक समाज ने दी रक्षाबंधन की भेंट  अणुव्रत समिति द्वारा नशा मुक्ति कार्यशाला का हुआ आयोजन चेन्नई : अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई की आयोजना में नशा मुक्ति अभियान ‘एलीवेट एक्सपीरियंस द रियल हाइ’ कार्यशाला का आयोजन अणुव्रत अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री उदितयशाजी ठाणा 4 के पावन सान्निध्य में तेरापंथ भवन, साहुकारपेट, चेन्नई में समायोजित हुई।  साध्वी श्री उदितयशाजी ने कहा कि नशे का सबसे बड़ा परिणाम है, व्यक्ति स्वयं का भान भूल जाता है। उसके कारण वह अपने माता-पिता, परिजनों का सम्मान नहीं करता, अपने संस्कारों से च्युत हो जाता है। गुरुदेव तुलसी ने आज से 75 वर्ष पूर्व ही भांप लिया था, कि समाज में नशे की कुरीतियों घर कर सकती है, इसलिए उन्होंने हमें अणुव्रत रूपी महान अवद...

स्वाध्याय भवन में श्रावण शुक्ल पक्खी पर्व तप-त्याग पूर्वक मनाया

चेन्नई के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में श्रावण शुक्ल पक्खी पर्व जप-तप- त्याग पूर्वक मनाया गया | श्रद्धालुओं द्वारा आलोयणा का पाठ किया गया | पक्खी पाक्षिक पर्व पर स्वाध्यायी बन्धुवरों श्री प्रकाशचन्दजी ओस्तवाल,श्री भवरलालजी लोढा,कांतिलालजी तातेड़, सुमेरचंदजी बागमार, नवरतनमलजी बागमार ने चार प्रहर के पौषध व आर वीरेन्द्रजी कांकरिया, लीलमचन्दजी बागमार,बाबू धनपतराजजी सुराणा,विकास जी बम्ब, पंकजजी सुराणा,ने रात्रिकालीन संवर की साधना की | इस प्रसंग पर स्वाध्यायी श्री बादलचन्दजी बागमार ने देवसीय व नवरतनमलजी बागमार, भवरलालजी लोढा ने रायसी प्रतिक्रमण करवाया | पौषध व संवर साधना करने वालों के संग श्री उम्मेदराजजी ज्ञानचन्दजी बागमार आर नरेन्द्रजी कांकरिया नवरतनमलजी चोरडिया,दीपकजी श्रीश्रीमाल इंदरचंदजी कर्णावट, अशोकजी रांका,गौतमचन्दजी मुणोत,ने सायंकालीन प्रतिक्रमण करते हु...

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