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हमारे विचार अग्निशिखा ज्यों ऊध्वमुखी हो : मुनि सुधाकरकुमार

हमारे विचार अग्निशिखा ज्यों ऊध्वमुखी हो : मुनि सुधाकरकुमार

पुरुषवाक्कम, चेन्नई : अग्नि को किधर से ही जलाओं, उसकी शिखा ऊपर की और रहेगी। पानी निम्नमुखी होता है। वह नीचे की ओर बहता है। हमारे विचार और संकल्प अग्नि शिखा ज्यों ऊर्ध्व मुखी होने चाहिये। पानी की तरह निम्न मुखी नहीं, विचार और संकल्प ही हमारे भाग्य विधाता है। उनके आधार पर हमारे भविष्य की रेखाओं का निर्माण होता है। उपरोक्त विचार मुथा हाउस, पुरुषवाक्कम में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए मुनि सुधाकरकुमार ने कहें।

 मुनि श्री ने आगे कहा कि शास्त्रों में कहा है- विचार ही उत्थान-पतन तथा बन्धन – मुक्ति के मुख्य हेतु है। जीवन में परिस्थितियों के रंग बदलते रहते है। पर हमारा मिजाज शान्त और स्थिर होना चाहिये । कुछ लोगों का मिजाज क्षण-क्षण में बदलता रहता है। वे एक क्षण में राजी और नाराज होते रहते है। ऐसे लोगों के कारण परिवार और समाज में बहुत समस्याएं उत्पन्न होती है। मुनिश्री ने आगे कहा मनुष्य अपने विचारों और संकल्पों से भिखारी और सम्राट होता है। हमें सम्राट का जीवन जीना चाहिये, भिखारी का नहीं। जिन आदर्शों के लिए जीवन का समर्पण किया है। उनके प्रति गहरी श्रद्धा होनी चाहिये।

  इससे पूर्व मुनिवृंद नार्थ टाउन से विहार कर प्रकाशचन्द मुकेशकुमार मुथा के निवास स्थान पर पधारे। रास्ते में स्थानकवासी समाज की प्रबुद्ध साध्वीश्री सुधाकंवर से आध्यात्मिक मिलन हुआ।

            स्वरुप चन्द दाँती

          प्रचार प्रसार प्रभारी

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई

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