को चेन्नई में साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट पर स्थित स्वाध्याय भवन’ में एक कदम धर्म की और प्रवचन माला के अन्तर्गत गुरु से होता जीवन शुरु पर वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म. सा भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म. सा की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी भाग्यप्रभाजी म.सा के चिन्तन रुपी कृति प्रभु के पत्र के अंशों का वांचन किया | स्वाध्यायी बन्धुवर ने विवेचन करते हुए कहा कि प्रभु राम के पास गुरु वशिष्ठ थे,इसीलिए राम पूजनीय बन गए तो दूसरी ओर रावण के पास संसार का वैभव तो था,पर सदगुरु का सानिध्य नहीं था,इसीलिए उनका जीवन व्यर्थ गया | सदगुरु के पास जाते समय अभिमान को पूर्णतया तज देना चाहिए | प्रभु हमसे कहते हैं,कि तू गुरु में मुझे देखना, गुरु की आज्ञाओं को मेरी आज्ञा समझना और गुरु की सेवा ही मेरी सेवा होगी | शिष्य के लिए योग्यता पाने के त्रिसूत्र हैं,पूर्ण समर्पण,आज्ञा आराधन और सच्ची भक्ति | प्रभु कहते हैं कि भूल से भी गुरु की आशातना मत कर देना |
उपस्थित स्वाध्यायीगण ने श्रवण किये सूत्रों को अपने शब्दों में उच्चरित किया व जिज्ञासाओं का समाधान हुआ |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु की ओर से आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्यायी बन्धुवरों को साधुवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि आज इस गुरु अष्ठमी तिथि के प्रसंग पर स्वाध्यायी बन्धुवरों द्वारा गुरु हीरा चालीसा की सामूहिक स्तुति की गयी |
श्रावक संघ तमिलनाडु के उपाध्यक्ष व स्वाध्यायी श्री गौतमचन्दजी मुणोत,इंदरचंद जी कर्णावट,रुपराजजी सेठिया,पदमचन्दजी दीपकजी योगेशजी श्रीश्रीमाल, वीरपिता-वीरपति बाबू धनपतराजजी सुराणा, हितेनजी कोठारी महावीरचन्द जी बागमार,लीलमचन्दजी बागमार,महावीरचन्दजी कर्णावट उच्छबराजजी गांग आदि सामायिक परिवेश में उपस्थित थे |
योगेशजी श्रीश्रीमाल ने चिन्तन सूत्र दीपकजी श्रीश्रीमाल ने तीन मनोरथ चिन्तन सूत्र व महावीरचन्दजी बागमार ने प्रत्याख्यान कराये | रुपराजजी सेठिया ने मंगल पाठ किया | गुरु सुखसाता पाठ गौतमचन्दजी मुणोत ने करवाया | तीर्थंकरों,गुरु भगवन्तों की जयजयकार सहित प्रवचन माला कार्यक्रम संपन्न हुआ |
प्रेषक : स्वाध्याय भवन’ 24/25 – बेसिन वाटर स्ट्रीट साहूकारपेट चेन्नई तमिलनाडु