आज पर्वाधिराज पर्युषण के छठे दिन सभी जन अति उत्साह-उमंग से प्रवचन सभा में उपस्थित हुए। आज के विषय थे, “फूल और कांटे” एवं “प्याले में उबाल” । पूज्यनीय महासति प्रियंकाश्रीजी महाराज साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन को जीना हमारे हाथ में है । चाहे हम उसे फूलों की सुगंध से भरदें या कांटो का जाल पैदाकर खुद भी कष्ट झेलें ओर दूसरों को भी परेशानी में डालें । कभी कभी हम फूलों के ...
*क्रमांक — 474* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप* *5. 5. अन्योन्य-अनुप्रवेश — पूज्यपाद के अनुसार आत्मा के प्रदेश और कर्म पुद्गल स्कन्धों का परस्पर अनुप्रवेश हो जाता है।* *6. नैसर्गिक सम्बन्ध — योगसार में अमितगति लिखते हैं कि न कर्म जीव के गुणों का घात करता है और न जीव कर्म के गुणों का घात करता है।* *न कर्म हन्ति जीवस्य न जीवः कर्मणो गुणा...
आज पर्वाधिराज पर्युषण का पंचम दिवस बडे उत्साह ओर उमंग से मनाया गया । गुरुभगवंतों का आज का विषय था “कर्म का सिद्धांत” ओर “महामंत्र नवकार का महात्म्य” । पूज्यनीय महासति प्रियंकाश्रीजी महाराज साहब ने कर्म बंध की विवेचना की । संसार में सुख-दुख, हानी लाभ, जीवन मरण, दरिद्रता संपन्नता, रुग्णता स्वास्थ्य, बुद्धिमत्ता अबुद्धिमत्ता, आदि आदि वैभिन्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं । इन स...