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जीवन को तमाशा नहीं तीर्थ बनाना है: साध्वी आगम श्री जी

जीवन को तमाशा नहीं तीर्थ बनाना है: साध्वी आगम श्री जी

परम पूज्य धैर्योश्रीजी म सा अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। आत्मा में बसना पर्युषन है दुनीया मे बसना प्रदुषण है यह पर्व प्रदूषण से मुक्त होने के लिए संदेश देने आया है हमारे अंतर में रहे हुए कषायो को दूर करना है। इन 8 दिनों में पर्व की आराधना करके आत्मा को शुद्ध बनाना है मुखडे का मेकअप नहीं आत्मा का चेकअप करना हैl यह त्यौहार खा पिके के नहीं तो तप त्याग से मनाना हैl

इस पर्व की आराधना देवी देवता नंदीश्वर दीप में मनाते हैं, मानव उत्सव प्रिय है 144 त्योहार होते हैंl उसमें से कुछ-कुछ त्यौहार मनाए जाते हैं वार के साथ दिवस होते हैं उत्सव नव मनाए जाते हैंl जीवन को तमाशा नहीं तीर्थ बनाना है। यही एक ऐसा पर्व है जो हमें आत्मा की ओर झांकने का प्रयत्न करवाता है पर बस अभी के लिए है कभी के लिए नहीं अभी के लिए हैl जो अपनी आत्म रक्षा करता है वही जीवन की रक्षा करता है महापुरुषों ने अपना जीवन धन्य बनाया हैl उन्होंने एक इतिहास रच डाला है इसलिए उनका नाम आगम में अंकित हो गया हैl

रह कई रहबर कह ऐसे में मिलते हैं परमात्मा कहा धर्म यह कल्याणकारी है कलहकारी नहींl इस पर्व में हमें क्या करना है क्या नहीं करना इसके बारे में साध्वी आगम श्री जी ने छोटी-छोटी बातों के माध्यम से समझाया इन आठ दिनों में ज्यादा से ज्यादा धर्म रतन करके हमारी आत्मा को उन्नत बनाना हैl अंतगढ़ सूत्र में 90 आत्माओं का वर्णन है सभी आत्माएं मोक्ष मेंमे पहुंची इसका रोचक वर्णन किया गया संचालन अशोक की बाटियां जी ने कियाl भगवान महावीर स्वामी के प्रोजेक्ट का प्राईज वितरण किया गयाl

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