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आचार्य भगवन्त पूज्यश्री कजोडीमलजी म.सा का स्मृति दिवस तप त्याग दिवस के रुप में मनाया गया

आचार्य भगवन्त पूज्यश्री कजोडीमलजी म.सा का स्मृति दिवस तप त्याग दिवस के रुप में मनाया गया

साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में आचार्य भगवन्त पूज्यश्री कजोडीमलजी म.सा का स्मृति दिवस तप त्याग दिवस के रुप में मनाया गया |

चेन्नई : सोमवार 20 अप्रैल 2026 को आचार्य भगवन्त पूज्यश्री कजोडीमलजी म.सा का 147 वां स्मृति दिवस तप त्याग दिवस के रुप में स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में मनाया गया |

वरिष्ठ स्वाध्यायी बन्धुवर श्री महावीरचन्दजी बागमार ने आचार्य कजोडीमलजी म.सा के जीवन चरित्र पर प्रकाश करते हुए उनके सेवा गुण के उद्दरण स्वाध्यायीगण के समक्ष रखे | उन्होंने बताया कि आचार्यश्री अपने शिष्यों के संयम में सहायक उपकरणों की प्रतिलेखना करते थे,एक श्राविका के पूछने पर उन्होंने कहा कि शिष्य मुलतानमलजी म. सा का ज्ञान का क्षयोपशम हैं,ज्ञानार्जन में मैं सहयोगी बन रहा हूं | उनके शिष्य दैनिक सौ गाथाओं को याद कर लेते थे |

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के पूर्व कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने गुणगान करते हुए कहा कि किशनगढ़ में माता वदनाजी व पिता शम्बूमलजी सोनी के यहां जन्म लेने वाले बालक कजोडी जब आठ वर्ष की वय के थे उनके ऊपर से माता पिता का साया उठ गया था और बालक कजोडी अजमेर आ गये | रत्नवंश के तृतीय आचार्य पूज्यश्री हमीरमलजी म.सा ने मुनि कजोडीमलजी म. सा की योग्यता परख कर उन्हें रत्नवंश का चतुर्थ आचार्य बनाने का अभिप्राय संघ के समक्ष रख दिया था | उनकी दीक्षा व आचार्य पदोरहण कार्यक्रम अजमेर में हुआ व अक्षय तृतीया की तिथि पर देवलोकगमन भी राजस्थान के अजमेर में हुआ | 49 वर्षों के संयम पर्याय में उन्होंने 26 वर्षो तक आचार्य के रुप में जिनशासन की प्रभावना की व अनेक आत्माओं को दीक्षित किया,जिनमे विनयचंदजी म. सा कस्तूरचंद जी म.सा चन्दनमलजी म.सा शोभाचन्द जी म.सा बालचंदजी म.सा खीवराजजी म.सा जसराजजी म.सा मुलतानमलजी म.सा आदि अनेक चरित्र आत्माओं ने जिनशासन की प्रभावना की | उनके मुखारविन्द से दीक्षित सन्त कालान्तर में रत्नवंश के पंचम व छठे आचार्य के रुप में जिनशासन की प्रभावना की | आज की तिथि पर 97 वर्षों पूर्व आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हस्तीमलजी म.सा का 20 वर्ष की वय में रत्नवंश के सप्तम आचार्य के रुप में पदोहण हुआ |

स्वाध्यायी श्री इंदरचंदजी कर्णावट ने अक्षय तृतीया तिथि की महत्वता पर प्रकाश करते हुए कहा कि इस पावन तिथि पर प्रथम तीर्थंकर प्रभु ऋषभदेव के तेरह माह की तपस्या का पारणा राजकुमार श्रेयांसकुमार द्वारा कराया गया और यह तिथि एतिहासिक हो गयी |

दीपकजी व योगेशजी श्रीश्रीमाल रुपराजजी सेठिया लीलमचन्दजी बागमार वीरेन्द्रजी ओस्तवाल सहित श्रदालुओं की सामायिक परिवेश में प्रमोदजन्य उपस्थिति रही | बालक श्री हितेनजी कोठारी ने तीन मनोरथ चिन्तन व संकल्प कराया | तपस्या व सामूहिक प्रत्याख्यान के स्वाध्यायी श्री गौतमचन्दजी मुणोत ने गुरु वन्दन व सुखसाता पृच्छा पाठ किया |

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