श्रावक रत्न, संघ निष्ठ, श्रमण संघ के समर्पित श्रावक गौरव- डॉ. उत्तमचंदजी गोठी(चेन्नई )
धर्म संदेश!
प्रखर वक्ता पूज्य श्री कांति मुनिजी के संलेखना संथारे के साथ देवलोक गमन के सूचना के बाद स्मृतीयों में पुरानी अनेकों वर्षों से और वर्तमान की घटनायें याद आने लगी।
*आपने कदम कदम पर अनेकों वर्षों से लेकर अंतिम समय तक कैसे उनके संयम साधना, सलेखना समाधि में सहयोग दिया और एक सुश्रावक की अम्मा पिया की भूमिका निभाई जो आज कल लोगों में, पदाधिकारियों में बहुत कम देखने को मिलता है।*
जिसका नाम यश प्रसिद्धि बढ़ती हो- उगते सूरज के साथ सब नमस्कार करते है लेकिन ढलते समय में, *जीवन के अंतिम पड़ाव में, शारीरिक अस्वस्थता, चित्त की उद्दिग्नता की अवस्था में कोई सहयेगी नहीं मिलता लेकिन संयम साधना में रहने की पूर्ण भावना में श्री उत्तम जी गोठी, श्री किशनजी ख़ाबिया, पूज्य कांति मुनिजी के सांसारिक भतीजे* आदि अनेकों भाई बहनों ने जो सेवा कार्य किया है उसकी जितनी प्रशंसा की जाये थोड़ी है।
*आप जैसे श्रावकरत्नों से ये जिन शासन अग्रसर है और आगे भी बढ़ता रहेगा* आपकी साधु साध्वियों के संयम साधना में सेवा भावना आगे भी ऐसी बढ़ती रहेगी इस में कतई हमे संदेह नहीं है आपके शुभ आध्यात्मिक जीवन के लिये शुभ मंगल कामना।
—प्रबुद्ध मुनि