चेन्नई के स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में “बनें आगम स्वाध्याय से जैन सिद्धान्तों के ज्ञाता” पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा
रविवार दिनांक 24 मई 2026 को चेन्नई साहूकारपेट के बेसिन वाटर स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने जिनवाणी के मई अंक में प्रकाशित “बनें आगम स्वाध्याय से जैन सिद्धान्तों के ज्ञाता” पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा करते हुए कहा कि आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म. सा के आज्ञानुवर्ती मधुर व्याख्यानी श्री गौतममुनिजी म.सा ने प्रवचन में फरमाया हैं कि आगम साक्षात् तीर्थंकर की देशना है,जो कि हमारे आत्म गुणों के विकास में सहायक व सहयोगी है | आगम प्रामाणिक व सत्य है | जिनशासन में अनेक श्रावक व श्राविकाएं हुई हैं,जिन्होंने आगम का गहन अध्ययन किया व आगमों के गहरे ज्ञाता भी बने,जिन्हें तीर्थंकरों ने भी विशेष उपमाओं से उपमित किया है | श्रावक जैन सिद्धान्तों के गहरे जानकार बने व संतो के संयम और ज्ञानवृद्धि में सहायक बने | सीखा हुआ ज्ञान कभी भी व्यर्थ नही जाता | ज्ञान इहभविक भी होता हैं और परभविक भी होता है | हम अपना श्रम और समय जैनसिद्धांत की जानकारी के अर्जन में दे,जिससे हमारा भविष्य उज्ज्वल व मंगलमय बने | स्वाध्यायीगणों की जिज्ञासाओं का समाधान हुआ |
युवा स्वाध्यायी योगेशजी श्रीश्रीमाल ने जीवन संकल्प सूत्र व प्रत्याख्यान कराये,युवा मोहितजी छाजेड़ ने तीन मनोरथ चिन्तन सूत्र किया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के उपाध्यक्ष श्री गौतमचन्दजी मुणोत ने गुरु सुखसाता पाठ से पृच्छा की | आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने मंगल पाठ सुनाया |
धर्मसभा में महावीरचन्दजी छाजेड़,वीरपिता -वीरपति बाबू धनपतराजजी सुराणा, गौतमचन्दजी मुणोत, योगेशजी श्रीश्रीमाल,आर नरेन्द्रजी कांकरिया, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग सहित अनेक स्वाध्यायीगण की सामायिक परिवेश में प्रमोदजन्य उपस्थिति रही |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ से आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्याय सेवा प्रदान करने हेतु स्वाध्यायी बन्धुवर व स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में उपस्थित स्वाध्यायीगण को साधुवाद ज्ञापित किया |
तीर्थंकरों, महापुरुषों, आचार्यों व गुरु भगवन्तो, चरित्र आत्माओं की जयजयकार संग स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा कार्यक्रम सुसंपन्न हुआ |