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आकुर्डी स्थानक भवन मे तपस्वीरत्ना पु. कंचनकवरजी म. सा. आदि ठाणा आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे सुखसाता पुर्वक विराजमान

आकुर्डी स्थानक भवन मे तपस्वीरत्ना पु. कंचनकवरजी म. सा. आदि ठाणा आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे सुखसाता पुर्वक विराजमान

ह्रदय की पवित्रता अपने मन मंदीर मे बनाये रखो- महासाध्वी देशना श्री जी म. सा. आकुर्डी स्थानक भवन मे तपस्वीरत्ना पु. कंचनकवरजी म. सा. आदि ठाणा आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे सुखसाता पुर्वक विराजमान है! आज प्रवचन दरम्यान महासाध्वी प्रवचनकार पु. देशना श्री जीने अपने उदबोधन मे जैन, श्रावक- श्राविका इनके बारा व्रतोकी विस्तार से जानकारी देते हुये

अपनी ह्रदय की पवित्रता बनाये रखने का एहलान करते हुये मन के पवित्र मंदीर मे बसे रहने का एहलान किया ! किसी के संग कटुता न हो, अबोल ना रहे , द्वेष के भाव ना रहे यह समकित जीवन का मार्ग बताया! प्रवचन या सत्संग को सही समय पहुँच जीवन मे आध्यात्म का आनंद लेकर उसमें से सदगुणों को अपने जीवन मे उतारने का एहलान किया!

इस सभा मे श्री संघ के पुर्वाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी ने महासाध्वायों का स्वागत कर कुछ समय तक यहॉं रुककर जिनवाणी सुनाने की बिनती रखी और भविष्य मे एक चातुर्मास प्रदान करने की बिनती रखी! धर्मअनुरागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे ! संघाध्यक्ष एवं विंश्वस्त मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे!

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