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तपमूर्ति, सेवामूर्ति थीं- माता मीराबाई जी लुणिया — भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि

तपमूर्ति, सेवामूर्ति थीं- माता मीराबाई जी लुणिया — भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि

गुणगान सभा होगी आज आयोजित 

“कुछ लोगों का कहना है कि नारी नरक का द्वार है, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि नारी से ही राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, हनुमान एवं गुरु नानक देव जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। नारी सृष्टि की आधारशिला है।”

ये प्रेरणादायी विचार भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज साहब ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने फरमाया कि सुश्राविका, तपसूर्या माता मीराबाई जी लुनिया वास्तव में एक तपमूर्ति एवं सेवामूर्ति थीं। वे गत 39 वर्षों से एकासन तप की आराधना कर रही थीं तथा 18 मई को उनका 492वाँ आयम्बिल तप गतिमान था। अचानक पैर फिसलने से उनके सिर में गंभीर चोट लग गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ब्रेन सर्जरी सफलतापूर्वक हुई, परंतु स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया।

तत्पश्चात माता जी की दृढ़ आध्यात्मिक भावना को देखते हुए श्रमण संघीय युवाचार्य भगवंत परम पूज्य श्री महेंद्र ऋषि जी महाराज साहब ने 20 मई प्रातः 8:10 बजे उन्हें संलेखना संथारा के पच्चखन प्रदान किए। जैन परंपरा में संलेखना-संथारा को साधना का कलश माना गया है।

तपसूर्या माता मीराबाई जी लुनिया ने अपने जीवन में अनेक प्रकार की तप आराधनाएँ कीं। लाखों-करोड़ों नवकार महामंत्र जाप, संत सेवा, गौ सेवा, गरीब एवं जरूरतमंदों की सहायता, शिक्षा, चिकित्सा तथा अन्नदान जैसे सेवा कार्यों में वे सदैव अग्रणी रहीं।

उल्लेखनीय है कि उनका जन्म 20 सितंबर 1950 को मीरजगाँव, तहसील कर्जत में हुआ। लालन-पालन एवं शिक्षा के पश्चात युवा अवस्था में उनका विवाह अकुर्डी निवासी सेठ श्री रमेशलाल जी लुनिया के साथ संपन्न हुआ। स्वर्गीय श्री रमेशलाल जी लुनिया भी श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष पद पर रहते हुए अनेक वर्षों तक अपनी सेवाएँ समर्पित करते रहे तथा अंतिम समय में उन्होंने भी संलेखना-संथारा ग्रहण किया था।

माता मीराबाई जी के जीवन में अनेक सद्गुण विद्यमान थे। वर्ष 2015 से 2026 तक उन्होंने राष्ट्रसंत श्रमण संघीय उप प्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज साहब के पावन श्रीचरणों में विविध तप आराधनाएँ कर गुरु भक्ति की अनुपम भेंट समर्पित की।

20 मई प्रातः 9:15 बजे उनका संथारा व्रत पूर्ण हुआ। उनके सुपुत्र डॉ. हेमराज जी, जयूष जी एवं सुपुत्री सोनाली जी विशेष रूप से लंदन एवं अमेरिका से भारत पहुँचे और माता जी की अंतिम आराधना अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से संपन्न करवाई। तत्पश्चात अकुर्डी-निगड़ी प्राधिकरण श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यगणों सहित समस्त श्रद्धालु भाई-बहनों ने सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र का जाप किया।

सायंकाल लगभग 4:00 बजे गुरु कृपा निवास, संभाजीनगर से उनकी पालकी यात्रा प्रारंभ हुई, जिसमें सैकड़ों-हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। जयकारों के मध्य नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई यह शोभायात्रा निगड़ी, पुणे स्थित श्मशान घाट पहुँची, जहाँ पूज्य गुरु भगवंतों के श्रीमुख से मंगल पाठ प्रदान किया गया।

भाई तरुण जी मोदी ने प्रभु भक्ति एवं गुरु भक्ति के भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किए। वातावरण श्रद्धा एवं भावुकता से ओतप्रोत था। सभी श्रद्धालुओं की आँखें नम थीं तथा “मीराबाई अमर रहें”, “तपस्वी अमर रहें” के जयघोष गूँज रहे थे।

चंदन की शुद्ध लकड़ियों, देसी घी, सूखे नारियल एवं कपूर जैसे मांगलिक द्रव्यों से उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। विशेष उल्लेखनीय है कि उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार नेत्रदान एवं देहदान भी करवाया गया।

मुनिरत्न कर्मयोगी श्री रुपेश मुनि जी महाराज ने फरमाया कि सुश्राविका माता मीराबाई जी लुनिया की पावन स्मृति में जैन स्थानक, अकुर्डी-निगड़ी प्राधिकरण के पावन प्रांगण में 22 मई को दोपहर 3:00 बजे से 5:00 बजे तक सामूहिक नवकार महामंत्र अखंड जाप, प्रभु भक्ति, गुरु भक्ति एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा।

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