श्री हीरा बाग जैन स्थानक में विराजित आयम्बिल आराधिका आगम श्री जी म सा के सानिध्य में आज पर्वाधीराज महापर्व का स्वागत करते हुए कहा जैन धर्म को आत्मा में बसना पर्युषण है। दुनिया में बसना प्रदूषण है। यह पर्व प्रदूषण से निवृत होने की प्रेरणा देने आया है। हमारे भीतर रह रहे कषाय, राग द्वेष, मोह आदि के सारे प्रदूषण को त्याग कर पर्व मनाना है। ये आठ दिन में आत्माओं को श्रृंगारित किया जाता है। मुखड़े का मेकअप नही, आत्मा का चेकअप करने का समय है। यह त्योहार खाने पीने के लिए नहीं बल्कि त्याग तपस्या से किया जाता है। इस पर्व की आराधना देवी देवता नंदीश्वर द्वीप में जाकर मानते हैं। मानव उत्सव प्रिय है। भारतीय संस्कृति में नित नए पर्व की आराधना करने के लिए आगे बढ़ता है। वार के दिन सात हे पर यह त्योहार आठ मनाए जाते हैं। जीवन को तमाशा नही तीर्थ बनाना है। एक यही पर्व है जो आनंद, उत्साह, खुशियां, तप त्याग से मन...
पुत्र व माता यांची सोबत तपस्या करणे हे प्रथम पाहते परम पूज्य अरुणप्रभाजी म.सा पर्वधीराज पर्वुशषण चा प्रथम दिवस चौसाळा येथिल पावन भुमीमध्ये परमपुज्य श्री दिलीपकंवरजी म.सा. यांच्या सुशिष्या स्वाध्याय प्रेमी परमपुज्य श्री कुसुमकंवरजी म.सा. आणी प्रवचन प्रभाविका परमपुज्य श्री अरूणप्रभाजी म.सा.आधी ठाणा 2 यांच्या सानिध्या मध्ये चौसाळ्याचे दि.01.09.2024 रोजी श्रीमती कमल जवाहरलालजी खिवंसरा 2 उपवास तर पुत्र रोशन जवाहरलालजी खिवंसरा 8 उपवास चालू असून त्यांचे पुढिल भाव आहेत चौसाळ्या साऱख्या छोटया गावामध्ये जैन समाजाचे कमी घरे असताना 24 वर्षानंतर चातुर्मासचा योग आला सध्या एकासना आंबील, वास, तेला, आठाई अशा बरयाच तपस्या चालू आहेत. तसेच जैन धर्मा मध्य पर्वुशषण पर्व. खुप महत्वपूर्ण आहे प्रवचन सुत्र वाचन तसेच धार्मिक कार्यक्रम चालू आहेतl चातुर्मास चे मार्गदर्शक सुभाषचंद बेदमुथा, कचरू शेठ लोढा आणी अशोक लोढा ...
वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे किया पर्व पर्युषण का आगमन साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा ने अंतगड सूत्र का मूल और अर्थ का विवेचन करते हुए कहा पर्युषण पर्व क्या हैl आत्मीयता में पारस्परिक वैमन्स्य, मतभेद, मनभेद दूर किए जाते हैं। जैन धर्म दर्शन का स्थान विशिष्ट है। यहां आत्मा की शुद्धि, विशुद्धि के लिए पर्युषण पर्व में आराधना की जाती है। इसमें 8 दिन श्रावक-श्राविकाएं सांसारिक और व्यापारिक कार्य को छोड़कर निवृत जीवन जीने की प्रैक्टिस करते हैंकड़वी बात का मीठा जवाब दो, गुस्से में चुप रहोजैन समाज आज से पयुर्षण पर्व मना रहा है। यह आत्मा की शुद्धि का पर्व है। यह 8 दिन तक चलेगा। इसमें धर्म आराधना, त्याग-तपस्या होती है और गलतियों की आलोचना की जाती है। इस पर्व के आखिरी दिन को संवत्सरी पर्व के रूप में मनाया जाता है। हर गलती की माफी मांगी जाती हैंl साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा यह पर्व महावीर स्...
मासखमण एवं अठाई तपस्वी का अभिनंदन Sagevaani.com /माड्या: आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी संयमलताजी ठाणा 4 के सान्निध्य में ‘महका तप उपवन- मासखमण से’ कार्यक्रम में सकल जैन समाज ने तपस्वियों की अनुमोदना की। साध्वी संयमलताजी ने कहा कि हरा आम डाल पर लटक रहा है उसे न सुगन्ध है, न रस फिर भी उसे तोड़ पलाश के पत्तों के बीच रखा जाता है, उसके ताप से कठोरता, कोमलता में एवं सुगन्ध व रस भी आ जाता है, आम मीठा व सरस हो जाता है। इसी प्रकार तप के तेज से जीवन सरस एवं तेजस्वी बनता है। आज ज्ञानशाला टीचर- उपासिका ललिताजी भंसाली ने मासखमण किया है। उसके साथ अर्हम आच्छा छोटे से बच्चे ने अपनी टीचर को गुरु दक्षिणा देते हुए 8 की तपस्या की। मानों गुरु को अनुपम उपहार भेंट किया है। मूर्तिपुजक साध्वीश्री संकल्पनिधिजी कार्यक्रम में पधारी यह प्रसन्नता का विषय है। हम सब मिलकर जिनशासन की खूब प्रभावना क...
