Author: saadhak

मॉं वात्सल्य का सागर है – डॉ. राज श्री जी म. सा.

मॉं का ह्रदय ममता का मंदीर होता है, मॉं वात्सल्य का सागर है – डॉ. राज श्री जी म. सा. अवगुण छोडो गुणरी करना बात, माता पिताने जाणो थे, उनकी सेवा है प्रभुका सन्मान! -साध्वी जिनाज्ञा श्री जी आज पर्युषण पर्व का छटा पुष्प गुंफा गया! प्रवचन का विषय था “सॉंस बहुके रिश्ते कैसे मधुर बने”! डॉ. राज श्री जी ने कहा मॉं जन्म देती है, सॉंस जीवन जिना सिखाती है! तीन बातोका ज़िक्र किया सॉंस ने कुछ बातोके लिए क...

अज्ञान, ऐसी रात जिसमें न चाँद हैं त तारे

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे पर्व पर्यूषण के छठे दिन परम पूज्य गुरुदेव श्रीपन्ना लाल जी महाराज का 134 वा जन्मदिवस मनाया साध्वी डॉक्टर चंद्रप्रभा ने कहा परम श्रद्धेय, महामहिम, संत शिरोमणि, स्व० पूज्य प्रवर्तक गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महाराज साहब ‘प्राज्ञ’ भी एक ऐसे ज्योति:पुंज महापुरुष थे, जिन्होंने आत्म-विकास के साथ-साथ अनेकानेक भव्यात्माओं को भी सम्यस्ज्ञान का प्रकाश उप...

हमारे कर्म सभी को सुख पहुंचाने वाले हों

आज पर्वाधिराज पर्युषण के छठे दिन सभी जन अति उत्साह-उमंग से प्रवचन सभा में उपस्थित हुए। आज के विषय थे, “फूल और कांटे” एवं “प्याले में उबाल” । पूज्यनीय महासति प्रियंकाश्रीजी महाराज साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन को जीना हमारे हाथ में है । चाहे हम उसे फूलों की सुगंध से भरदें या कांटो का जाल पैदाकर खुद भी कष्ट झेलें ओर दूसरों को भी परेशानी में डालें । कभी कभी हम फूलों के ...

कर्म बंधन से मुक्त होने में सहयोगी जप: साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com /माधावरम्: जप की महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या डॉ साध्वीश्री गवेषणाश्री जी ने कहा कि सभी धर्मों में मंत्र जप की परम्परा रही है। प्रत्येक अक्षर मंत्र है। पुनरावर्तन से सामर्थ्य प्रकट होता है। मंत्र और साधक दोनों में तादाम्य जुड़े तो वह फलवान बनता है। जप क्यों करे, कैसे करे, कब करें? यह भी जानना आवश्यक है। जप के पीछे प्रायः 3 उद्देश्य है, देवाराधन, विघ्न न...

बुरी आदतों का त्याग करो

भाव विशुध्दिका पर्व मनाते हुए साध्वी आगमश्रीजी म सा ने बताया आज का युवक कहां भटक गया हैl जो डूबते हैं गिलासों में वह कभी नहीं उभरते जिंदगानी मेंl हजारों के संसार बदल गए इन बंद बोतलों के पानी में आप आप गुटखा पूरी तंबाकू सिगरेट इनका सेवन करते हो तो यह बात क्या उपयोगी है नहीं है आप उच्च कोटि के होl आपको जैन धर्म में मिला है संतों का समागम मिला है क्यों खाते हो सड़ा हुआ माल सड़ी हुई सुपारीया और कहते ह...

मद एवं मान के कटुफल तीर्थंकर को भी भुगतने पड़े हैं

*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣8️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-13💧* 236) जो प्राप्त हुआ है उसके अहंकार को *मद..* जो हम नही है या जो हमारे पास नहीं है फिर भी अहंकार करना उसको मान कहते है.! 237) मद एवं मान के कटुफल तीर्थंकर को भी भुगतने पड़े हैं ये भूलना मत.. 238) नयसार के कल्याण का कारण संत समागम और मरीचि के पतन का कारण था लोभ और मद 239) देह की शिथिलता के कारण जो दोष लगे वह क्षम्य है मन की शिथिलता के कारण जो द...

जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप

*क्रमांक — 474* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप* *5. 5. अन्योन्य-अनुप्रवेश — पूज्यपाद के अनुसार आत्मा के प्रदेश और कर्म पुद्गल स्कन्धों का परस्पर अनुप्रवेश हो जाता है।* *6. नैसर्गिक सम्बन्ध — योगसार में अमितगति लिखते हैं कि न कर्म जीव के गुणों का घात करता है और न जीव कर्म के गुणों का घात करता है।* *न कर्म हन्ति जीवस्य न जीवः कर्मणो गुणा...

अति आहार लेना शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य हेतु घातक है

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣7️⃣ 🪔 पेट के ६ भाग करें.. 👉3 भाग आहार लें 👉🏿2 भाग पानी के लिए 👉🏻1 भाग वायु संचार के लिए.. ⚡ इस शास्त्रोक्त विधान का उल्लंघन करके अति आहार लेना शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य हेतु घातक है.! 🛑 इस मर्यादा से अतिरिक्त आहार लेने से वायुसंचार हेतु जरूरी मार्ग अवरूद्ध हो जाता है जिसके कारण वायु प्रकोप से हार्ट एटेक आदि अनेक घातक रोग होते है.! ⚡ देह स्वस्थ नही होग...

एकांत, मौन, एवं ध्यान इन तीन सुत्रे को भगवान महावीर ने अपनाया

एकांत, मौन, एवं ध्यान इन तीन सुत्रे को भगवान महावीर ने अपनाया! उनके जीवन में प्रेम, क्षमा वात्सल्य का झरणा प्रवाहित था! – साध्वी डॉ. राजश्री जी महाराज द्वारा उद् भोदन! Competition (स्पर्धा), Comparison ( तुलना), Connection ( जुड़ना ) भगवान महावीर स्वामी के विचारोसे हो- डॉ. मेघना श्री जी महाराज नारी पतिके लिए चारित्र्य, संतान के लिए ममता, समाज के लिए सेवा, विश्व के लिए दया एवं जिवमात्रा के लि...

कर्म से ही मनुष्य सुख-दुख पाता है ।

आज पर्वाधिराज पर्युषण का पंचम दिवस बडे उत्साह ओर उमंग से मनाया गया । गुरुभगवंतों का आज का विषय था “कर्म का सिद्धांत” ओर “महामंत्र नवकार का महात्म्य” । पूज्यनीय महासति प्रियंकाश्रीजी महाराज साहब ने कर्म बंध की विवेचना की । संसार में सुख-दुख, हानी लाभ, जीवन मरण, दरिद्रता संपन्नता, रुग्णता स्वास्थ्य, बुद्धिमत्ता अबुद्धिमत्ता, आदि आदि वैभिन्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं । इन स...

समय के साथ बदले पर सभ्यता व मर्यादा को कभी नहीं भूले- दर्शनप्रभाजी म.सा.

आधुनिक बनने की होड़ में आध्यात्मिक दृष्टि से पिछड़ते जा रहे- समीक्षाप्रभाजी म.सा. पर्युषण पर्व के पांचवे दिन आधुनिक नहीं आध्यात्मिक बने विषय पर प्रवचन Sagevaani.com /सूरत,। तपस्या करना सहज नहीं है, तप करने के लिए तन को तपाना पड़ता है। जो तन को तपाते है वहीं तपस्वी बन पाते है। जो तपस्या नहीं कर सकते वह भी तपस्वियों की अनुमोदना कर पुण्य प्राप्त कर सकते है। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. क...

भाव रहित त्याग कल्याणकारी नही बन सकता

*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣7️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-12💧* 231) हम अपने भावो के मालिक है पदार्थो पर कोई अधिकार नहीं अतः भाव रहित त्याग कल्याणकारी नही बन सकता.! 232) संयोग से संयोग हुआ, वियोग से संयोग छूट जावेगा, इससे अधिक कोई संबंध नहीं आत्म के अतिरिक्त पदार्थो से..! 233) सबसे मुश्किल समकित प्राप्ति हैं.! 234) समकित अतिमुल्यवान है उसे पाने के लिए नम्र सरल संतोषी विनय विवेकशील बनना ही पड़ेगा.! 235) दो...

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