Author: saadhak

कल्पसूत्र में भगवान महावीर के विस्तृत जीवन का वर्णन है

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे पर्व पर्युषण के पांचवें दिन साध्वी चन्दन बाला ने कल्पसूत्र के माध्यम से कहा कि कल्पसूत्र में भगवान महावीर के विस्तृत जीवन का वर्णन हैl यह कल्पसूत्र साक्षात्‌‍ कल्पवृक्ष समान हैl इस सूत्र में अनानुपूर्वी से कथन होने से सर्वप्रथम महावीर प्रभु का चरित्र बीज समान हैंl पाशर्वनाथ का चरित्र अंकुर समान है, नेमिनाथ का चरित्र स्कंध समान है, ऋषभदेव का चरित्र डाली क...

अणुव्रत से होता अनियंत्रित इच्छाओं पर नियंत्रण : साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com माधावरम्: पर्यूषण महापर्व के पाँचवें दिन तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल, माधावरम्, चेन्नई में आराधनारत साधकों को ‘अणुव्रत दिवस’ के रूप में समायोजित विषय पर सम्बोधित करते हुए साध्वी डॉ गवेषणाश्री ने कहा कि आदमी के मन में अबूझ प्यास है- धन की, पदार्थ की, सुविधा की इतनी गहरी है कि जल्दी से बुझ नहीं पाती, ईच्छाओं का अंत होता ही नहीं। अनियंत्रित ईच्छाओं की पूर्ति का परिणाम होता है- ...

कृष्ण महाराज ने धर्म दलाली कैसे की

धैर्योश्री जी म सा नहीं अंतगड सूत्र की वाचना की कृष्ण महाराज ने धर्म दलाली कैसे की इसका वर्णन कियाl जो भी दीक्षा लेगा उसके परिवार का भरण पोषण का भार में उठाऊंगा ऐसे कृष्ण महाराज ने कहा बड़ा ही सुंदर वर्णन किया गयाl कृष्ण महाराज की पटरानी ने कैसी दीक्षा ग्रहण की उसका वर्णन कियाl साध्वी आगम श्री जी महाराज अपने दान के बारे में बताया देवे सो देवता रखे सो राक्षस पहले लोगों के हाथ बड़े लंबे थे पर आज छोट...

विनय ही धर्म का मुल है

प्रणाम मे अनुशासन। वात्सल्य, विनय की भावना होती है! प्रणाम करने से परिणाम अच्छे होते है! विनय ही धर्म का मुल है! “ ज्यों नमे ते सबसे हमें! ज्यों जगाये निष्टा उसकी बढ़ती है प्रतिष्ठा !साध्वी जिनाज्ञा श्री जी। शील की चुंदड सदाचार का महासागर है ! शाश्वत सुखोको प्राप्त करानेवाली है! शास्वत सुखोको प्राप्त करनेके लिए मनुष्य चारित्रवान होना चाहिए! – डॉ. राज श्री जी म.सा. आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श...

वाणी संयम करने से होता शक्ति का सवर्धन: साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com /माधावरम्: भाग्य से मनुष्य के पास 3 शक्तियां है- मन, वचन और काय। इनका उपयोग कैसे करें, क्यों करें, यह विवेक पर निर्भर है। कम बोलने, मधुर-मीठा बोलने, वाणी संयम करने से शक्ति का सवर्धन होता है। ज्यादा बोलने वाला लघुता को प्राप्त करता है। इसीलिए पायल स्त्रियों के पैरों में पहना जाता है और हार गले में। मधुर स्वरों के कारण शत्रु भी अर्थात् विभीषण भी राम का बन गया और कटु वचन के कारण रावण न...

महावीर की महिमा का गुणगान किया

आज पर्वाधिराज पर्युषण का चौथे दिन भगवान महावीर का जन्मोत्सव बडी धूमधाम से मनाया गया। पूज्यनीय गुरुभगवंतों ने जन्म वाचन का महत्व ओर भगवान महावीर की महिमा का गुणगान किया। प्रवचन का आज का विषय था ” भावना का महत्व” और ” घर एक मंदिर” पर प्रकाश डाला। पूज्यनीय महासती प्रियंकाजी महाराज साहब ने भावना का विवेचन कर कहा कि भावना ही पुन्य पाप, राग वैराग्य, सांसारिक जीवन एवं मोक्ष, आदि क...

