सन 2012 से प्रति वर्ष परम पूज्य गुरुदेव श्री अमर मुनि जी की पावन प्रेरणा से आत्म शुक्ल शिव जन्म जयंती के पवित्र अवसर पर हर साल सितम्बर माह में विश्व शांति जप महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर हमें गुरुजनों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।
इस आयोजन में 9 महान मुनिराजों के अभिनंदन का अवसर मिल रहा है। उत्तर भारत गौरव परम पूजनीय श्री पंकज मुनि जी महाराज और श्री वरुण मुनि जी महाराज अमर शिष्य की प्रेरणा से बैंगलोर में शांति जप और महान मुनिराजों के अभिनंदन का आयोजन किया जा रहा है। जैन धर्म दीवाकर आचार्य सम्राट परम पूज्य श्री आत्मा राम जी ज्ञान ज्योति सम्पन्न महान पुरुष थे। डा. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने कहा कि महापुरुषों के गुणगान करने से हमारी आत्मा पवित्र और निर्मल होती है। गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास हेतु विराजमान डा. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि महापुरुषों और भगवान के गुणगान करने से आत्मा की शुद्धि होती है और उसमें शुभ भावों का संचार होता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आयोजन विशेष है। वरुण मुनि जी ने कहा कि महान संतों की संगति और उनके गुण हमारे जीवन का आधार बनते हैं। इन्हें अपनाकर हम भीतर की मैल, विकार और बुराइयों को त्याग सकते हैं और सच्चे जीवन मार्ग पर चल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ज्ञान को आत्मा का तीसरी नेत्र कहा जाता है। संसार के भौतिक पदार्थों और आध्यात्मिक तत्वों की प्रकृति को समझने के लिए ज्ञान सर्वोत्तम साधन है। भगवान महावीर ने भी कहा कि पहले ज्ञान प्राप्त करो और फिर करुणा से व्यवहार करो। ज्ञान मन का दर्पण है, यह सभी विकारों का नाश कर आत्मा को शुद्ध करता है। ज्ञान के बिना यह भी नहीं पहचाना जा सकता कि क्या अमृत है और क्या ज़हर। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है। ज्ञान ही मानव जीवन का सार है और यही जन्म–मरण के दुखों को मिटा सकता है। प्रारंभ में युवा मनीषी एवं मधुर वक्ता श्री रूपेश मुनि जी ने भजन प्रस्तुत किया। उपप्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज ने मंगल पाठ प्रदान किया।