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व्याख्यान पर वरिष्ठ स्वाध्यायी श्री महावीरचन्दजी बागमार ने स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा की

व्याख्यान पर वरिष्ठ स्वाध्यायी श्री महावीरचन्दजी बागमार ने स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा की

चेन्नई में 12 अप्रैल 2026 रविवार को साहूकारपेट के बेसिन वाटर स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में आचार्य पूज्यश्री हीराचंद्रजी म.सा के आज्ञानुवर्ती मधुर व्याख्यानी श्रद्धेय श्री गौतममुनिजी म.सा के प्रवचन- व्याख्यान पर वरिष्ठ स्वाध्यायी श्री महावीरचन्दजी बागमार ने स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा की |

स्वाध्यायी बन्धुवर श्री महावीरचन्द जी बागमार ने मार्च माह की जिनवाणी में प्रकाशित श्रद्धेय श्री गौतममुनिजी म.सा के प्रवचन पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा करते हुए कहा कि चार प्रकार की धर्म कथा बताई गई हैं | आक्षेपनी,विक्षेपणी, संवेगणी व निर्वेदणी धर्मकथा के प्रकार हैं | उन्होंने कहा कि जीवात्माओं को जगाने के लिए महापुरुष प्रवचनों में इन चार प्रकार की धर्म कथा करते हैं |

स्वाध्यायी बन्धुवर ने प्रवचन की महत्वत्ता में उल्लेख किया कि श्रद्धेय श्री गौतममुनिजी म.सा प्रवचन सुनने की प्रेरणा करते हुए फरमाते हैं कि जीव के लिए प्रवचन श्रवण करना मंगलकारी व कल्याणकारी होता हैं | आगम तीन प्रकार के बताए हैं,अथागमे,सुतागमे व तदुभयागमे | जिनवाणी को श्रवण करते हुए जीव कल्याण मार्ग की ओर अग्रसर होता हैं | जब भी प्रवचन सुनने का अवसर मिले तो तीन सूत्र जहन में रखे,श्रद्धा,श्रवण और संकल्प, जिनसे जीवन में कारगर बदलाव हो सकता हैं | प्रवचन को श्रद्धाभाव एवं मनोयोग से सुने |

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के पूर्व कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्याय सेवा प्रदान हेतु स्वाध्यायी बन्धुवर श्री महावीरचन्दजी बागमार के प्रति साधुवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्रवचन श्रवण करते हुए आचार्यश्री जयमलजी म.सा ,आचार्य पूज्यश्री गुमानचन्द्रजी म.सा,आचार्यश्री नानालालजी म.सा जैसे अनेक महापुरुषों को बाल्य व युवा अवस्था में वैराग्य जागृत हुआ व संयम के मार्ग में दृढ़तापूर्वक बढ़ते हुए अपनी आत्मा के कल्याण के साथ अनेक आत्माओं को संयम के मार्ग में आगे बढ़ाते हुए पर कल्याण करते हुए जिनशासन की अविस्मरणीय सेवाएं की |

स्वाध्यायी बन्धुवर श्री गौतमचन्दजी मुणोत ने गुरु सुखसाता पाठ से पृच्छा की | जे कमलजी चोरडिया ने श्रावक के संकल्प व मंगल पाठ किया | वीरपिता बाबू धनपतराजजी सुराणा,इंदरचंदजी कर्णावट, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग सहित श्रदालुओं की सामायिक परिवेश में प्रमोदजन्य उपस्थिति रही |

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