युग पुरुष थे – श्री पदम गुरुदेव – डॉ. वरुण मुनि
इंदौर। मनुष्य जीवन को क्रोध, बोझ या प्रसन्नता—तीनों भावों से जिया जा सकता है, लेकिन इसकी वास्तविक सार्थकता आनंद और अहोभाव के साथ जीने में है। उक्त प्रेरणादायी विचार भारत गौरव पूज्य डॉ. वरुण मुनि जी महाराज साहब ने इमली बाजार स्थित महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग जीवन को क्रोध, द्वेष और क्लेश में व्यतीत करते हैं, जबकि संत मार्ग हमें आनंदपूर्वक और कृतज्ञता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर राष्ट्र संत उपप्रवर्तक पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज साहब आदि ठाणा का इंदौर में मंगल प्रवेश भी हुआ।
पूज्य गुरुदेव ने राष्ट्र संत भंडारी श्री पदमचंद्र जी महाराज साहब को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन त्याग, सेवा और आनंद का अनुपम उदाहरण रहा, जो आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
उल्लेखनीय है कि 1 मई से 3 मई तक महावीर भवन, इंदौर में पूज्य गुरुदेव की 26वीं पुण्य स्मृति में त्रिदिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर के अनेक आचार्य एवं संत-साध्वीगण अपने प्रवचनों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
कार्यक्रम के अंतर्गत 1 मई को सामायिक एवं गुणगान सभा, 2 मई को अन्नप्रसादम एवं 3 मई को नवकार महामंत्र अखंड जाप का आयोजन किया जाएगा।
समाज के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।