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कृषि करो या ऋषि बनो

कृषि करो या ऋषि बनो

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा कल्प सूत्र के द्वारा बताया भगवान आदिनाथ ने सामाजिक व्यवस्था के संचालन के लिए नगर, गांव, मकान आदि बनाने और उन्हें बसाने का उपदेश दिया था। इसी के साथ उन्होंने वर्ण व्यवस्था का उपदेश भी दिया। उन्होंने वर्ण व्यवस्था की स्थापना प्रजा के कार्य के अनुसार की थी। जो लोग विपत्ति के समय मनुष्यों की रक्षा करने के नियुक्त किए गए थे, वे क्षत्रिय कहलाए।उनका सूत्र वाक्य था- ‘कृषि करो या ऋषि बनो। ‘

साध्वी विनीत प्रज्ञा ने अंतगढ़ सूत्र के द्वारा बताया अतिमुक्त कुमार का उदाहरण देते हुए बताया कि वह एवंता मुनि कैसे बने, 8 वर्ष की उम्र में ही उन्होने संयम को ग्रहण कर लिया था पात्र को तिराते तिराते- अपने जीवन को तिरा लिया केवल ज्ञान और केवल दर्शन को प्राप्त कर लियाl

इस धर्म सभा का संचालन नरेंद्र बडोला ने किया एवं चंदन बाला महिला मंडल की ओर से भोपा और भोपान का नाटिका प्रस्तुत की गई लीला हिंगड़ मनीषा डांगी ने बहुत ही सुंदर नाटिका की*कल हमारा महापर्व सबसे खामेणी में सव्वे जीवा का पर्व है इसलिए ज्यादा से ज्यादा उपवास और व्रत करेंl

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