चेन्नई के स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में पारिवारिक जीवन में आवश्यक हैं संवादशीलता और सहिष्णुता पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा
चेन्नई साहूकारपेट के बेसिन वाटर स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत वरिष्ठ स्वाध्यायी महावीरचन्दजी बागमार ने संघ की मुख्य पत्रिका जिनवाणी के अप्रैल 2026 के अंक में प्रकाशित आचार्यश्री हीराचंद्रजी म.सा के सुशिष्य श्रदेय श्री विनम्र मुनिजी म. सा के प्रवचन ” पारिवारिक जीवन में आवश्यक हैं संवादशीलता और सहिष्णुता ” पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा करते हुए कहा कि श्रदेय श्री विनम्रमुनिजी म.सा ने प्रवचन में फरमाया हैं कि आसक्ति क्या-क्या पाप नहीं कर देती हैं |
जिस तरह राजा के हित की नहीं राज्य के हित की सोचते हैं,वैसे ही महाराज के भक्त बन कर नहीं रहना हैं,संघ के भक्त बनना हैं | गुरुदेव फरमाते हैं,जघन्य धन हैं पैसा,माध्यम धन हैं पुण्य और उत्कृष्ठ धन हैं धर्म |म. सा ने तेतलीपुत्र, पोट्टीला के प्रसंग पर विस्तृत प्रकाश करते हुए प्रेरणा लेने की बात कही हैं |
वर्तमान में परिवारों में संवाद कम हो गया हैं |दो पीढ़ियों के बीच में विवाद बढ़ गया हैं | आज आग्रह बढ़ रहा हैं,अपनत्व घट रहा हैं | हाथ में मोबाइल हैं,पास बैठ कर भी आपसी संवाद नहीं हो रहा हैं |जब संवाद कम होता हैं तो गलतफहमियां बढ़ती ही हैंl आज सहिष्णुता को बढ़ाने की आवश्यकता हैं |स्वाध्यायी बन्धुवर ने अनेक आगमों व सूत्रों की गाथाओं का उल्लेख करते हुए स्वाध्याय-अनुप्रेक्षा की |
रविवारीय नैतिक व धार्मिक विंग्स टू फ्लाई शिविर के शिविरार्थी बालक हितेनजी कोठारी ने जीवन संकल्प सूत्र,युवा स्वाध्यायी योगेशजी श्रीश्रीमाल ने तीन मनोरथ चिन्तन व प्रत्याख्यान कराये | श्रावक संघ तमिलनाडु के उपाध्यक्ष स्वाध्यायी बन्धुवर श्री गौतमचन्दजी मुणोत ने गुरु सुखसाता पाठ से पृच्छा की | श्री इंदरचंदजी कर्णावट ने मंगल पाठ किया |
धर्मसभा में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के उपाध्यक्ष गौतमचन्दजी मुणोत,नवरतनमलजी चोरडिया,महावीरचन्दजी कर्णावट,इंदरचंदजी कर्णावट, वीरेन्द्रजी ओस्तवाल, योगेशजी श्रीश्रीमाल, हितेनजी कोठारी,आर नरेन्द्रजी कांकरिया, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग सहित स्वाध्यायीगण की सामायिक परिवेश में प्रमोदजन्य उपस्थिति रही |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ से आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्याय सेवा प्रदान करने हेतु स्वाध्यायी बन्धुवर व स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में पधारने हेतु उपस्थित स्वाध्यायीगण को साधुवाद ज्ञापित किया |
तीर्थंकरों,आचार्य भगवन्तो, उपाध्याय प्रवर,भावी आचार्यश्री, साध्वीप्रमुखा चरित्र आत्माओं की जयजयकार करते हुए स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम सुसंपन्न हुआ |