*🌧️विंशत्यधिकं शतम्*
*📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️*
🌧️
4️⃣8️⃣
*🕉️सत्य ही परमेश्वर है.!🕉️*
🌼
सत्य ही 🤍
जीवन का सार है,
महासमुद्र से भी
अधिक गंभीर है.!🌊
चंद्र से भी अधिक शीतल,🌙
सूर्य से भी अधिक तेजस्वी है☀️
🌷
जो प्रिय हो,
जो उचित हो,
जो हितकारी हो,
जो मर्यादायुक्त हो..
जो अकार्य प्रेरक न हो
जिसका उद्देश्य प्रशस्त हो..
ऐसा सत्य वचन ही
बोलना चाहिए.!
❌
जिसका
उद्देश्य मलिन हो,
जो संयम का घातक हो,
कलह को बढ़ानेवाला हो,
वैर के बीज बोनेवाला हो,
द्रव्य भाव प्राणों का नासक हो,
ऐसा सत्य कभी
नहीं बोलना चाहिए.!
🛑
*अपनी*
*प्रशंसा एवं*
*दूसरों की निंदा भी*
*असत्य के समकक्ष ही हैं.!*
⚡
असत्य का
जनक है लोभ
जननी है कामना.!
💐
असत्य से दूर रहेगा
वो समस्त अनर्थो से बचेगा.!
*श्रीप्रश्न व्याकरण अंगसूत्र📚*
🌷
*तत्त्वचिंतन:*
*मार्गस्थ कृपानिधि*
*सूरि जयन्तसेन चरण रज*
मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.
*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ
@ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर