श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने शुक्रवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को ज्ञान विकास के अनेक आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि जिसमे आत्म ज्ञान का प्रकाश हो गया फिर उस जीवात्मा को दुसरे किसी भी बाह्य प्रकाश की जरूरत नहीं रहती है।
संसार में अज्ञान ही सभी दुखों का कारण है। आशा, तृष्णा, वासना, कामना, इच्छा आदि सब काम के ही रूप है, जो अज्ञान से पैदा होते है।
स्वाध्याय ज्ञान प्राप्ति का प्रमुख साधन है। स्वाध्याय करने से अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है और आत्मा में सम्यक ज्ञान का प्रकाश हो जाता हैl उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य की प्रत्येक प्रवृत्ति में पद पर ज्ञान की आवश्यकता होती है। साधना के परिज्ञान के अभाव में कभी सिद्धि नहीं मिलती है।
उन्होंने कहा कि सम्यक ज्ञान जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी है वह सुख, शक्ति, ऊर्जा प्रदान करने वाला है। सफलता का द्वार ज्ञान है। प्रारंभ में युवा मनीषी मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी ने अपने विचार व्यक्त किए। उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज ने मांगलिक पाठ प्रदान किया। संचालन राजेश मेहता ने कियाl