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पूज्य कांति मुनीजी म.सा. के देवलोग गमन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

श्रावक रत्न, संघ निष्ठ, श्रमण संघ के समर्पित श्रावक गौरव- डॉ. उत्तमचंदजी गोठी(चेन्नई ) धर्म संदेश! प्रखर वक्ता पूज्य श्री कांति मुनिजी के संलेखना संथारे के साथ देवलोक गमन के सूचना के बाद स्मृतीयों में पुरानी अनेकों वर्षों से और वर्तमान की घटनायें याद आने लगी। *आपने कदम कदम पर अनेकों वर्षों से लेकर अंतिम समय तक कैसे उनके संयम साधना, सलेखना समाधि में सहयोग दिया और एक सुश्रावक की अम्मा पिया की भूमिका निभाई जो आज कल लोगों में, पदाधिकारियों में बहुत कम देखने को मिलता है।* जिसका नाम यश प्रसिद्धि बढ़ती हो- उगते सूरज के साथ सब नमस्कार करते है लेकिन ढलते समय में, *जीवन के अंतिम पड़ाव में, शारीरिक अस्वस्थता, चित्त की उद्दिग्नता की अवस्था में कोई सहयेगी नहीं मिलता लेकिन संयम साधना में रहने की पूर्ण भावना में श्री उत्तम जी गोठी, श्री किशनजी ख़ाबिया, पूज्य कांति मुनिजी के सांसारिक भतीजे* आदि अनेकों भाई...

सत्याला ठोकर मारणारा एक दिवस नक्कीच पश्चाताप करतो -प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : ैआज जरी प्रत्येक जण आपल्या कामात व्यस्त असला तरी त्यालाही दुसर्‍यांच्या काड्या केल्याशिवाय त्याला करमत नाही. मात्र सत्याला ठोकर मारणारा एक दिवस नक्कीच पश्चाताप करतो, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, राग आणि व्देष जेव्हा कमी होईल, तेव्हा तर आम्ही त्याच्याशी जोडल्या जाऊ! परंतू राग आणि व्देषाला तर आम्ही करु पाहत नाहीत. म्हणून आपणही प्रभूंशी जोड्ल्या जाऊ शकत नाही. म्हणून प्रत्येकाने सत्याचा मार्ग स्वीकारला पाहिजे, परंतू आम्ही तो करु शकत नाही. सत्यला कधीही...

साधना कशासाठी केली. जाते ? -प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा

जालना : साधना कशासाठी केली जाते तर ती स्वत:च्या भल्यासाठी ना!! पण इथे तर साधना केली परंतू तीही दुसर्‍यांसाठी! दुसर्‍यांसाठी कशी करता साधना परंतू ती काहींना करता येते, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या दहाव्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, लेकीन भाव क्यो नही आता । जब मौत आयेगी तब कोई नही आयेगा छोडनेंको। हाथी अगर किचड में गया तो वो अच्छी जगह पर आ जायेगा। लेकीन आपकी साधना उसे लेकरही आयेगी। पर क्या वो साधना उसी के लिए है। नही ना! फीर वो कैसा आयेगा। जब हमारे रोम- रोम तरंगीत होते है तो इन्हि पलो...

विश्व शांति जप महोत्सव समाज का कल्याणकारी उत्सव है: वरुण मुनि जी

सन 2012 से प्रति वर्ष परम पूज्य गुरुदेव श्री अमर मुनि जी की पावन प्रेरणा से आत्म शुक्ल शिव जन्म जयंती के पवित्र अवसर पर हर साल सितम्बर माह में विश्व शांति जप महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर हमें गुरुजनों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस आयोजन में 9 महान मुनिराजों के अभिनंदन का अवसर मिल रहा है। उत्तर भारत गौरव परम पूजनीय श्री पंकज मुनि जी महाराज और श्री वरुण मुनि जी महाराज अमर शिष्य की प्रेरणा से बैंगलोर में शांति जप और महान मुनिराजों के अभिनंदन का आयोजन किया जा रहा है। जैन धर्म दीवाकर आचार्य सम्राट परम पूज्य श्री आत्मा राम जी ज्ञान ज्योति सम्पन्न महान पुरुष थे। डा. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने कहा कि महापुरुषों के गुणगान करने से हमारी आत्मा पवित्र और निर्मल होती है। गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास हेतु विराजमान डा. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि म...

