Author: saadhak

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट मे किया तपस्या का स्वागत 

साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा इच्छाओं का निरोध करना ही तप का परिपालन है। जिस प्रकार आकाश अनंत और विशाल है उसी प्रकार इच्छाएं अनंत हैं। इच्छाओं के बीच मानव जीवन यात्रा करता है। मनुष्य ही व्रत नियम और तपस्या कर सकता है। देवता व्रत नियम और तप नहीं कर सकते हैं। पशु का कोई लक्ष्य नहीं होता उसे उसका मालिक जो देता है उतना खा लेता है। किंतु मानव सोच विचार करके कुछ भी कर सकता है। तप की बड़ी महिमा है तपस्वी की अ...

श्रावक श्रविकायों ने मंगल पाठ गुरू दर्शन कर आत्म कल्याण किया

आज दिनांक 10 सितम्बर-2024 मंगलवार को जैन स्थानक बंगा में विराजमान हरफ़नमौला महासाध्वी श्री समर्थ श्री जी म. परम विचक्षण महासाध्वी श्री समबुद्ध श्री जी म. परम सेवाभावी महासाध्वी श्री साधिका जी म. आदि ठाणे -3 जी क़ी आज्ञा अनुसार बंगा श्री संघ सभा प्रधान एडवोकेट एस एल जैन जी क़ी अध्यक्षता में नवांशहर में विराजमान श्रुत वरिधि जैन भारती परम पूज्य महासाध्वी श्री मीना जी म. सा.- ठाणे-5 जी के प्रवचन का लाभ ल...

कल को संवारने के लिए आज चिंतन बहुत जरूरी

तिनका तिनका इकट्ठा कर एक चिड़िया घोंसला बनाती है हर एक मनके को पिरोकर माला बनती है एक जौहरी सुंदर माला बनाते हैंl ऐसे ही जीवो को अभयदान देकर जेनी पर्व मानता हैl एक बार सुकरात दर्पण में चेहरा देख रहे थे किसी ने पूछा आप दर्पण क्यों देख रहे हो जवाब मिला मैं सुंदर नहीं हूं तो सुंदर बनने की कोशिश करो और सुंदर हो तो सुंदर टापू सुरक्षित रखोl यह बात सिर्फ चेहरे को देखने पर हमारा चरित्र सुंदर है या नहीं यह...

आर्त रौद्र एवं द्वेष का मूल है राग

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣2️⃣ 🪔 256) आर्त रौद्र एवं द्वेष का मूल है राग.! 257) प्रायश्चित से शुद्ध धर्म प्रगट होता हैं.! 258) उदारता के धनी ही महानता के स्वामी बन सकते हैं.! परिग्रही कभी महान नही बन सकते.! 259) अध्यात्म से जुड़ गया हो उसका माया प्रपंच से कोई नाता नहीं रहता.! 260) परम शांति परम समाधि परम आनंददायक एक ही स्थान है प्रभु शरण.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन...

जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप

*क्रमांक — 476* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप* *निश्चय नय से तादात्म्य संबंध केवल सजातीय द्रव्यों में ही होता है। दो भिन्न जातीय द्रव्यों का एकात्म संबंध नहीं हो सकता है। यहाँ पर कर्म और जीव ये दो विजातीय होने से इनमें सात्मीकरण भी संभव नहीं है। कर्म पुद्गल चारों ओर से आत्म प्रदेशों को शत्रुवत् घेर लेते हैं। इस प्रकार कर्म के निमित्त स्वरूप चेतन ...

सांवत्सरिक प्रतिक्रमण क्षमापना सम्पन्न                    

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ-तमिलनाडु के तत्वावधान मे सांवत्सरिक प्रतिक्रमण क्षमापना सम्पन्न श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के तत्वावधान मे स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट मे पर्युषण पर्वराधना सम्पन्न हुई| श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने सांवत्सरिक प्रतिक्रमण पश्चात श्रावक संघ युवक परिषद, श्राविका मण्डल, स्वाध्याय संघ के समस्त सदस्यों व सर्व जीव राशि से क्षमाया...

