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भगवान कधीही आदेश देत नाहीत-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना: भगवान कधीही आदेश देत नाहीत, आदेश द्यायचे काम अधिकार्‍यांचे असते. म्हणुन ते कधीही आदेश देत नाहीत. तर ते केवळ उपदेश देत असतात. असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, एक भूमिका असते. तशीच ती प्रभूंची राहली आहे. शादी और दिक्षा ह्या सारख्याच आहेत. परंतू एकात मुक्ती आहे. वैराग्य आहे. परंतू लग्नाचे तसे नाही. ये जो शादी करते तो सेवा हो! साधू मे आनंद कब आयेगा। जब वैराग्य आयेगा तब। कोई नियंत्रण ना हो। कसी के अनुशासन में कोई भी रहाना नही चाहता। ऑख खुलती है दुनिया नजर आ...

ज्ञान से होती है – विवेक की प्राप्ति – डा. वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ, गांधी नगर में चातुर्मास के अवसर पर विराजमान दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी ने धार्मिक सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि महापुरुषों के गुणगान से हमारी आत्मा पवित्र और निर्मल होती है। वरुण मुनि जी ने बताया कि जब हम महापुरुषों की महिमा का गुणगान करते हैं, तो हमारी आत्मा में शुभ भावनाओं का संचार होता है। परमात्मा और महापुरुषों का स्मरण एवं उनके गुणों का बखान आत्मा को शुद्ध करता है। उन्होंने आगे कहा कि महान संतों की संगति और उनके गुण हमारे जीवन का आधार बनते हैं। इन गुणों को अपनाकर हम अपने भीतर की मलिनता, बुराइयों और दोषों को त्याग सकते हैं और महान संतों की परंपरा में बंधकर जीवन के सच्चे और शुद्ध मार्ग पर चल सकते हैं। वरुण मुनि जी ने ज्ञान को आत्मा का तीसरा नेत्र बताया, जिसके माध्यम से हम सही और गलत का भान कर सकते हैं। उन्होंने कहा...

स्वाध्याय भवन में शरद पूर्णिमा पर्व तप-त्याग पूर्वक मनाया

चेन्नई के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में शरद पूर्णिमा पर्व जप-तप- त्याग पूर्वक मनाया गया | शरद पूर्णिमा पर्व पर स्वाध्यायी बन्धुवर श्री आर वीरेन्द्रजी कांकरिया इंदरचंदजी कर्णावट आर नरेन्द्रजी कांकरिया दीपकजी श्रीश्रीमाल योगेशजी श्रीश्रीमाल रविंद्रजी बोथरा ने रात्रिकालीन संवर साधना की | पर्व प्रसंग पर प्रभु भक्ति व रायसी प्रतिक्रमण करते हुए सर्व जीव राशि से क्षमायाचना की | स्वाध्यायी बन्धुवर श्री योगेशजी श्रीश्रीमाल ने प्रतिक्रमण करवाया | जैन संकल्प,गुरु भगवन्तो की सुखसाता पृच्छा पाठ, सामूहिक वन्दन मांगलिक के साथ शरद पूर्णिमा को आध्यात्मिक पर्व के रुप में मनाया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर्व के पावन प्रसंग पर स्वाध्यायी बन्धुवरों ने सामायिक स्वाध्याय भवन, किलपाक में च...

जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ट्रस्ट बोर्ड साहूकारपेट का वार्षिक साधारण अधिवेशन समायोजित

 आगामी दो वर्षीय कार्यकाल के लिए पन्द्रह ट्रस्टियों का हुआ निर्वाचन चेन्नई : श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ट्रस्ट बोर्ड साहूकारपेट, चेन्नई का वार्षिक साधारण अधिवेशन प्रबंधन्यासी श्री विमल चिप्पड की अध्यक्षता में तेरापंथ भवन साहूकारपेट की तृतीय मंजिल पर समायोजित हुआ। सामूहिक मंगलाचरण के पश्चात प्रबंधन्यासी श्री विमल चिप्पड ने उपस्थित सदन का स्वागत करते हुए दो वर्ष के कार्यकाल में किए गए आध्यात्मिक, सामाजिक एवं विकास के कार्यों की गति प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से मिले सभी पदाधिकारीयो, सदस्यों, अनुदानदाताओं से प्राप्त सहयोग हेतु संपूर्ण सदन का आभार व्यक्त किया। सभी कार्यों एवं विकास की गति प्रगति को देखते हुए संपूर्ण सदन ने ओम अर्हम की ध्वनि से प्रसन्नता व्यक्ति की, एवं प्रतिवेदन पारित किए गए। गत साधारण वार्षिक अधिवेशन की कार्रवाई का वाचन सहमंत्री श्री प्रव...

