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पर्यावरण के गुणों की जानकारी हासिल करने के लिए पार्क का भ्रमण

राजस्थान पत्रिका और एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वाधान में चलाए जा रहे हरित प्रदेश अभियान के तहत आज चिल्ड्रंस पार्क गिंडी मैं एसकेपीडी बॉयज हायर सेकेण्डरी स्कूल के 100 विद्यार्थियों ने पर्यावरण के गुणों की जानकारी हासिल करने के लिए पार्क का भ्रमण किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉक्टर के मुथू कुमार प्रोग्राम ऑफिसर डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज गवेनमेंट ऑफ तमिलनाडु ने पर्यावरण के विशेष गुणों की जानकारी विस्तार से दी एवं विद्यार्थियो को पौधे वितरण किए। इस मौके पर एक्ष्नोरा उतरी चेन्नई के सचिव फतेहराज जैन ने कहा कि पर्यावरण के बिना धरती मां का श्रंगार अधूरा है, हम कितने भी विकसित हो गये लेकिन मानसिक शांति आज भी प्रकृति की गोद में ही मिलती है, पर्यावरण का संतुलन रहना हमारे जीवन में अति आवश्यक है पर्यावरण का मिजाज लगातार बिगड़ रहा है, इसकी भरपाई किसी न किसी आपदा के रूप में हो रह...

सिद्धसाधक, सिद्धयोगी, सिद्धपुरुष थे जयाचार्य : साध्वी डॉ गवेषणाश्री

 ‘सिद्धपुरुष के सिद्धमंत्रों का’ हुआ महानुष्ठान  मासखमण एवं अठाई तपस्वी का हुआ तपोभिनन्दन Sagevaani.com /माधावरम्: श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ माधावरम् ट्रस्ट, चेन्नई के तत्वावधान में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में ‘सिद्धपुरुष के सिद्धमंत्रों का’ महानुष्ठान हुआ।  साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा, जैन धर्म में अनेक आचार्य सिद्धपुरुष के रूप में हुए है। उन्हीं में से तेरापंथ धर्मसंघ के एक सिद्धसाधक, सिद्धयोगी और सिद्धपुरुष आचार्य थे- आचार्य जीतमलजी। जो मंत्र विद्या के विशेषज्ञ, प्रयोग धर्मा, तेरापंथ इतिहास के पुरौधा, सबको साथ लेकर चलने वाले नीति विशारद के नेता, गंभीर निर्णायक और भविष्य के दिशा बोधक थे।  साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा- जयाचार्य ने अपने जीवन के साधनाकाल में अनेक मंत्रों की साधना एवं रचना की। आज ...

पवित्र आगम अंतगडसूत्र, कल्पसूत्र, 68 दिवस का महामंत्र का अनुष्ठान किया गया

हीरा बाग में विराजित प पू आगमश्रीजी म सा प पू धैर्याश्रीजी म सा के सानिध्य में पवित्र आगम अंतगडसूत्र, कल्पसूत्र, 68 दिवस का महामंत्र का अनुष्ठान किया गया। इस अवसर पर कलश रैली भी निकाली गई। आगम वाचना का लाभ छाजेड परिवार ने लिया। मंगल कलश का लाभ कोठारी परिवार ने लिया। इस मौके पर संघ के सभी पदाधिकारी उपस्थित थे। सात्विक धैर्योश्री जी ने प्रवचन देकर सब को संबोधित किया आगम श्री जी ने पुण्य के बारे में बताया। पुण्य कैसे कमाया जाता है अथवा कमाया पुण्य कैसे नष्ट होता है इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान सारे संघ में उत्साह का वातावरण छाया रहा। मंच का संचालन अशोक जी भटियाणी ने किया।

“सिद्धपुरुष के सिद्धमंत्रों का “महानुष्ठान हुआ

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्री जी के सान्निध्य में “सिद्धपुरुष के सिद्धमंत्रों का “महानुष्ठान हुआ। साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा, जैन धर्म में अनेक आचार्य सिद्धपुरुष के रूप में हुए है उन्हीं में से तेरापंथ के एक सिद्धसाधक, सिद्धयोगी और सिद्धपुरुष आचार्य थे- आचार्य जीतमलजी । जो मंत्र विद्या के विशेषज्ञ, प्रयोग धर्मा, तेरापंथ इतिहास के पुरौधा, सबको साथ लेकर चलने वाले नीति विशारद के नेता गंभीर निर्णायक और भविष्य के दिशा बोधक थे। साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा- जयाचार्य ने अपने जीवन के साधनाकाल में अनेक मंत्रों की साधना एवं रचना की। आज भी तेरापंथ धर्मसंध में उन मंत्रों का प्रभाव देखने को मिलता है। साध्वी श्री दक्षप्रभाजी के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुईं । साध्वी श्री मेरुप्रभाजी ने तपस्वी की अनुमोदना में सुमधुर गीतका प्रस्तुत की। ...