Sagevaani.com /माधावरम्: युगयुधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व पर उसके महत्व को उजागर करते हुए और खाद्य संयम दिवस पर बताते हुए कहा साध्वी ने कहा कि पर्युषण पर्व नहीं, महापर्व है, आत्मशुद्धि का प्रेरक-उत्प्रेरक है। मनुष्य जितना प्रकृति के निकट रहता है, उतना ही पुलकित एवं प्रसन्न रहता है। पर्युषण विकृति से प्रकृति में जीना सिखाता है। विभावों से मुक्त हो स्वभाव में रमण करना इसका उद्देश्य है। पर्युषण सृजन का नया देवता है। साध्वीश्रीजी ने इस पर्व का पहला दिन खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाते हुए कहा कि पशु पेट भरने के लिए खाता है, मुर्ख स्वाद के लिए, होशियार आरोग्य और शक्ति के लिए एवं संत साधना के लिए खाते है। साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा कि तीर्थकर तो एक ही दिन यह पर्व मनाते थे, किन्तु आठ कर्म तोडने के लिए, अष्टमंगल हेतु, अहमभ...
विचारो का प्रदूषण ख़तरनाक हैl इस प्रदूषण को हटाने हमें पर्युषण मनाना है! पर्व का अर्थ है पवित्र दिन, पावन दिन – डॉ. राज श्री जी। दिलकी सफ़ाई, अंतरमन से क्षमा है पर्युषण पर्व- डॉ. मेघाश्री जी स्वयं को सुधारना, आत्मा को पावन करना यह सिख हमे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व से लेनी है- साध्वी जिनआज्ञा श्री जी आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे चातुर्मासार्थ विराजीत महासाध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा. आदि ठाणा 4 के निश्रा मे पर्वाधिराज पर्युषण पर्वका धर्मअनुरागीयों ने बडे उल्हास एवं उमंग के साथ सामुहिक प्रार्थना, अखंड 8 दिवसीय 24 घंटे का “नवकार महामंत्र” जाप, सुत्रवाचन, 48 मिनिट का सामुहिक सजोडे जाप, प्रवचन, तप आराधना आदि के माँध्यम से स्वागत किया! 108 सजोडे जाप संग, एक-एक कर अनेक महानुभावो ने एवं माता बहनो ने सामुहिक जाप में सहभाग लिया! सुबह छ बजे 24 घंटे के जाप का प्रारंभ डॉ. राजश्री ज...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣3️⃣ 🪔 मेघ की तरह दाता भी चार प्रकार के होते हैं.! ⬇️ १) कुछ बोलते है, देते नही.. *२) कुछ देते है, बोलते नही..✅* ३) कुछ बोलते भी है, देते भी है.. ४) कुछ न बोलते है, न देते है..! 🔴 सिर्फ अपनी प्रसंशा के लोभ से परोपकार की बड़ी बड़ी बातें करनेवाले तो बहोत है.. विरल ही होते है जो दान का मर्म समझते है.! 💐 निःस्वार्थ भाव से दान देकर परोपकार की प्रवृत्ति करनेवाले स्वप्रसंशा की अपेक्षा नहीं रखते वही सच्चे दाता हैं.! *श्री स्थानांगजी आगम सूत्र📚* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
जयगुरू अम्बेश-जय गुरु इंद्र-जय गुरु मगन-जय गुरु सौभाग्य-जय गुरु मदन के पठ्धर सुशिष्य मेवाड़ भास्कर उप प्रवर्तक युवामनीषी परम् पुज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी म.सा. करुणाकर नवदीक्षित श्री हर्षित मुनि जी मा.सा आदि ठाना -2 चातुर्मास मंगलवाड की पावन पुण्य धरा धाम पर पोषद शाला मंगलवाड चौराहा आज दिनांक 01 सितम्बर रविवार 2024 पर्युषण पर्व का प्रथम दिवस का प्रवचन चातुर्मास मंगलवाड चौराहे कई क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं ने आकर मेवाड़ भास्कर उपप्रवर्तक युवामनीषी परम् पूज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी मा.सा आदि ठाना 2 के दर्शन लाभ लिए व जिनवाणी स्मरण करने का शौभाग्य उठाया व धर्म ध्यान तप तपस्या करके अपने जैनत्व को दर्शाया व अन्य कई श्रावक ने दया के पख्यान लिए और पोषध के पचखान लिए और गुरुदेव के सांनिध्य मे रह कर पूर्ण दिवस धर्म मे लिन रहेl 🙏🙏
परम श्रद्धेय उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में महापर्व पर्यूषण के प्रथम दिन धर्म सभा का आयोजन जैन स्थानक गुड़ मंडी जालंधर में किया गया। सर्वप्रथम मंगलाचरण से सभा का शुभारंभ सेवाभावी श्री अभिनव मुनि जी महाराज ने किया। तदोपरांत ओजस्वी वक्ता श्री संयमेश मुनि जी महाराज ने अंतकृतदसांग सूत्र वाचनी का शुभारंभ किया। मधुर व्याख्यानी श्री पूजा जी महाराज ने भजन प्रस्तुत किया। उप प्रवर्तक श्री पीयूष मुनि जी महाराज ने राष्ट्र संत वरिष्ठ उपाध्याय वाचना आचार्य भगवन श्री मनोहर मुनि जी महाराज की 97 जन्म जयंती पर उनके जीवन पर प्रकाश डाला। मंच संचालन जैन सभा मंत्री मुस्कान जैन ने किया।कृष्ण चौदस के उपलक्ष्य में विशेष पाठ फ़रमाया। सभी को प्रसाद स्वरूप प्रभावना भी वितरित की गई।इस अवसर पर रमन जैन भोलू शाह परिव...