विगई की प्रकृत्ति विकार में परिवर्तित होना हैं,

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣6️⃣ 🪔 छह विगई १) दूध, २) दही, ३) घी ४) तेल, ५) गोल, ६) कड़ा विगई(मिठाई) ⚡ विगई की प्रकृत्ति विकार में परिवर्तित होना हैं, 📌 उसके भक्षण से मोह का उदय होता हैं.! 📌 मोह के उदय से आत्म हित चिंतक पुरुषार्थवंत साधक भी दुष्कर्म के प्रवृत्त हो जाते है.! 🛑 *देह स्वस्थ,निरोगी* *मजबूत होते हुए भी* *स्वाद आसक्ति के कारण* *जो विगई भक्षण करता है* *उसके लिये ये निष...

मां को दे देवत्व का स्थान देने वाली एकमात्र संस्कृति भारतीय संस्कृति है

परम पूज्य धैर्योश्रीजी म सा ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया अरिस्टनेंमी भगवान के शासन के चरित्र आत्माओं का वर्णन कियाl देवकी महारानी इनके पुत्र के विलाप का रोचक घटना के माध्यम से आंखों के सामने दृश्य खड़ा कर दिया मां क्या होती हैl उसकी ममता को कोई नाप नहीं सकता मां तेरा जवाब नहीं तेरा साया ही मेरा उजाला हैl मां को दे देवत्व का स्थान देने वाली एकमात्र संस्कृति भारतीय संस्कृति हैl आज इस धरती को श्रवण क...

जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप

*क्रमांक — 472* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप* *👉 आगम ग्रंथों एवं परवर्ती विभिन्न आचार्यों द्वारा जीव और कर्म के बंध काल में, दोनों के विशिष्ट प्रकार के परिणमन को भिन्न-भिन्न उपमाओं से उपमित किया गया है।* *1. आवेष्टन – परिवेष्टन — भगवती में भगवान् महावीर कहते हैं कि जीव के एक प्रदेश को ज्ञानावरणीय आदि कर्म समूह के अनन्त-अनन्त अविभाग-प...

विशिष्ट ज्ञान से पाप विरक्ति

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣5️⃣ 🪔 सत्संग से धर्म श्रवण.. धर्म श्रवण से तत्त्वज्ञान.. तत्त्वज्ञान से विशिष्ट ज्ञान.. विशिष्ट ज्ञान से पाप विरक्ति.. ⚪ पाप विरक्ति से संयम.. संयम से आश्रव का संवर.. ⚪ संवर से तप तप से कर्म निर्जरा निर्जरासे कर्मरहित स्थिति निष्कर्मी अवस्था से मोक्षप्रप्ति.. 💐 अतः सत्संग ही सर्व कल्याण का सर्व रिद्धि सिद्धि का सर्व साधना आराधना का शाश्वत परमानंद का ...

पर्युषण पर्वों के तीसरे दिन

आज परम श्रद्धेय उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में पर्युषण पर्वों के तीसरे दिन प्रवचन श्रवण करते हुए श्रावक श्राविकाएं। आज सुश्रावक श्री सतीश कुमार जैन कसूर वालों का व्रतों की अठाई तप करने पर श्री संघ जालंधर द्वारा तपाभिनंदन करते हुए एस एस जैन सभा रजि जालंधर प्रधान श्री सतपाल जैन, पूर्व प्रधान श्र...

जीने की कला का नाम ही जीवन है: साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा जी

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे पर्व पर्युषण के तीसरे दिन साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा जी म. सा ने कहा जीवन को कैसे जिया जाएl जीने की कला का नाम ही जीवन है। एक ऐसी कला जिसमें सौंदर्य हो, शांति हो, सत्य हो, शिवत्व हो- कला मनोभावों की मार्मिक अभिव्यक्ति होती है। हम कला को न जीवन से विलग कर सकते है और न उसको जीवन के शाश्वत मूल्यों से निरपेक्ष ही कर सकते हैजीवन बड़ा अमूल्य है। इसमें संसार का सौं...

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