किन पुद्गलों का और कितने आत्मप्रदेशों से ग्रहण

*क्रमांक — 469* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹किन पुद्गलों का और कितने आत्मप्रदेशों से ग्रहण ?* *👉 भगवती सूत्र में लिखा है कि जीव उन्हीं पुद्गलों को ग्रहण करता है, जो उसके प्रदेशों में अवगाढ़ होते हैं। वह आकाश-प्रदेशों के अनन्तर और परम्पर प्रदेशों में अवगाढ़ कर्म-पुद्गलों को ग्रहण नहीं करता है। इसका अर्थ हुआ जीव जिस क्षेत्र में अवस्थित है, उससे संलग्न आकाश-प्रदेश में स्थित पुद्गल वर्गणा को ही ग्रहण करता है। यहाँ पर संलग्न का तात्पर्य मात्र एक आकाश-प्रदेश नहीं है। अपितु उसके पार्श्ववर्ती आकाश-प्रदेश भी एक-दूसरे से यदि संलग्न हैं, तो जीव उन पुद्गलों को ग्रहण करता है। लेकिन मध्यवर्ती आकाश-प्रदेश छोड़कर उससे आगे के आकाश- प्रदेशों पर स्थित पुद्गल वर्गणा को वह कभी ग्रहण नहीं कर सकता।* *भगवती सूत्र में वर्णित सव्वेणं सव्वं बंधइ सिद्धान्त से आत्मा के समस्त प्रदेशों के कर्मबंधन होता है। इसी...

जैन धर्म के उपवासों में किसी भी तरह का फल या फलारस भी निषेध होता है

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे विराजित साध्वी चन्दन बाला ने कहा कि जैन धर्म के उपवासों में किसी भी तरह का फल या फलारस भी निषेध होता है। विशेष परिस्थितियों में सिर्फ उबाल कर थारा हुआ या धोवन पानी सूर्योदय के बाद से सूर्यास्त पूर्व तक लिया जा सकता है। इस प्रकार का उपवास तिविहार उपवास कहलाता है। चौविहार उपवास में तो पानी का भी निषेध होता है। उपवास वाले दिन से पहले वाली रात्रि से ही भोजन का त्याग शुरू हो जाता है जो अगले दिन भर और रात भर जारी रहता है। अठई आठ दिनों के लिए रखा जाने वाला उपवास है। प्रोषधोपवास में पर्व के दिनों चारों प्रकार के आहार का त्याग कर करके धर्म ध्यान में दिन व्यतीत करना होता है। इसमें हिंसा त्याग शामिल है। एक बार भोजन प्रोषध और सर्वथा भोजन त्याग उपवास कहलाता है। इसे श्रावकों के चार शिक्षाव्रतों में से एक माना गया है। साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा कि जैन धर्म के अन...

जो मार्गानुसारी क्रिया का निषेध, अपलाप, त्याग करके मात्र ज्ञान का अहंकार करते हैं वह ज्ञान एवं क्रिया दोनों से भ्रष्ट नास्तिक है

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣0️⃣ 🛑 जो मार्गानुसारी क्रिया का निषेध, अपलाप, त्याग करके मात्र ज्ञान का अहंकार करते हैं वह ज्ञान एवं क्रिया दोनों से भ्रष्ट नास्तिक है..! 🪔 ज्ञान एवं क्रिया उभय का आलंबन करनेवाला, विनय बहुमान करनेवाला साधक भावविशुद्ध बनकर शीघ्र ही मोक्ष प्राप्ति करता हैं..! ✅ भूमिका अनुसार, ज्ञान सहित धर्मप्रवृत्ति ही सन्मार्ग को प्रशस्त करती हैं.! 💫 बिना क्रिया के सिर्फ शुष्कज्ञान से जो मोक्ष की खोखली बातें करते है वह अन्न ग्रहण किये बिना ही क्षुधा तृप्ति की चाहना रखते हैं.! ⚪ बिना ज्ञान के सिर्फ कायकष्ट रूप क्रिया में लगे है ऐसे लोग मार्ग के ज्ञान के अभाव में पथभ्रष्ट होकर संसार में दीर्घकाल तक भटकते है..! ⚡ जो व्यक्ति मार्ग जानता है वह भी बिना चले गंतव्य तक नहीं पहुंच सकता.. ⚪ मार्ग जाने बिना सिर्फ चलते रहने से भी मंजिल मिलना असंभव हैं.. 🌧️ सार यह है की ||...