आमेट में 66 यूनिट रक्तदान श्री गुरु अम्बेश सौभाग्य युवा मंडल के तत्वाधान में मेवाड़ भास्कर उपप्रवर्तक मेवाड़ युवा शिरोमणि पूज्य गुरूदेव श्री कोमल मुनिजी म.सा. ‘करूणाकर’ के 44वें अवतरण दिवस के शुभ अवसर पर श्री गुरु अम्बेश सौभाग्य युवा मंडल आमेट द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गयाl गुरुमाता श्री जयमाला जी म.सा. “जीजी” साध्वी रत्ना श्री आनंद प्रभा जी म. सा. साध्वी श्री चंदन बालाजी म.सा. साध्वी रत्ना श्री डॉक्टर चंद्रप्रभा जी म.सा. साध्वी श्री विनीत रुपप्रज्ञा जी म.सा. साध्वी रत्ना श्री सुरभि जी म. सा. आदि ठाणा 6 के सानिध्य में श्रीमान स्वर्गीय सोहनलाल जी वह श्रीमती स्वर्गीय कंचन देवी जी सूर्या व सुपुत्र स्वर्गीय श्री सम्पत कुमार जी सूर्या की पुण्य स्मृति दिवस पर श्रीमान सुरेंद्र कुमार जी सुशील कुमार जी सूर्या परिवार आमेट के आर्थिक सौजन्य से अम्बेश नवयुवक मंडल आमेट क...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣2️⃣ 🪔 ⚡ अहंकार अज्ञानता का लक्षण है, क्योंकि ज्ञानी तो जानता है की पदार्थ परिवर्तनशील है फिर पदार्थ प्राप्ति पर क्या घमंड करना.? 🔴 स्वयं को ही गुणसंपन्न मानना अहंकारी का लक्षण है.! 🟥 जो वास्तविकता जानने में, समझने में, उसका स्वीकार करने में असमर्थ हो उसे मूर्ख कहते है अभिमानी भी ऐसे ही होते है.! ⚡ अभिमानी के गुण प्रगट नही होते क्योंकि खुद के अतिरिक्त अन्यों के गुणों पर उसकी दृष्टि नही पड़ती, कहीं पर गुण दिखते नही, गुणानुराग के अभाव में गुणप्राप्ति नही होती.! ⚡ अभिमानी न दिखना तो आसान है, लेकिन अभिमानी न बनना दुष्कर अति दुष्कर साधना है.! 🪔 अभिमानी अहंकार के नशे में दूसरों को तुच्छ गिनता है, जो सिद्धात्मा की आशातना है.! *श्री सूत्रकृतांगजी आगम📚* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्...
आत्मा के अंदर 18 पापो का प्रवेश न हो इसलिए प्रत्याख्यान का ताला आवश्यक है! आत्मा की सुरक्षा प्रत्याख्यान के माध्यम से करनी है – साध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा. गुण धारण करना याने प्रत्याख्यान! ईच्छाओं पर नियंत्रण याने प्रत्याख्यान! शांती त्यागके अंदर है , भोगके अंदर नही! आज बस बारस है! बस याने गाय का पुजन! पशुधन से मिलने वाला खाद शुध्द होता है! “जीवन चार दिन का मेला, हो जायेंगा खत्म झमेला! नसीब को सुधारना हमारे हाथ मे नही, लेकीन व्यवहार सुधारना हमारे हाथ में है! व्यवहार मे शालीनता, विनम्रता है वह आदमी जीत सकता हैl विनय एवं विनम्रता से आदमी महान बन सकता है ! अपने स्वयं के घरके प्रति आदर्श बनना चाहिए! अहंकार हटाओ विनम्रता लाओ! कडवावट हटाईये, जुबान मे मीठास लाईये! व्यवहारमें प्रणाम के भाव आना चाहिए! उदारता का व्यवहार होना चाहिए! यह उद् बोधन किया साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने! आज मॉं पद्मावती क...