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जीवन में यदि हिंसा है तो  दुख आना ही आना हैं

*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣5️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-10💧* 221) जीवन में यदि हिंसा है तो दुख आना ही आना हैं.! 222) समस्त जीवसृष्टि के प्रति जिसके हृदय में करुणा है वही जैन है और वही अहिंसा पाल सकता हैं.! 223) जो अपने को शुद्ध धर्म से जोड़ेगा वही ईश्वर की प्राप्ति कर सकता हैं.! 224) जितने तीव्र भावो से पाप किया होगा, उतनी तीव्रता से उसका फल मिलेगा.! 225) अहिंसा की थियरी तो अनेक धर्मो में बताई है लेकिन जैन दर्शन जितना अहिंसा का सूक्ष्म स्वरूप एवं उसे जीवन में उतारने का मार्ग अन्यत्र नहीं मिलेगा.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

कोमल मुनि के अवतरण दिवस पर कुल 100 यूनिट रक्तदान हुआ भीलवाड़ा में

श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मं डल संयुक्त मेवाड़ के आह्वान पर भीलवाड़ा में दो दिवसीय रक्तदान शिविर का आयोजन किया गयाl प्रथम दिन मानव अधिकार संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष मनीष बंब के नेतृत्व में रक्तदान हुआ, जिसमें 45 यूनिट रक्त संग्रह किया गयl दूसरे दिन जैन युवा सेवा संस्थान की ओर से रक्तदान शिविर लगाया। इसमें 55 यूनिट रक्तदान हुआ। अध्यक्ष धर्मचंद बाफना, मंत्री पीयूष खमेसरा ने बताया कि सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक चले शिविर में कुल 55 यूनिट रक्तदान हुआ जिसमे महिलाओं के साथ साथ कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान किया। जैन युवा सेवा संस्थान के मार्गदर्शक भूपेंद्र पगारिया श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मंडल संयुक्त मेवाड़ के अध्यक्ष प्रमोद सिंघवी,संरक्षक अनिल खटोड़ ने विचार रखे। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी ज्ञानचंद सांखला, रिखभ भंडारी, मानसिंह डांगी, नवरत्न संचेती, राजेंद्र सुराना, हेमंत कोठारी, नवरत्न बंब, कैल...

कल्पसूत्र जैन धर्म का पवित्र ग्रंथ है। – डॉ वरुणमुनि

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने पर्युषण महापर्व के द्वितीय दिवस कहा कि यह संसार अनादिकाल से है और अनंतकाल तक रहेगा । जैन कालचक्र दो भाग में विभाजित है : उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल। अवसर्पिणी काल में समयावधि,हर वस्तु का मान,आयु,बल इत्यादि घटता है जबकि उत्सर्पिणी में समयावधि,हर वस्तु का मान और आयु, बल इत्यादि बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व मात्र जैनों का पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है। पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट पर्व है, क्योंकि इसमें आत्मा की उपासना की जाती है। संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है। अंतकृतदशांक सूत्र का वांचन आठ कर्मों को काटने के लिए आठ दिनों के लिए होता है। कल्पसूत्र जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण श...

आध्यात्मिक चेतना को जगाना स्वाध्याय है : साध्वी गवेषणाश्री

Sagevaani.com / माधावरम्: स्वाध्याय वह दर्पण है जिसमें अपना रूप देखा जा सकता है, जीवन को निखारा जा सकता है। परमात्मा की प्राप्ति के दो ही रास्ते है- ध्यान और स्वाध्याय। आध्यात्मिक चेतना को जगाना स्वाध्याय है। शिक्षा की अनेक विधाएं विकसित हुई है, किन्तु केवल पुस्तकीय ज्ञान डिग्रीयां दे सकता है स्वयं की पहचान नहीं- उपरोक्त विचार डॉ. साध्वीश्री गवेषणाश्रीजी ने आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल, माधावरम् चेन्नई के प्रांगण में पर्यूषण महापर्व की आराधना में साधनारत साधकों को सम्बोधित करते हुए कहें।  भगवान महावीर के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए साध्वीश्रीजी ने कहा- वर्धमान, ज्ञानपुत्र, सन्मान, महावीर कैसे बने! का विवेचन करते हुए भगवान के प्रथम सम्यक्त्व भव का विवेचन किया।  साध्वी श्री मेरुप्रभाजी ने कहा- स्वाध्याय का शाब्दिक अर्थ है- पढ़ना। सम्यग रूप से चिंतन करना, स्वाध्याय से ज्ञानावरण...

आत्म गुनो का करो अविष्कार

पर्युषन पर्व की आराधना करते हुए बताया यह पर्व संदेश देने आया है आत्म गुनो का करो अविष्कार विकारों का करो बहिष्कार जीवन को करो स्वीकार पापोका करो इनकार यह सब पाव दिखलाता हैl स्वयं में जीने का रास्ता सीखना है इस पर्व में फेश रीडिंग, ड्रेस रीडिंग हेयर रीडिंग करना नहीं है अब हमें सोल रीडिंग करना है पर आज हम कौन सा रीडिंग कर रहे हैंl ध्यान में रहे भाई हो तो ऐसा इसके बारे में बताते हुए कहां अच्छे रिश्ते और वादों की शर्तों की जरूरत नहीं होती उसके लिए दो बातों की खूबसूरत दो लोगों की जरूरत होती हैl एक जिस पर भरोसा कर सके, इसको समझ सके बस यह दो ही बातें चाहिए भाई भाई का एक सुंदर रिश्ता होता है पर इस रिश्ते में पेट्रोल डालने वाला तीसरा ही होता हैl वीकनेस संतोषी होता है लोगों को अच्छा हुआ अच्छा रहना किसी का आगे बढ़ाना सुहाता नहीं हैl आज हम देख रहे संसार की हालत में क्या है क्या परिस्थितियों बन गई है प...

दान वसिकरण मंत्र सभी प्राणियोंको मोहित कर लेता है ! – डॉ. राज श्री जी म.सा.

दान देनेसे पुण्य का ख़ज़ाना भर जाता है! दान वसिकरण मंत्र सभी प्राणियोंको मोहित कर लेता है ! – डॉ. राज श्री जी म.सा. आकुर्डी – निगडी- प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण मे विराजमान डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी जिनआज्ञा श्री जी ने आज पर्युषण पर्व के द्वितीय पुष्प मे “ दान पुण्य की खाण” इस विषयपर विविध कथा एवं द्रुष्टांत के माध्यमसे सुंदर उद् भोदन करके उपस्थित धर्मप्रेमियोंको दान देनेसे प्रेरित किया! रागसे। त्याग, त्याग से वितराग का मार्ग भगवंतोने बताया! पुण्य की माता दान है! हर एक ने यथाशक्ति दान देनेका प्रयास करना चाहिये! महासाध्वीयोने दान के 4 प्रकार बताते हुये विश्लेषण किया 1) गिली लकड़ी समान 2)पथ्थर कोयले समान 3) गाँठ- पुठ समान 4) कपूर समान ! आज दोपहर के सत्रमे “ धार्मिक तंबोला ( जैन हौजी) का आयोजन किया गया था! जिसमें 50 बहनोने एवं 21 भाईयोने सहभाग लिया ! 6 विजेत...

समस्त गुण समूह में विनय प्रधान गुण है

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣4️⃣ 🙏 समस्त गुण समूह में विनय प्रधान गुण है.! 🌳 बिना जल सिंचन से वृक्ष विकसित नही होता ⚡ विनय के अभाव में अन्य गुणों की प्राप्ति, विकास भी संभव नही हैं..! ⚡ विनय के बिना न आत्मा का विकास न शासन की सेवा हो सकती है.! 🌧️ विनय से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है..! 💐 विनय करने से गुणवान के गुणों का आगमन हमारे में होता हैं.! 🔴 शुद्ध आचार, निर्दोष गोचरी कठिन व्रतनियम भी विनय के बिना निष्फल है.! *श्रीद्वात्रिंसद् द्वात्रिंशिका* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

धर्म जीवन में सफलता का आधार, जैसा हमारा स्वभाव वैसा होगा प्रभाव- दर्शनप्रभाजी म.सा.

सफलता पाने के लिए दृष्टि नहीं दृष्टिकोण बदलना होगा- समीक्षाप्रभाजी म.सा. पर्युषण पर्व के दूसरे दिन साध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. के सानिध्य में सफलता के सूत्र विषय पर प्रवचन Sagevaani.com /सूरत,। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आराधना शुरू हो चुकी है। पूरे गोड़ादरा-लिम्बायत क्षेत्र में धर्म ध्यान व तप त्याग के मेले जैसा माहौल बन गया है। सभी श्रावक-श्राविकाएं अधिकाधिक धर्म साधना कर पर्युषण पर्व को सफल बनाए। जीवन में कोई सफलता तब तक सार्थक नहीं हो सकती जब तक धर्म के मार्ग पर चलकर प्राप्त नहीं हुई हो। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. ने श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आठ दिवसीय आराधना के दूसरे दिन सोमवार को सफलता के सूत्र विषय पर प्रवचन में व्यक्त ...