मंजिल पर पोहचणे से पहिले ओ कही ओर पहुच जाते है-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : गाडी कधीही मद्यपान करुन चालवू नका. कारण त्यामुळे अ‍ॅक्सीडेंट होताही होता है। मंजिल पर पोहचणे से पहिले ओ कही ओर पहुच जाते है! इसिलिए मद्यपान करके गाडी कभी मत चलाना, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, प्रभू महावीर केवळ संदेश और उपदेश देते है। आदेश नही देते। साधना का लक्ष होे हमारा। मस्ति में रहना, परंतू हमारा भाव क्या है। कसी के निचे नही रहना। ऐसा भाव रहेगा तो चलेगा क्या। कोणाच्या वर असू द्या नाही तर वर आपल्याला काहीही फरक पडला नाही पाहिजे, परंतू असे होता...

कार्तिक मास — आत्मजागरण और संयम का पर्व: डा. श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने मंगलवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कार्तिक मास के शुभारंभ पर अपने ओजस्वी वचनों से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम तथा आत्मकल्याण का संदेश प्रदान किया। मुनि श्री ने अपने उपदेश में कहा कि कार्तिक मास आत्मशुद्धि, साधना और सत्कर्म का श्रेष्ठ काल है। यह मास व्यक्ति को भीतर की अशुद्धियों से विमुक्त होकर आत्मजागरण की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य अपनी इच्छाओं पर संयम रखकर सत्य, अहिंसा और करुणा के पथ पर चलता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सार्थक बनता है।मुनि श्री ने कहा कि धर्म का सार बाह्य आडंबर में नहीं, बल्कि अंतःकरण की पवित्रता में निहित है। प्रत्येक व्यक्ति को इस मास में जप, ध्यान और सत्संग के माध्यम से आत्मोन्नति का प्रयत्न करना चाहिए।प्रवचन के...

स्वाध्याय भवन में आश्विन शुक्ल चतुर्दशी पक्खी पर्व तप-त्याग पूर्वक मनाया

चेन्नई के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में आश्विन शुक्ल चतुर्दशी पक्खी सम्मिलित पर्व जप-तप- त्याग पूर्वक मनाया गया |  पक्खी पाक्षिक पर्व पर स्वाध्यायी बन्धुवर श्री उच्छबराजजी गांग कांतिलालजी तातेड़, श्री ए नवरतनमलजी बागमार ने चार प्रहर के पौषध की साधना की | इस प्रसंग पर स्वाध्यायी श्री बादलचन्दजी बागमार ने देवसीय व नवरतनमलजी बागमार ने रायसी प्रतिक्रमण करवाया | पौषध व संवर साधना करने वालों के संग श्री उम्मेदराजजी बागमार लीलमचन्दजी बागमार गौतमचन्दजी मुणोत आर नरेन्द्रजी कांकरिया ,दीपकजी श्रीश्रीमाल इंदरचंदजी कर्णावट श्रावकों ने सायंकालीन प्रतिक्रमण करते हुए सर्व जीव राशि से क्षमायाचना की | जैन संकल्प कांतिलालजी तातेड़ ने व ,गुरु भगवन्तो की सुखसाता पृच्छा पाठ गौतमचन्दजी मुणोत ने करवाया | वन्दन मांगलिक के साथ श्रावण पक्खी प्रसंग आध्यात्मिक पर्व के रुप में संपन्न हु...

उपाध्याय पु. पुष्करमुनीजी 116 वाँ जन्मोत्सव एवं पु. जेष्ठमलजी म.सा. का पुण्यस्म्रुति दिन मनाया

भाईंदरः पु. विनयप्रभाजी, डॉ. राजश्री जी,पु. नमिता श्री जी एवं पु.जिनआज्ञाश्री जी के सानिध्यमे अनेक भाविको के उपस्थिती में उपाध्याय श्री पुष्करमुनीजी म.सा. का 116वाँ जन्मोत्सव एवं गुरु पु. जेष्ठमलजी म.सा. का पुण्यस्म्रुती दिन गुणानुवाद एवं जप तप से आध्यात्मिक रुपमे मनाया गया! अनेक संघोसह आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के औरसे इस समारोह मे संघाध्यक्ष सुभाष जी ललवाणी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजयजी गांधी, कोषाध्यक्ष नेनसुख जी मांडोत, पुर्वाध्यक्ष जवाहर जी मुथा, पुर्व विंश्वस्त मोतीलालजी चोरडीया, ज्येष्ठ सदस्य विक्रमजी छाजेड एवं अजितजी कर्नावट उपस्थित थे! अध्यक्ष तेजप्रकाश जी मेहता, मंत्री संपतजी पावेचा एवं धर्मेशजी सुराणा ने उपस्थित भक्तगणों का स्वागत किया! आकुर्डी के संघाध्यक्ष सुभाष ललवाणी ने गुरुभगवंतो प्रति आदर एवं क्रुतज्ञता प्रकट कर आयोजको को धन्यवाद दिये!

