पल्लावरम, चेन्नई 31.05.2022 : तेरापंथ सभा भवन पल्लावरम् में समायोजित “परिवार प्रशिक्षण कार्यशाला” को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ मंगलप्रज्ञा ने कहा परिवार समाज की एक इकाई है। परिवार तब अच्छा होता है, जब परिवार में जीने वाला हर सदस्य अच्छा हो। आनंद का जीवन सभी जीना चाहते हैं, पर वह मंगलमय जीवन कैसे जिया जाए? इस पर चिंतन आवश्यक है। परिवार में रहने वाले बुजुर्गों के सद् अनुभवों से प्रत्येक सदस्य अपने को भावित करें और छोटी-छोटी बातों में उलझना छोड़े, तो शांति का साम्राज्य स्थापित हो सकता है। आदरभाव, अनाग्रह, चेतना, व्यवहार, कुशलता, वचन की मिठास, प्रमोदभाव, सकारात्मक सोच आदि ऐसे बहुमूल्य सूत्र है, जिनको जीवन का आधार मानकर चलने वाला व्यक्ति परिवार में वास्तविक सुख की अनुभूति कर सकता है।
साध्वीश्रीजी ने प्रासंगिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा परिवार आदर से चलते हैं आग्रह से नहीं। परिवार में रहने वाला हर सदस्य एक दूसरे को समझने की कोशिश करें। जीवन में आने वाली उतार-चढ़ाव की तरंगों में संतुलन रखना आवश्यक है। कैलेंडर की तरह व्यवहार की कड़वाहट को बदलने का संकल्प आनंद प्रदान करता है। हर वक्त यह चिंतन चलें कि हम अपने जीवन में खुशियां कैसे बढ़ा सकते हैं।
कार्यशाला का प्रारंभ मुमुक्षु कोमल भंसाली के मंगलाचरण से हुआ। साध्वी डॉ शौर्यप्रभा ने कहा परिवार की आन, बान और शान बनाए रखना आप सभी का परम दायित्व है। तेरापंथ महासभा के आंचलिक प्रभारी ज्ञानचंद आंचलिया ने कहा साध्वी मंगलप्रज्ञाजी एक प्रबुद्ध विचारक साध्वी है। जिनकी प्रेरणा श्रम और चिंतन से चेन्नई का जन जन लाभान्वित हो रहा है। साध्वी शौर्यप्रभा, साध्वी चैतन्यप्रभा एवं श्री साध्वी सुदर्शनप्रभा ने “सुखद शुभंकर बसेरा है” परिवार गीतिका का सहसंघान किया। कन्या मंडल ने सुंदर मनमोहक लघु नाटिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन साध्वी चैतन्यप्रभा ने किया। आभार ज्ञापन सभा मंत्री दिलीप भंसाली ने किया।
प्रचार प्रसार प्रभारी
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई



