Author: saadhak

आत्मा का स्वभाव है

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा ने कहा क्षमा आत्मा का स्वभाव है, किंतु हम हमेशा क्रोध को स्वभाव मान कर उसकी अनिवार्यता पर बल देते आए हैं। क्रोध को यदि स्वभाव कहेंगे तो वह आवश्यक हो जाएगा, इसीलिए जैन आगमों में क्रोध को विभाव कहा गया है, स्वभाव नहीं। ‘क्षमा’ शब्द ‘क्षम’ से बना है, जिससे ‘क्षमता’ भी बनता है। क्षमता का मतलब होता ...

क्षमा जीवन है

दान, शील, तप, भावना, धर्म के आधार पर खड़ी इमारत पर क्षमा का कलश लगाना है! प्रतिक्रमण आत्मा का स्नान है ! डॉ. राज श्री जी। क्रोध म्रुत्यु समान है, क्षमा जीवन है! अनंतकाल से चढे हुये कर्मो के मैल को साफ़ करने का क्षमा पर्व है! डॉ. मेघाश्री जी। दान और धर्म परभवके साथी है – क्षमा के तीन गुण क्षमा राखो, क्षमा मॉंगो, क्षमा आपे -साध्वी जिनाज्ञा श्री जी। आज आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के ...

संबोधन संबंध की नीव हैं

*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣9️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-14💧* 241) संबोधन संबंध की नीव हैं… बनाना,बिगाड़ना सब भाषा का खेल है.! 242) घर के सेवको के साथ तुच्छ व्यवहार करना नही वह आपकी फर्ज निभा रहे है अतः वह भी कुटुंब के सदस्य हैं.! 243) परमात्मा को अंतर में अवतरित करने मन को शल्यरहित बनाना होगा.! 244) आत्म बोध+ संत समागम का संयोग मिलना दुर्लभ है मिल गया तो न्याल हो जायेंगे.! 245) अयोग्य व्यक्ति की ...

पर्युषन पर्व 8 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ संपन्न होंगे

डबवाली (लहू की लौ) इन दिनों जैन समाज का पर्युषण पर्व चल रहा है जिसके तहत वीरवार को 7वें दिन जैन स्थानक में भगवान महावीर जन्म कल्याणक दिवस श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। युवती मंडल ने बहुत ही सुंदर नाटिका पेश की जिसमे नम्रता जैन प्रिया जैन आस्था जैन संजना जैन व वैराग्न खुशी जैन ने भूमिका अदा की। इस दौरान चल रही तपस्या की अनुमोदना की गई। अठहाई तप करने वालो की आज मेंहदी थी …अठहई करने वालों ...

गर्भ से ही संस्कार शुरु होते है

मानव जीवन दुर्लभ है पाना, इसे यो व्यर्थ ना गमाना! दुध दही मख्खन घी अपना ( सफेद) रंग नही बदलता, वैसे ही संघ समाजने अपना रंग नही बदलना चाहिए! गर्भ से ही संस्कार शुरु होते है ! साध्वी जिनाज्ञा श्री जी! जीवन मोबाईल जैसा बन गया है, उसे जिवो और जिने दो मे परिवर्तित करो! डॉ. मेघाश्री जी। जीवन हमारा संस्कारोंसे परिपूर्ण होना चाहिएँ! कॉमप्युटर, लॅपटॉप, मोबाईल चलाना आसान है किंतु व्यक्ति घरका संचालन नहीं कर...

पर्व पर्युषण के उपलक्ष्य मे श्री आत्मानंद जैन सभा रायकोट द्वारा शोभा निकाली

Sagevaani.com /रायकोट (भल्ला): पर्व पर्युषण के उपलक्ष्य मे श्री आत्मानंद जैन सभा द्वारा श्री सुमतिनाथ जैन मंदिर से सभा के सरपरस्त ऐवंत कुमार जैन और अध्यक्ष अमित जैन( मीतू) के नेतृत्व मे आज स्वपन उतारे गए और शोभा यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर श्री जैन स्थानक मे चतुर्मास हेतु विराजमान जिन शासन पारस मणि श्री समता जी महाराज, प्रवचन पारस मणि श्री सुयशा जी महाराज और वीर शिरोमणि श्री प्रगति जी महाराज विशे...

