चेन्नई के स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में “सामर्थ्य का सदुपयोग है आत्महितकारी ” पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा
रविवार दिनांक 7 जून 2026 को चेन्नई साहूकारपेट के बेसिन वाटर स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत वरिष्ठ स्वाध्यायी महावीरजी बागमार ने जिनवाणी के मई अंक में प्रकाशित “सामर्थ्य का सदुपयोग है आत्महितकारी” पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा करते हुए कहा कि आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म. सा के आज्ञानुवर्ती तत्त्वचिन्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा ने प्रवचन में फरमाया हैं कि वर्तमान मे अवसर्पिणी काल के पांचवे आरे में सामर्थ्य घटता जा रहा है | धरती के बल,शरीर के बल,संहनन,बुद्धि के बल सभी में गिरावट आने का कारण,अवसर्पिणी काल का प्रभाव है | चारों कषायों का आपस मे सीधा संबंध है | निर्बल के सामने शक्ति का प्रयोग करना शक्ति का सदुपयोग नहीं होता | मिले हुए बल का दुरुपयोग नही करें |
रुप,बल,जाति,कुल,तप,ऐश्वर्य आदि आठ प्रकार के मदो का सदुपयोग नहीं कर अगर दुरुपयोग करेंगे तो अगले भव में जाति,कुल आदि बिगड़ेंगे | स्वाध्यायी बन्धुवर ने शास्त्रों, कथानकों में वर्णित अनेक उद्दरणो का उल्लेख करते हुए कहा कि सामर्थ्य का सदुपयोग आत्मा के लिए हितकारी है | स्वाध्यायीगणों की जिज्ञासाओं का समाधान हुआ |
वरिष्ठ स्वाध्यायी लीलमचन्द जी बागमार व उच्छबराजजी गांग ने तीर्थंकरों व गुरु भगवन्तों की स्तुति की | आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने जीवन संकल्प सूत्र व जे कमलजी चोरडिया ने तीन मनोरथ चिन्तन सूत्र किया | स्वाध्यायी बन्धुवर इंदरचंदजी कर्णावट ने प्रत्याख्यान कराते हुए मंगल पाठ सुनाया |
स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में स्वाध्यायीगण की सामायिक परिवेश में प्रमोदजन्य उपस्थिति रही |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ से आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्याय सेवा प्रदान करने हेतु स्वाध्यायी बन्धुवर व स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में उपस्थित स्वाध्यायीगण को साधुवाद ज्ञापित किया|
गुरु भगवन्तों की सुखसाता पाठ पृच्छा के पश्चात तीर्थंकरों, महापुरुषों,आचार्यों व गुरु भगवन्तो,चरित्र आत्माओं की जयजयकार संग स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा कार्यक्रम सुसंपन्न हुआ |