रक्तदान शिविर

मेवाड उपप्रवर्तक गुरूदेव श्री कोमल मुनीजी म सा के 44 वे जन्मदिवस पर श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मंडल संयुक्त मेवाड़ के आह्वान पर सभी जगह विशाल रक्तदान शिविरो का आयोजन किया जा रहा है l इसी के तहत भीलवाड़ा में रक्तदान शिविर 2 दिन का आयोजन रखा गया है प्रथम दिन मानवाधिकार संघर्ष समिति के तहत स्वैच्छिक रक्तदान का आज आयोजन रखा गया है और 31 तारीख को गुरुदेव की जन्म जयंती के दिन जैन युवा सेवा संस्थान द्वारा विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन रखा गयाl दोनों शिविर अरिहंत चिकित्सालय शास्त्री नगर भीलवाड़ा में हो रहे हैl

अन्य का अंत देखकर खुद के अंत का चिंतन करे वही समझदार

*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣0️⃣ *💧पर्युषण तत्त्वधारा-5💧* 196) अन्य का अंत देखकर खुद के अंत का चिंतन करे वही समझदार हैं.! 197) हिंसा ही दुख है जो हम दूसरों को देते है वो हमे बदले में मिलता हैं.! 198) जब तक हिंसा के पाप का प्रायश्चित नही होता तब तक उसका गुणांक बढ़ता रहता है.! 199) दुकान गए मार्केट में किसी भी दुकान पर ग्राहक नही है, फिर भी हम दुकान बंध करके धंधा छोड़कर घर पर नही बैठते.. ग्राहक के आने की आश रखते है, व्यापार के लिए पुरुषार्थ करते है, तो भले अधिकांश दुनिया हिंसा में लिप्त हो फिर भी हमें अहिंसा की साधना करनी है क्योंकि यही सुख है..! 200) आज्ञानुसारी आराधना करने से हमारे अंतर में परमात्मा अवतरित होते हैं.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्...

दिग्विजय चौटाला ने सुना जैन साध्वियों का परवचन

मंडी डबवाली जैन स्थानक में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत उपप्रवर्तनी माहसाध्वी श्री वीरकांता जी, वीणा जी,अर्पिता व आर्या जी के प्रवचन सुनने के लिए आज जेजेपी के प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला जैन स्थानक पधारे। साध्वी अर्पिता ने आज आपसी नम्रता और भाईचारे पर संदेश दिया। और राजा का अच्छा आदेश और संत का अच्छा उपदेश हमेशा आमजन के लिए कल्याणकारी होता है। एक अच्छे नेता को। हमेशा अपनी प्रजा और अपने साथियों के सम्मान के साथ साथ अच्छे विचारों को देश दुनिया में फेलाना चाहिए। जानकारी देते हुए समाज के महामंत्री राजेश जैन काला ने बताया कि इसके बाद जैन समाज डबवाली की और से दिग्विजय चौटाला का अभिनंदन करते हुए प्रधान उन्हें स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया जिसमे प्रधान सुभाष जैन पप्पी, सरपरस्त इंद्र जैन, लाभ चंद जैन अभिनंदन जैन, संजय जैन, मुकेश जैन, शम्मी जैन व संघ के गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। इसके बाद दिग्विजय च...

तेरापंथ जैन विद्यालय साहुकारपेट का 33वॉ वार्षिक खेल दिवस

Sagevaani.com /चेन्नई : तेरापंथ जैन विद्यालय साहुकारपेट का 33वॉ वार्षिक खेल दिवस नेहरू स्टेडियम में मुख्य अतिथि श्रीमती प्रियंका देवानंद- राष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी द्वारा उद्घोषणा के साथ शुभारंभ हुआ।  मंगलाचरण के पश्चात प्रिंसिपल महोदया श्रीमती जेसिन्ता मर्सी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। स्कूल बैंड की सुंदर मार्च पास्ट की प्रस्तुति के पश्चात मुख्य अतिथि द्वारा राष्ट्रीय ध्वज एवं अध्यक्ष श्री गौतमचंद बोहरा द्वारा स्कूल ध्वज के झंडारोहण के साथ खेल प्रतियोगिताए प्रारंभ हुई। मुख्य अतिथि के कर कमलों से टार्च प्रज्वलित कर स्कूल खेल सचिव को हस्तांतरित की गयी। चारों ग्रुप के कप्तानों ने मैदान का चक्कर लगाते हुए अभिभावकों की उपस्थिति में प्रज्वलित मशाल को यथा स्थान स्थापित किया। विद्यार्थियों द्वारा अनेक खेल प्रतियोगिताएं बड़े ही रोमांचक ढंग से पूर्ण हुई। सभी विजेताओं को मुख्य अतिथि, पदाधिकारीय...

श्रीसंघ शिवमार्ग का सथवारा है…

*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 3️⃣9️⃣ *💧पर्युषण तत्त्वधारा-4💧* 191) श्रीसंघ शिवमार्ग का सथवारा है… उससे दूर होना अर्थात सन्मार्ग से दूर होना.! 192) संघ से हम है, हम से संघ नही है.! 193) प्रभु आज्ञा का साकार रूप है श्री संघ.! 194) श्री संघ के आधीन रहना ही संघपूजा कर्तव्य है.! 195) परमात्मा की आज्ञा अनुसार हो तो ही सुकृत तारक बनता हैं.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

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