आत्मा की शुद्धि का पर्व है पर्युषण: धर्मवीर जैन

Sagevaani.com /रायकोट(भल्ला) एस एस जैन सभा रायकोट के प्रमुख मार्ग दर्शक धर्मवीर जैन ने कहा कि आत्मा की शुद्धि का पर्व है पर्युषण। सम्पूर्ण जैन जगत मे यह आठ दिन का पर्व विशेष महत्व रखता है।यह पर्व हमे प्रेरणा देता है कि अपनी आत्मा मे रह रहे विकारो को दुर कर आत्म शुद्धि करे। उन्होंने कहा कि जगह-जगह साधु साध्वीया की कृपा से इन दिनो धर्म की प्रभावण विशेष रूप से होती है। यह पर्व हमे संदेशा देता है कि ह...

कृषि करो या ऋषि बनो

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा कल्प सूत्र के द्वारा बताया भगवान आदिनाथ ने सामाजिक व्यवस्था के संचालन के लिए नगर, गांव, मकान आदि बनाने और उन्हें बसाने का उपदेश दिया था। इसी के साथ उन्होंने वर्ण व्यवस्था का उपदेश भी दिया। उन्होंने वर्ण व्यवस्था की स्थापना प्रजा के कार्य के अनुसार की थी। जो लोग विपत्ति के समय मनुष्यों की रक्षा करने के नियुक्त किए गए थे, वे क्षत्र...

चौसाळा नगरीत भव्य तपहोत्सव

पर्वधीराज पर्वुशषण दिनी चौसाळा येथील पावन भूमी मध्ये परमपूज्य श्री दिलीपकवरजी म.सा. यांच्या सुशिष्या स्वाध्याय प्रेमी परमपूज्य श्री कुसुमकॅंवरजी म.सा. आणि प्रवचन प्रभाविका परमपूज्य श्री अरुणप्रभाजी म.सा. आधी ठाणा 2 यांच्या सानिध्या, श्रीमती कमलबाई जवाहरलालजी खिवंसरा 9 उपवास श्रीमती जंयकंवरबाई मिठुलाल बेदमुथा 8उपवास, सौ. सुवरणा कांतिलाल खिवंसरा 9 उपवास, पचखावणी 08/09/2024 रोजी चौसाळा येथे होणार आहे...

साध्वी श्री धैर्यप्रभाजी की गुणानुवाद सभा

Sagevaani.com /माधावरम्: साध्वी श्री धैर्यप्रभाजी के देहावसान पर गुणानुवाद स्मृति सभा को संबोधित करते हुए डॉ. साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा कि साध्वीश्री धैर्यप्रभाजी सहज, सरल साध्वी थी। आपका बचपन चैन्नई के महानगर छल्लाणी परिकर में बीता और यौवनता की दहलीज पर कदम रखते ही बोहरा परिवार की पुत्रवधू बन गयी। संसार में रहते हुए भी आप कमल की तरह निर्लिप्त रही। इसी का परिणाम आप संसार का विराट वैभव छोड़कर पूरे...

जिसका उद्देश्य प्रशस्त हो ऐसा सत्य वचन ही बोलना चाहिए

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣8️⃣ *🕉️सत्य ही परमेश्वर है.!🕉️* 🌼 सत्य ही 🤍 जीवन का सार है, महासमुद्र से भी अधिक गंभीर है.!🌊 चंद्र से भी अधिक शीतल,🌙 सूर्य से भी अधिक तेजस्वी है☀️ 🌷 जो प्रिय हो, जो उचित हो, जो हितकारी हो, जो मर्यादायुक्त हो.. जो अकार्य प्रेरक न हो जिसका उद्देश्य प्रशस्त हो.. ऐसा सत्य वचन ही बोलना चाहिए.! ❌ जिसका उद्देश्य मलिन हो, जो संयम का घातक हो, कलह को बढ़ानेवाल...

जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप

*क्रमांक — 475* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप* *7. कर्म का बंध कार्मण शरीर से — समयसार में सूक्ष्म दृष्टि से वर्णन करते हुए कहते हैं कि पहले बंधे हुए सभी कर्म, पृथ्वी के पिण्ड समान पुद्गल पिण्डवत् हैं और आत्मा कर्म और कर्मोदयज भाव से भिन्न है।* *पुढवी पिंडसमाणा पुव्वणिबद्धा दु पच्चया तस्स ।* *कम्मसरीरेण दु ते बद्धा सव्वेपि णाणिस्स ।।* *यहाँ...

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