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आत्मा की सुरक्षा प्रत्याख्यान के माध्यम से करनी है – साध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा.

आत्मा की सुरक्षा प्रत्याख्यान के माध्यम से करनी है – साध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा.

आत्मा के अंदर 18 पापो का प्रवेश न हो इसलिए प्रत्याख्यान का ताला आवश्यक है! आत्मा की सुरक्षा प्रत्याख्यान के माध्यम से करनी है – साध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा. गुण धारण करना याने प्रत्याख्यान! ईच्छाओं पर नियंत्रण याने प्रत्याख्यान! शांती त्यागके अंदर है , भोगके अंदर नही! आज बस बारस है! बस याने गाय का पुजन! पशुधन से मिलने वाला खाद शुध्द होता है!

“जीवन चार दिन का मेला, हो जायेंगा खत्म झमेला! नसीब को सुधारना हमारे हाथ मे नही, लेकीन व्यवहार सुधारना हमारे हाथ में है! व्यवहार मे शालीनता, विनम्रता है वह आदमी जीत सकता हैl विनय एवं विनम्रता से आदमी महान बन सकता है ! अपने स्वयं के घरके प्रति आदर्श बनना चाहिए!

अहंकार हटाओ विनम्रता लाओ! कडवावट हटाईये, जुबान मे मीठास लाईये! व्यवहारमें प्रणाम के भाव आना चाहिए! उदारता का व्यवहार होना चाहिए! यह उद् बोधन किया साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने! आज मॉं पद्मावती के एकासन के शुभअवसरपर 51 मॉं बहनोने लाभ लिया!

आज दर्शन एवं मंगल आशीष का लाभ लेने पहुँचे प्रसिध्द उद्योजक एवं समरथ गच्छ के संघटन मंत्री दिलीपजी चोरडीया, अम्रुत जी कटारिया, जैन पत्रिका जैन संदेश के संपादक सुभाषबाबु लुंकड! संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं विश्वस्त मंडल ने मान्यवरोंका स्वागत किया !

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