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विनय ही धर्म का मुल है

विनय ही धर्म का मुल है

प्रणाम मे अनुशासन। वात्सल्य, विनय की भावना होती है! प्रणाम करने से परिणाम अच्छे होते है! विनय ही धर्म का मुल है! “ ज्यों नमे ते सबसे हमें! ज्यों जगाये निष्टा उसकी बढ़ती है प्रतिष्ठा !साध्वी जिनाज्ञा श्री जी। शील की चुंदड सदाचार का महासागर है ! शाश्वत सुखोको प्राप्त करानेवाली है! शास्वत सुखोको प्राप्त करनेके लिए मनुष्य चारित्रवान होना चाहिए! – डॉ. राज श्री जी म.सा.

आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे चातुर्मासार्थ विराजीत महासाध्वी डॉ. राजश्री जी म.सा. आदि ठाणा 4 के निश्रा मे पर्वाधिराज पर्युषण पर्वका धर्मअनुरागीयों ने बडे उल्हास एवं उमंग के साथ सामुहिक प्रार्थना, अखंड 8 दिवसीय 24 घंटे का “नवकार महामंत्र” जाप, प्रवचन , तप आराधना आदिके माँध्यमसे स्वागत हो रहा है !आजका प्रवचन का विषय था “ चरित्रवान होता है महान”. आज के कार्यक्रम मे पुना के प्रसिध्द उद्योजक भामाशा श्रीमान रमणलालजी लुंकड सौ आशादेवी लुंकड सह परिवार उपस्थित थे !

पुत्र रविंन्द्र जी ने 4 उपवासका प्रत्याख्यान किया ! दोनो पुत्र वधु भी जिनवाणी सुनने पधारी! 4 मॉंस के गौतमप्रसादी का लाभ भामाशा श्रीमान रमणलालजी लुंकड परिवारके लिया ! श्री संघ के और से मोमेंन्टो ( स्म्रुति चिन्ह) देकर एवं शालमाला से पुरा परिवार को नवाज़ा गया ! दोपहर के सत्र में कल्पसूत्र वाचन हुआ एवं अनुपुर्वि पहचान यह प्रतियोगिता हुई! प्रतियोगिता के विजेताओं को छाजेड भाईपा के औरसे पारितोषिक प्रदान किये गये!! उपस्थित धर्मअनुरागीयों का एवं सन्माननीय अतिथीयों का स्वागत संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी ने किया!

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