8 दिन से लगातार महामंत्र नवकार का अखंड जाप चल रहा है

जैन भारती कोकिल कंठी महासाध्वी श्री मीना जी महाराज ठाणे 5 जी के सानिध्य में एवं प्रधान सुरेंद्र जैन की अगुवाई में जैन स्थानक नवांशहर में संवत्सरी महापर्व बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह से मनाया गया! एसएस जैन सभा के महामंत्री रतन कुमार जैन ने बताया कि इसी उपलक्ष्य में जैन स्थानक में पिछले 8 दिन से लगातार महामंत्र नवकार का अखंड जाप चल रहा है! मासखमण, अठाई व्रत एवं विभिन्न प्रकार की तपस्या करने वालों को सम्...

आठ दिवसीय अखंड नवकार महामंत्र जाप

पर्युषण पर्व का सामुहिक क्षमापना, अष्ट दिवसीय अखंड नवकार महामंत्र जाप एवं पारणा से समापन! आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ मे चातुर्मासार्थ विराजीत डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षा श्रीजी, साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के निश्रा में आठ दिवसीय पर्युषण पर्व जप, तप, धर्म आराधना, दान, पौषद, दया के माध्यमसे एवं जिनवाणी , प्रतियोगिता की सुंदर उपाहार द्वारा अध्यात्म पुर्व बडे धुमधामसे मना...

समर्पण से सामर्थ्य प्रगट होता हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣1️⃣ 🪔 251) समर्पण से सामर्थ्य प्रगट होता हैं.! 252) दया करुणा को आत्मसात किये बिना मात्र क्रिया से धर्मी नही बन सकते.! 253) कितना भी धर्म करो,क्रिया करो, तप त्याग अनुष्ठान करो, लेकिन मैत्री मानवता नही है, तो सब बिना शिखर के मंदिर जैसा व्यर्थ हैं ! 354) धर्म का प्रारंभ क्रिया अनुष्ठान से नही, सम्यक सोच से होता है..! 255) सद्बुद्धि से सुख दुर्बुद्धि से दुःख होगा.! 🌧️ *प्रवचन ...

क्षमा से खुलते सुप्त चेतना के बंद कपाट: साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com /माधावरम्: आत्मशुद्धि के महान पर्व क्षमायाचना का महत्व उजागर करते हुए डॉ. साध्वी श्री गवेषणाश्री जी ने कहा कि सृप्त चेतना के बंद कपाटों को खोलने के लिए क्षमा की दस्तक जरूरी है। मन की धरती पर उगी वैमनस्य की कंटीली झारियों को उखाड़‌ने के लिए क्षमा की कुल्हाडी जरूरी है। सरलमना, शुद्धमना होकर इस पर्व में मन की गाँठो को सुलझाना है, मन की दूरियों को दूर करना है। दिल और दिमाग की खिड़कियों प...

प्रवज्या अर्थात आरंभ एवं परिग्रह दोनों का त्रियोगसे सम्यक त्याग

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 5️⃣0️⃣ 🟤 आरंभ समारंभ अर्थात हिंसा युक्त प्रवृत्ति.. परिणाम निर्ध्वंश एवं मलिन करें ऐसी प्रवृत्ति.. ⚫ परिग्रह अर्थात निर्वाह के अतिरिक्त वस्त्र, पात्र, आहार आदि वस्तुओ का संग्रह करना.. ⚪ प्रवज्या अर्थात आरंभ एवं परिग्रह दोनों का त्रियोगसे सम्यक त्याग.. 🧘‍♂️ सफलता पूर्वक राधावेध करनेवाले व्यक्ति जैसा स्थिर चित्त ही प्रवज्या का पालन कर सकता हैं, सत्वहीन व्...

तप त्याग के साथ मनाया संवत्सरी महापर्व2

धर्म नगरी बंगा में लगे धर्म के ठाठ…. स्थानीय बंगा जैन स्थानक में श्रुत वरिधि जैन भारती परम पूज्य महासाध्वी श्री मीना जी म. सा. क़ी सुशिष्या हरफ़नमौला महासाध्वी श्री समर्थ श्री जी म. परम विचक्षण महासाध्वी श्री समबुद्ध श्री जी म. परम सेवाभावी महासाध्वी श्री साधिका जी म. आदि ठाणे -3 के पावन सानिध्य में जैन धर्म के महान 8 दिवसीय पर्युषण पर्व व संवत्सरी महापर्व बड़े ही श्रद्धा भक्ति के साथ मनाये गए ...

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