श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी ने सोमवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने जीवन में ज्ञानी महापुरुषों की सत्संग करने से व्यक्ति जीवन में सफलता के नये शिखर पर पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा कि जैसा संग वैसा रंग। अर्थात् मनुष्य जिसके साथ रहता है। जिस वातावरण में काम करता है वह इंसान वैसा हि बन जाता है।
दोष और गुण बुरे या अच्छे संसर्ग संगत से प्राप्त होते हैं। नीच पुरुषों के साथ समागम करने से बुद्धि की हानि होती है! समान विचार वाले, आचार वाले के साथ रहने से समानता आती हैं और विशिष्ट व्यक्तियों के साथ रहने से विशेषता प्राप्त होती है।
उन्होंने आगे कहा कि साधु सज्जन पुरुषों का समागम, परिचय, संगति ही मनुष्य के जीवन का उत्तम निर्माण करती है। बबूल की छाया में कांटे मिलते है और नीम की छाया में शुद्ध वायु हवा मिलती है।
ज्ञानी सद्गुरु के सत्संग समागम से आत्मा यहां पर यश प्राप्त करता है और परलोक में भी शुभ गति मिलती है। प्रारंभ में युवा मनीषी मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी ने गीत के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज ने सबको मंगल पाठ प्रदान किया। संचालन राजेश मेहता ने किया।