गुरुदेव का सपना धर्म अपना है

🙏*मिच्छामी दुक्कडम* 🙏 चल रहा चातुर्मास है, धर्म साधना करने का आस है,धर्म रहेगा आपके हमारै साथ हैं!! 👍🏻 *अब तो हमारै को जिनवाणी सुनना हैं, सुनकर एक दम मस्त होकर तैयार रहना होगा।। क्यो की आवागमन हमारे महापर्व पर्यूषण का होगा* ।।  *गुरुदेव का सपना धर्म अपना है* जब हमारे गुरु हमारे लिए पुरे जिवन संसार का त्याग कर सकते हैं हमारे लिए बड़े से बड़ा विहार करके ना गर्मी ना सर्दी ना काटे कभी कुछ नही देखते इसीलिए की वो हमे अपना समझते है वो हमारे लिए अपना आहार भी त्याग देते हैं तो क्या हम गुरु के लिए सिर्फ 8 दिन निकाल के उनके चरणों में अपने धर्म की भेट नही चढ़ा सकते 🙏🖊️ ऐसे सरल मना *मेवाड़ भास्कर उप प्रवर्तक युवामनिषी परम् पूज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी मासा* के लिए उनकी सेवा के लिए मुझे इतना सुकुन मिलता है जैसे धरती पर स्वर्ग लगता है हमेशा हस्ते रहना हर किसी के लिए समय निकालना हर किसी के दुःख को समझन...

पर्वाधिराज पर्युषण का दूसरा शुभ दिन

आज गुरुभगवंत ने दो घडी – 48 मिनट, का सामायिक वृत समझाते हुए बहुत गूढ बात बताई । सामायिक करने वाला, दो घडी के लिए समस्त पाप-क्रियाओं का परित्याग कर देता है । सामायिक मन को स्थिर रखने की अपूर्व क्रिया है । आत्मिक शांति प्राप्त करने का संकल्प है, परम पद प्राप्त करने का सरल और सुखद मार्ग है, अखंडानंद प्राप्त करने का गुप्त मंत्र है, दुःख समुद्र से तैरने का श्रेष्ठ जहाज है तथा अनेक कर्मों से मलिन हुई आत्मा को परमात्मा बनाने की सामर्थ्य से परिपूर्ण है ।    प्रतिदिन दो घडी के लिए अपने अंतस को संग्रहित कर दिव्य ज्योति पाने का लक्ष रखें । सिर्फ 48 मिनट ईश्वर भजन ओर अंतर्मन को आराधना में लीन कर अनंत उर्जा का संचार कर सकते हैं ।    सभी को सादर जय जिनेन्द्र ।

जीवन को तमाशा नहीं तीर्थ बनाना है: साध्वी आगम श्री जी

परम पूज्य धैर्योश्रीजी म सा अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। आत्मा में बसना पर्युषन है दुनीया मे बसना प्रदुषण है यह पर्व प्रदूषण से मुक्त होने के लिए संदेश देने आया है हमारे अंतर में रहे हुए कषायो को दूर करना है। इन 8 दिनों में पर्व की आराधना करके आत्मा को शुद्ध बनाना है मुखडे का मेकअप नहीं आत्मा का चेकअप करना हैl यह त्यौहार खा पिके के नहीं तो तप त्याग से मनाना हैl इस पर्व की आराधना देवी देवता नंदीश्वर दीप में मनाते हैं, मानव उत्सव प्रिय है 144 त्योहार होते हैंl उसमें से कुछ-कुछ त्यौहार मनाए जाते हैं वार के साथ दिवस होते हैं उत्सव नव मनाए जाते हैंl जीवन को तमाशा नहीं तीर्थ बनाना है। यही एक ऐसा पर्व है जो हमें आत्मा की ओर झांकने का प्रयत्न करवाता है पर बस अभी के लिए है कभी के लिए नहीं अभी के लिए हैl जो अपनी आत्म रक्षा करता है वही जीवन की रक्षा करता है महापुरुषों ने अपना जीवन धन्य बनाया हैl उन्हों...

किन पुद्गलों का और कितने आत्मप्रदेशों से ग्रहण ?

*क्रमांक — 470* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹किन पुद्गलों का और कितने आत्मप्रदेशों से ग्रहण ?* *👉 विशेषावश्यक भाष्य में भी उपरोक्त कथनानुसार जीव कर्म के योग्य कार्मणवर्गणा के एक क्षेत्रावगाही पुद्गलों को सब आत्मप्रदेशों से ग्रहण करता है। वह अपने आत्मप्रदेशों से अवगाहित क्षेत्र से भिन्न क्षेत्र में अवगाढ़ पुद्गलों को कभी ग्रहण नहीं कर सकता है। कर्मप्रकृति ग्रंथ में भी इस तथ्य का पिष्ट-पेषण करता हुआ प्रमाण – दृष्टिगोचर होता है। वहाँ पर भी इसी नियम का निरूपण उपलब्ध है।* *कुछ आचार्य आत्मा के आठ रुचक-प्रदेशों को सर्वथा अबद्ध मानते हैं। अर्थात वे आठ प्रदेश कार्मणवर्गणा के पुद्गलों द्वारा कभी आच्छादित होते ही नहीं हैं। वे सदैव उज्ज्वल रहते हैं। नन्दी सूत्र में यह लिखा है कि-* *अक्खरस्स अणंतभागो निच्चुग्घाडिओ, …* *इसका अर्थ हुआ कि प्रत्येक जीव का अक्षर का अनंतवाँ भाग नित्य अना...

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