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अन्य का अंत देखकर खुद के अंत का चिंतन करे वही समझदार

अन्य का अंत देखकर खुद के अंत का चिंतन करे वही समझदार

*☀️ प्रवचन वैभव☀️*

🌧️

4️⃣0️⃣

*💧पर्युषण तत्त्वधारा-5💧*

196)

अन्य का

अंत देखकर

खुद के अंत का

चिंतन करे

वही समझदार हैं.!

197)

हिंसा ही दुख है

जो हम दूसरों को देते है

वो हमे बदले में मिलता हैं.!

198)

जब तक

हिंसा के पाप का

प्रायश्चित नही होता

तब तक उसका

गुणांक बढ़ता रहता है.!

199)

दुकान गए

मार्केट में किसी भी

दुकान पर ग्राहक नही है,

फिर भी हम दुकान बंध करके

धंधा छोड़कर घर पर नही बैठते..

ग्राहक के आने की आश रखते है,

व्यापार के लिए पुरुषार्थ करते है,

तो भले अधिकांश दुनिया

हिंसा में लिप्त हो फिर भी हमें

अहिंसा की साधना करनी है

क्योंकि यही सुख है..!

200)

आज्ञानुसारी

आराधना करने से

हमारे अंतर में

परमात्मा अवतरित होते हैं.!

🌧️

*प्रवचन प्रवाहक:*

*युग प्रभावक वीर गुरुदेव*

*सूरि जयन्तसेन चरण रज*

मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*

श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ

@ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

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