*☀️प्रवचन वैभव☀️*
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5️⃣2️⃣
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256)
आर्त रौद्र एवं
द्वेष का मूल है राग.!
257)
प्रायश्चित से
शुद्ध धर्म प्रगट होता हैं.!
258)
उदारता के
धनी ही
महानता के
स्वामी बन सकते हैं.!
परिग्रही
कभी महान
नही बन सकते.!
259)
अध्यात्म से
जुड़ गया हो उसका
माया प्रपंच से
कोई नाता नहीं रहता.!
260)
परम शांति
परम समाधि
परम आनंददायक
एक ही स्थान है प्रभु शरण.!
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*प्रवचन प्रवाहक:*
*युग प्रभावक वीर गुरुदेव*
*सूरि जयन्तसेन चरण रज*
मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.
*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ
@ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर