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स्वाध्याय सेवा हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

स्वाध्याय सेवा हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

बेसिन वाटर वर्क्स साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में स्वाध्याय सेवा हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

स्वाध्यायी बन्धुवरों का स्वाध्याय सेवा प्रदान करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में सम्पन्न हुआ |

 

वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने प्रश्न व्याकरण सूत्र के प्रथम संवर द्वार के अंतर्गत अहिंसा संवर का वांचन व विस्तृत विवेचन किया |

 

स्वाध्यायी श्री इंदरचंदजी कर्णावट ने गुरु भगवन्तों की स्तुति गान करते हुए गुरु के उपकारों का उल्लेख किया |

 

युवा स्वाध्यायी दीपकजी श्रीश्रीमाल ने तरुणजी बोहरा ‘तीर्थ’ द्वारा रचित ह्रदयस्पर्शी रचना का गान करते हुए मानव भव को सार्थक करने की बात कही |

 

स्वाध्यायी बन्धुवर श्री गौतमचन्दजी मुणोत ने सिद्ध बनने के लिए हमारी क्या तैयारी होनी चाहिए,हम क्या प्रयास करने व पुरुषार्थ करने के विषय पर भाव रखे |

 

युवा स्वाध्यायी योगेशजी श्रीश्रीमाल ने तत्त्वचिन्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा से श्रवण किये विषय मानव जीवन के लिए सफलता के त्रिसूत्र, लक्ष्य पर दृष्टि,सतत पुरुषार्थ व अनन्त धैर्य पर विवेचन किया |

 

पदमचन्दजी श्रीश्रीमाल ने गुरु भगवन्तों,स्वाध्यायी वीरेन्द्रजी कांकरिया के पुरुषार्थ व पुत्र द्वारा धर्म स्थान मे दैनिक सामायिक करने की प्रेरणा के प्रति कृतज्ञता भरे भाव रखे |

 

आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने कहा कि हमें नव तत्वों की विस्तृत जानकारी करनी चाहिए व प्रभु की वाणी पर दृढ़ श्रद्धा रखनी चाहिए किसी भी प्रकार से शंका नहीं रखनी हैं | धर्म के कार्यों में करेमि व कारवेमि व पाप के कार्यों में ना करेमि और ना करवेमि सिध्दांत पर अडिग रहना चाहिए |

 

वरिष्ठ श्रावक रुपराजजी सेठिया ने क्षमा की महत्ता बताते हुए ह्रदयस्पर्शी रचना सुनाई |

 

वीरपिता-वीरपति बाबू धनपतराजजी सुराणा ने जिनवाणी के सूत्रों का उल्लेख किया |

 

वरिष्ठ स्वाध्यायी महावीरचन्द जी बागमार ने प्राप्त दुर्लभ मानव जीवन से सार निकालने हेतु सम्यक पुरुषार्थ करने पर विस्तृत प्रकाश किया |

 

बालक सहजजी सुराणा ने समय का सदुपयोग करने के लिए अपनी दिनचर्या की दैनिक डायरी बनाकर उसका अवलोकन करते हुए जीवन को बदलने के सुन्दर भाव रखे |

 

जे कमलजी चोरडिया ने कर्मों पर चर्चा करते हुए “जरा कर्म देख कर करिए,इन कर्मों की बहुत बुरी मार हैं” प्राथना पर विस्तृत प्रकाश किया |

 

संकल्प सूत्र,मनोरथ चिन्तन, व्रत, प्रत्याख्यान, सामूहिक नियम,गुरु भगवन्तों की सुखसाता पृच्छा पाठ के पश्चात पदमचन्दजी श्रीश्रीमाल द्वारा मंगल पाठ के साथ स्वाध्यायी प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ |

 

प्रेषक : स्वाध्याय भवन, 24/25-बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट, साहूकारपेट, चेन्नई, तमिलनाडु

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