आध्यात्मिक जगत के नवरत्नों का मनाया जाएगा जन्म-दीक्षा-पुण्य स्मृति समारोह

श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज साहब के पावन सान्निध्य में दक्षिण सूर्य अमर शिष्य डॉ. श्री वरूण मुनि जी महाराज की सद्प्रेरणा से श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गांधीनगर के तत्वाधान में 5 अक्टूबर को सरदार पटेल भवन वसंत नगर में प्रातः 9:00 से 12:30 बजे तक आध्यात्मिक जगत के 9 महापुरुषों के पावन जन्म- दीक्षा- पुण्यतिथि समारोह का आयोजन भव्यातिभव्य रूप से संपन्न होने जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्र संत जगदगुरु परम पूज्य डॉ श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज, कर्नाटक प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री थावरचंद जी गहलोत, कर्नाटक प्रदेश के मंत्री श्री दिनेश की गुंड्डू राव, राज्यसभा सांसद श्री लहर सिंह जी सिरोया, लोकसभा सांसद श्री तेजस्वी जी सूर्या आदि गणमान्य हस्तियां समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधार रहे हैं। दूसरी ओर मौन साधनाचार्य पूज्य श्री बसंत मुनि जी मह...

अनुभव के आलोक से आलोकित, अनुभवी होते बड़े-बुजूर्ग : साध्वीश्री उदितयशा

साहूकारपेट, चेन्नई : श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, चेन्नई द्वारा साध्वीश्री उदितयशाजी ठाणा 4 के सान्निध्य में 65 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के श्रावक- श्राविकाओं के लिए ‘दादा दादी चित्त समाधि शिविर’ तेरापंथ भवन साहूकारपेट में समायोजित हुआ।  नमस्कार महामंत्र समुच्चारण के पश्चात तीर्थंकर स्तुति से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। तेरापंथ सभाध्यक्ष अशोक खतंग ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया।   ‘बीती ताहि विसार दे, आगे की सुधि लेई’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए साध्वीश्री उदितयशाजी ने कहा कि आप माईत (बड़े-बुजूर्ग) अनुभव के आलोक से आलोकित अनुभवी होते है। छोटे कितने ही ज्ञानवान, जानकार, होशियार हो सकते है, लेकिन उनके साथ जब मात-पिता, दादा-दादी का आंतडियों से निकला आशीष मिल जाता है, तो वे सफलता के हर पायदान को प्राप्त कर सकते है, उत्तम मार्ग को प्राप्त, निर्माण कर सकते है। ¤ अनुभव के खजाने ...

पुदुचेरी मुख्यमंत्री से अणुव्रत समिति चेन्नई टीम ने की भेंट

अणुव्रत समिति चेन्नई ने मुख्यमंत्री को दी अणुव्रत आचार संहिता की जानकारी   चेन्नई/पुदुचेरी – अणुव्रत समिति चेन्नई ने पुदुचेरी मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी से उनके आवास स्थल पर भेट कर अणुव्रत आंदोलन के बारे में बताते हुए नशामुक्ति कार्यक्रम की जानकारी प्रदान की। अणुव्रत समिति चेन्नई अध्यक्षा सुभद्रा लुणावत ने मुख्यमंत्री को अणुव्रत दुपट्टा पहनाया। उपाध्यक्ष स्वरूप चन्द दाँती, मंत्री कुशलराज बाँठिया ने अणुव्रत आचार संहिता पट्ट प्रदान किया। राज्य प्रभारी भरत डी मरलेचा के साथ पुदुचेरी तेरापंथ उपसभा संयोजक हेमराज कुंड़लीया, सहसंयोजक कनकराज सुराणा, धनसुखजी सेठीया ने अणुव्रत की तमिल भाषा में लिखित पुस्तके भेट की। अणुव्रत समिति के निवेदन पर मुख्यमंत्री ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत आगामी चार अक्टूबर को पर्यावरण दिवस पर कार्यक्रम आयोजित करने की स्वीकृत प्रदान की और आश्वासन दिया कि पु...

उमेद सुशीला बोकड़िया खेल अकादमी परिसर का उद्घाटन

माधावरम, चेन्नई : आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल- माधावरम, चेन्नई के भिक्षु कैम्पस परिसर में ‘उमेद सुशीला बोकड़िया स्पोर्ट्स एकेडमी कैम्पस’ का जैन संस्कार विधि से उद्घाटन हुआ। नमस्कार महामंत्र समुच्चारण के साथ जैन संस्कारक श्री पदमचंद आँचलिया व श्री स्वरूप चन्द दाँती ने सम्पूर्ण मंगल मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ संस्कार विधि करवाई। तेयुप उपाध्यक्ष श्री हरीश भण्डारी, सहमंत्री श्रीकांत चोरड़िया, श्री पियूष नाहटा ने सभी के तिलक लगाकर कर मौली बाँधी। उद्घाटनकर्ता श्री उमेदसिंह श्रीमती सुशीला बोकड़िया परिवार, विद्यालय कमेटी चेयरमैन श्री तनसुखलाल नाहर, प्रधानन्यासी श्री विजयराज सेठिया, महामंत्री श्री सुरेश नाहर इत्यादी ने मंगल भावना पत्रक की स्थापना की। अर्हम् जप, लोगस्स ध्यान, महावीर स्तुति संगान के साथ शुभारंभ संस्कार विधि परिसम्पन्न हुई। स्कूल कमेटी चेयरमैन व उद्घाटन कार्यक...

