*🌧️विंशत्यधिकं शतम्*
*📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️*
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मेघ की तरह
दाता भी
चार प्रकार के होते हैं.!
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१) कुछ बोलते है, देते नही..
*२) कुछ देते है, बोलते नही..✅*
३) कुछ बोलते भी है, देते भी है..
४) कुछ न बोलते है, न देते है..!
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सिर्फ अपनी
प्रसंशा के लोभ से
परोपकार की बड़ी बड़ी
बातें करनेवाले तो बहोत है..
विरल ही होते है
जो दान का मर्म समझते है.!
💐
निःस्वार्थ भाव से
दान देकर
परोपकार की
प्रवृत्ति करनेवाले
स्वप्रसंशा की अपेक्षा
नहीं रखते वही सच्चे दाता हैं.!
*श्री स्थानांगजी आगम सूत्र📚*
🌷
*तत्त्वचिंतन:*
*मार्गस्थ कृपानिधि*
*सूरि जयन्तसेन चरण रज*
मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.
*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ
@ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर