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चारित्र में शिथिलता आ जाए तो सम्यक्त्व खत्म नही होता: तप चक्रेश्वरी अरुण प्रभा जी मसा

चारित्र में शिथिलता आ जाए तो सम्यक्त्व खत्म नही होता: तप चक्रेश्वरी अरुण प्रभा जी मसा

शतावधानी पूज्याश्री गुरु कीर्तिजी ने मेरे महावीर को जानो विषय को आगे बढाते हुए फरमाया की मरिची मुनि एक बार गोचरी के लिए गए, गोचरी नही मिली पानी नही मिला, भूख और प्यास के कारण सारा ध्यान आत्मा से हटकर शरीर पर आ गया। वो विचार करने लगा न तो मुझसे भूख सहन होती है न प्यास सहन होती है, मैंने अपनी इच्छा से संयम धारण किया अब न तो में अपने महलों में वापस जा सकता हूँ और न ही इस कठोर संयम का पालन कर सकता हूँ। मरिची इसके लिये बीच का रास्ता निकालता है, वो भगवान से इसके लिए एक बार भी नही पूछता है। नयसार के भव ने इस आत्मा ने जो गलती की थी कि कलाप्रमुख से नही पूछा था इस मरिची के भव में उसने पुनः गलती दोहराई और भगवान से पूछे बिना उसने बीच का रास्ता निकाल लिया। उसने अपने नियम बना लिए की जब जब भूख लगेगी तब जमीकंद खाऊँगा, जब भी प्यास लगेगी तब नदि तालाब कुँवे का पानी पी लूँगा, कंकर पत्थर पैर में न लगे इसके लिए खड़ाऊ पहनूंगा, केश लोच में दर्द होता है इसलिये जटा धारण करूँगा, धूप लगती है इसलिये सर पर छत्र धारण करूँगा, सफेद वस्त्र की जगह गेरुए वस्त्र धारण करूँगा और इस प्रकार मरिची ने इस प्रकार का रूप धारण कर लिया। चारित्र में शिथिलता आ जाए तो सम्यक्त्व खत्म नही होता, भगवान की वाणी पर श्रद्धा कम हो जाए तो सम्यक्त्व नष्ट हो जाता है। श्रद्धा करने वाला तीर जाता है, शंका करने वाला डूब जाता है। मरिची के चारित्र में भले ही शिथिलता आ गई थी, लेकिन भगवान के प्रति उसकी अगाध श्रद्धा थी।

लोग मरिची से पूछते आपने ये बदलाव क्यों किया, तो वो बड़ी सरलता से कहता, मेरा मन कमजोर हो गया इसलिये छोड़ दिया लेकिन सच्चा धर्म आदिनाथ के पास ही है वँहा जाओ। जो अपनी भूल को स्वीकार कर लेता है वो एक न एक दिन सुधर सकता है, अन्यथा भूल शूल बन जाती है। जँहा जँहा आदिनाथ जाते है वँहा वँहा मरिची जाता है, लोग मरीची के पास शिष्य बनने आते तो मरिची कहता मेरे नही आदिनाथ के शिष्य बनों । जो हल्का बन गया वो ऊपर उठ गया जो भारी हो गया वो नीचे बैठ गया । भगवान आदिनाथ विचरण करते हुए पुनः अयोध्या पधारे। समवसरण लगा। सभी समवसरण में उपस्थित हुए लेकिन मरिची समवसरण के बाहर रहता है। अपने नियम बनाने के बाद मरिची आत्म ग्लानि की वजह भगवान से नजरें नही मिलाता था, उनके समीप नही जाता था । अयोध्या नगरी में क्या घटनाक्रम होता है मरिची कि जीवन में आगे क्या खुशखबर आती है, ये सब अगले प्रवचन में सुनने पर पता चलेगा।

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