ये तरंगे इतनी गहरी होना चाहिए की, उसकी कोई सीमा नही-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : आपलं अध्ययन इतकं खोल असलं पाहिजे की, त्याची कोणतीही सीमा नसावी. म्हणूनच उत्तर शोधतांना ती कुठे असतात आणि आम्ही शोधू लागतो दुसरीकडेच, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, आम्ही सुध्दा गलत असू शकतो. परंतू अनेक जण म्हणतात की, मै गलत नही हू और नही हो सकता! संतुलन ठेवा! एक- दुसरे की कमी ना देखे। अरे भाई क्यो गलत नही हो सकते! अगर दुसरो को सत्ता हवी असेल तर ती त्याला खुशाल द्यावी, असे मुळीच समजू नये की, ती आपल्याला का मिळाली नाही. उलट असा विचार करा की, त्याला जे...

पु. युवाचार्य श्री महेंन्द्रऋषिजी म. सा. का 59 वा जन्मोत्सव

पु. युवाचार्य श्री महेंन्द्रऋषिजी म. सा. का 59 वा जन्मोत्सव आध्यात्मिक रुप से आनंदमय उल्हासमय वातावरण मे संप्पन्न! पनवेलःआगमज्ञाता, युवाचार्य प्रवर, पुज्यनीय महेंन्द्रऋषिजी म.सा. का 59 वाँ जन्मोत्सव बड़े उत्साहवर्धक वातावरण में आध्यात्मिक रुप से देश के विभिन्न क्षेत्र से पधारे धर्मअनुरागीयों के उपस्थिती में संप्पन्न हुआ! युवाचार्य भगवंत पु हितेंन्द्र ऋषिजी, धवल ऋषिजी एवं महकऋषिजी संग चातुर्मासार्थ विराजमान है! आज गुरुभगवंत के 59 वे जन्मोत्सव पर भिलवाडा, खाचरोज, रतलाम, उदयपुर, चेन्नई बेंगलोर, और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रसे भक्तगण पधारे थे! श्रमण संघ की मजबूती बनी रहे यह एहलान युवाचार्य भगवंत ने किया ! संघ समाज गुरुभगवंत के लिए आचार संहिता की घोषणा की गयी जिसकी पालना हर श्रावक संघ ने करनी है! मानव कल्याण के लिए बड़ी धनराशि कलश के बोली के माध्यम से संकलीत हुई! आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्...

ज्योतिष विद्या के प्रकाण्ड पंडित थे पूज्य श्री कांतिमुनिजी म.सा.

मुनिश्री के देवलोकगमन पर टी.नगर स्थानक में हुई श्रद्धाजंलि सभा टी.नगर (चेन्नई): श्रमण संघीय दिवाकर सम्प्रदाय के दीर्घ संयमी 75 वर्ष के संत पूज्य श्री कांतिमुनिजी महाराज का दिनांक 02 अक्टूबर गुरूवार को गुरू गणेश गोशाला में संलेखना संथारा सहित देवलोकगमन हो गया। रविवार दिनाँक 5 अक्टूबर को टी.नगर स्थानक में सवेरे सामुहिक प्रार्थना के साथ गुणानुवाद सभा का आयोजन रखा गया।      संघ अध्यक्ष डॉ.उत्तमचन्द गोठी ने मुनिश्री के श्री एस एस जैन संघ माम्बलम-टी.नगर के तत्वावधान में वर्ष 2003 के तमिलनाडु-चेन्नई में प्रथम ऐतिहासिक चातुर्मास से लगा कर मुनिश्री के 54 वर्षीय संयम जीवन का विस्तार पूर्वक वर्णन सभा के सामने रखा एवं मुनिश्री के कई संस्मरण बताए। डॉ गोठी ने बताया कि मुनिश्री जैन आगम एवं ज्योतिष विद्या के प्रकाण्ड पंडित थे। पिछले 23 वर्षों से दक्षिण भारत मे ही विचरण कर जिनशासन व जैन धर्म की महती प्रभाव...

युग प्रवर्तक थे श्री अमर गुरुदेव – राज्यपाल गहलोत

बैंगलुरु (कर्नाटक): उत्तर भारत गौरव, उप-प्रवर्तक गुरुदेव श्री पंकज मुनि जी म. के परम सान्निध्य एवं दक्षिण सूर्य, ललित लेखक, ओजस्वी प्रवचनकार गुरुदेव डाॅ. वरुण मुनि जी म. की मंगलमयी प्रेरणा से आयोजित गुरु अमर संयम अमृत महामहोत्सव के भव्योत्सव का पंच दिवसीय चिर-स्मरणीय आयोजन 1 से 5 अक्तूबर 2025 तक श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित हुए। शासन‌ प्रभाविका श्री रिद्धि जी म सा (एम.ए.), धर्म प्रभाविका पू. विदूषी साध्वी श्री पावनरत्ना जी म. ने अपने उद्बोधनों में जहां गुरुदेवों की महानता को श्रमणसंघ में उच्चस्थ बताया वहीं उन्होंने डाॅ. वरुण मुनि जी म. को इस ऐतिहासिक, अनुशासित एवं सुन्दर आयोजन के लिए बधाई भी दी। मौन साधनाचार्य श्री बसंत मुनि जी म सा, शासन‌ प्रभावक श्री पुलकित मुनि जी महाराज सा, महासती श्री उपासना जी महाराज सा ने प्रवर्तक श्री अमर मुनि जी महाराज सा के व्यक...

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