नागदा जं. निप्र- धर्मसभा में महासति दिव्यज्योतिजी म.सा. ने कहा कि विभिन्न जीवा योनियों के परिभ्रमण के पश्चात् अपने अच्छे कर्मो के फल से मानव शरीर एवं उच्च कुल परिवार प्राप्त होता है, आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है। जब आत्मा रूपी जीवन शरीर में प्रवेश करती है तब से बचपन प्रारम्भ होता है, जो जवानी से होकर बुढ़ापे की ओर जाकर माटी का शरीर माटी में मिल जाता है। सम्पूर्ण जीवनकाल में जितने भी सुखसुविधा, एश्वर्य, आराम, हर जगह सम्मान, सत्कार, इज्जत एवं आनंद का वातावरण मिलना आपके किये शुभ कार्यो का फल होता है। इसके विपरीत हमारे इस जन्म के अशुभ कर्म एवं पूर्व जन्मो के अशुभ कर्मो को हमें अवश्य भोगना पड़ता है जो आपको शारीरिक एवं मानसिक रूप से असहनीय दर्द, पीड़ा, दुःख, तिरस्कार के रूप में मिलता है। ये सब भोगकर मनुष्य विकट समय पर कहता है भगवान मुझे किस कर्मो की सजा दे रहा है। गुरूदेव ने कहा कि धर्म का फल मिले अथवा नहीं मिले परन्तु कर्मो का फल तो अवश्य भोगना पड़ता है, चाहे वह करोड़पति हो या रोड़पति।
मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड एवं नीतिन बुडावनवाला ने बताया कि आज तीन उपवास रेखा रवि कांठेड के है अतिथि सत्कार वर्धमानजी मुकेशजी शुभमजी धोका एवं 5 वर्ष से महावीर भोजनशाला में पानी की व्यवस्था के लाभार्थी श्री मोडुलालजी की प्रेरणा से श्री आशीषजी पोखरना द्वारा की जा रही है। संचालन श्रेणीक बम ने किया एवं आभार प्रकाशचन्द्रजी जैन लुणावत एवं सतीश जेन सांवेरवाला ने माना। धर्मसभा में प्रशान्त नाहर, प्रेमचन्द्र बोहरा, मनोज चपलोत, रजनेश भटेवरा, अजय मुरडिया, नरेश औरा एवं पूर्व अपर कलेक्टर श्री प्रकाशचन्द्रजी बोथरा उपस्थित थे।
दिनांक 19/08/2022 मीडिया प्रभारी
महेन्द्र कांठेड
नितिन बुडावनवाला