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के बैनर का अनावरण

साहूकारपेट, चेन्नई : अणुविभा के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई की आयोजना में आगामी 01 अक्टूबर से समायोजित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के बैनर का अनावरण अणुव्रत अनुशास्ता युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की सुशिष्या साध्वी उदितयशाजी ठाणा 4 के सान्निध्य में तेरापंथ भवन साहूकारपेट में समायोजित हुआ।  साध्वी उदितयशाजी ने कहा कि अणुव्रत मानव को अच्छा, सच्चा, नैतिकवान बनाने का आंदोलन है। यह असाम्प्रदायिक आंदोलन है। जाति, धर्म, रंग, भेद से ऊपर उठ कर परिवार, समाज, राष्ट्रीय, विश्व के सर्वांगीण विकास में योगभूत बनता है। सर्व समाज को इस अभियान में जुट कर स्व के साथ पर कल्याण में सहभागी बनना चाहिए।  अणुव्रत समिति अध्यक्षा श्रीमती सुभद्रा लुणावत ने सप्ताह भर में समायोजित कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर अणुव्रत समिति पदाधिकारीगण, कार्यसमिति सदस्य, परामर्शक, कार्यकर्ता के साथ तेरापंथ सभाध्यक्ष अशोक...

दोष आणि दु:ख ह्या एकाच नाण्याच्या दोन बाजू-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : दु:ख मनुष्याला सुखा समाधानाने जगू देत नाही आणि दोषमनुष्याला धर्मापासून वेगळे करतो, म्हणूनच दोष आणि दु:ख ह्या एकाच नाण्याच्या दोन बाजू आहेत, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, मनुष्याकडे कितीही सर्व सुख सुविधा असल्या तरी त्याला दु:ख हे जगू देत नाही आणि दोष मनुष्याला सुधूरु देत नाही. हे काही दोषाचे पातक नाही तर मोहनिया कर्माचे आहे. म्हणून अगोदर मनुष्याने आपल्याकडे असलेले मोहनिया कर्म घालवण्यासाठी प्रयत्न करावेत, त्याशिवाय आपल्यातील मोहनिया कर्म संपणार नाही, असे सांगून ते ...

हर समस्या का समाधान है प्रभू महावीर -प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : हर समस्या का समाधान है प्रभू महावीर के पास है । तीर्थंकर को कोई भी गुरु नही होता. हम सब अव्यवहार राशीतून आलो आहोत. परंतू आमच्यावर त्यांचे अनंत उपकार आहेत, म्हणून आपण व्यवहार राशीत आलो आहोत, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात म्हणजेच 62 दिवस पुच्छीसुमन तप महोत्सवात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, प्रभू महावीर का हम क्या गुणगाण गाये। उनका जितना भी गुणगाण करेंगें उतनाही कम है। आपण खरे तर त्यांचे उपकार मानायला पाहिजेत. की, त्यांच्यामुळेच आपण इथ पर्यंत तरी आलो आहोत. हम जैन होते भी अपने में प्रभू महावीर कहॉ...

आम्ही जैन असूनही महावीर नाहीत-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : यहॉ हमे आत्मा, और क्या मिलता, हम जैन तर आहोत. परंतू महावीर नही है, ये तो बडी खेदजनक बाब आहे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात म्हणजेच 62 दिवस पुच्छीसुमन तप महोत्सवात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, प्रभू महावीरांमुळेच आम्हाला ही जीनवाणी आम्हाला मिळाली आहे. आम्ही पाहिले की, हमारी इज्जत करणे वालों ही, हमारी बेज्जत करते है। आम्ही अनेक प्रकारचे दु:ख पाहिले आहे. जैसे शब्दो में मेघ गर्जना है, उसी तरह हमारे में प्रभू महावीर श्रेष्ठ आहेत. प्रमू को चंद्रमा औरं चंदन का क्या वास्ता है । सुर्य हजार गुणा प्रकाश ...

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