Author: saadhak

जैन धर्म की आवश्यक क्रिया है प्रतिक्रमण : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तपस्विनी विनीता दुगड़ का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनिश्री रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में सोमवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में विनीता दुगड़़ (धर्मपत्नी : संदीप दुगड़) के अठाई (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तपस्विनी बहन का तेरापंथी सभा द्वारा तपोभिनंदन ...

आत्मीयता में तटस्थता

जिन्दगी चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो किन्तु उसे कोई भी एकाकी नहीं जी सकता। मनुष्य के लिए किसी का संग जरूरी है। इसी कारण मनुष्य नानाविध प्रकार के सम्बन्ध जोड़ता है। एक बात निश्चित है कि कोई भी व्यक्ति समूह से बिलकुल अलग नहीं रह सकता। साधु हो या गृहस्थ सामूहिक रूप से जीवन तो जीना ही पड़ता है किन्तु सम्बन्धों के सन्दर्भ में आत्मीयता के साथ सन्तुलन होना जरूरी है। परिवार या समाज के प्रति मैत्री भाव रख...

महाराष्ट्र राज्याच्या राज्यमंत्री श्रीमती माधुरीताई मिसाळ यांची सुभाषजी ललवाणींनी घेतली सदिच्छा भेट

पुणेः आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघाचे अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी यांनी महाराष्ट्र राज्याच्या राज्यमंत्री श्रीमती माधुरीताई मिसाळ यांची सदिच्छा भेट घेतली. भेटी दरम्यान माधुरीताईंनी सुभाष जींना आज डॉ. कल्याणजी गंगवाल यांचे शुभहस्ते नवचैतन्य सामाजिक संस्थेतर्फे मिळणार्या “खान्देश-शिरोमणी” सन्मानासाठी शुभेच्छा प्रदान केल्यात. या प्रसंगी ऱ्कार्यक्षम नगर सेवक व भाजप नेते प्रविणजी चोरबोले, बिबवेवाडी...

आम्हाला पोहता येतं मात्र बुडणेच चांगले वाटते-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना :  काय योग्य, काय अयोग्य हे कळायला हवे. एखाद्याला पोहता चांगले येते. मात्र बुडणेच चांगले वाटत असेल तर… आज सहाव्या अध्यायावर त्यांनी विवेचन केले. ते म्हणाले की, काही मर्यादा पाळा आणि ही मलिनता दूर करा, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना  दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार,   वाणीचे जादुगार प.पू. र...

मंत्र दीक्षा समारोह

आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनिश्री रमेश कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा 9 वर्ष के ज्ञानार्थियों को मंत्र दीक्षा प्रदान की गई। मंत्र दीक्षा का महत्व बताते हुए डाॅ मुनि ज्ञानेंद्र कुमार जी ने कहा- नमस्कार महामंत्र जीवन निर्माण और जीवन विकास का अनूठा उपक्रम है। मंत्र दीक्षा से दीक्षित बालक बालिकाओं की सुषुप्त शक्तियों को उजागर ...

प्रबल मनोबली ही मासखमण तप कर सकते: मुनि दीपकुमार

पल्लावरम में हुआ मासखमण प्रत्याख्यान समारोह निर्मलजी रांका ने किया 28 का मासखमण पल्लावरम : तमिलनाडु के पल्लावरम क्षेत्र स्थित तेरापंथ भवन में युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री दीपकुमारजी ठाणा-2 के सान्निध्य में श्रीमान निर्मलजी रांका सुपुत्र स्व. श्री राजमलजी रांका ने 28 दिन के मासखमण तप का प्रत्याख्यान समारोह रविवार को श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा पल्लावरम द्वारा किया गया।  ...

युवा अपनी ऊर्जा समाज एवं राष्ट्र के विकास में लगाये: डॉ वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा.ने रविवार को युवा दिवस के रूप में मनाये गये विशेष कार्यक्रम के आयोजन पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा समाज एवं राष्ट्र की रीढ़ है। उन्होंने सभी युवाओं को आव्हान करते हुए कहा कि उन्हें अपनी शक्ति ऊर्जा को समाज एवं राष्ट्र के हित में लगाना चाहिए। तभी समाज और देश सभी क्षेत्रों में और अ...

मनुष्य के स्वभाव पर आधरितआठ कर्मो की प्रकृति: साध्वी सम्बोधि

मनुष्य के स्वभाव के आधार पर जैसे उसके गुण और शक्तियों का आकलन किया जाता है वैसे ही कर्मों की प्रकृति (स्वभाव) के आधार पर उनका विभाजन किया जाता है। आत्मा और कर्म का बन्ध होने के साथ ही कर्म के स्वभाव का विश्लेषण स्वतः हो जाता है। प्रकृति बन्ध कर्म के स्वभाव का विभाजन करने की शक्ति रखता है। जैसे नीम की प्रकृति कड़वापन लिए हुए है तो गुड़ की प्रकृति में मीठापन है, इसी तरह ज्ञानावरणीय कर्म की प्रकृति ज...

जीवन के हर मोड़पर श्रेष्ठता का जागरण! आज्ञा का पालन करो लक्ष्य प्राप्ती होगी – उपाध्याय श्री प्रविण ऋषिजी

पुनाः आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण गुरु आनंद प्रार्थना मंडल का गुरु दर्शन यात्रा का प्रथम चरण उपाध्याय प्रवर पु. प्रविणऋषिजी म. सा. एवं मधुर गायक पु तिर्थेष ऋषिजी के दर्शन एवं मंगलमय आशिर्वाद से प्रारंभ हुई! दर्शन यात्रा मे 24 महानुभावोने सहभाग लेनेसे उपाध्याय श्री जी ने 24 तिर्थंकर कर उपमा दी! विविध धार्मिक आध्यात्मिक जप तप आराधना के माध्यमसे “परिवर्तन चातुर्मास 2025” स्वर्णिम बननेके लिए अग्रेसर ...

प्रतिक्रमण सीखों अभियान के अंतर्गत चेन्नई में 3 अगस्त को चतुर्थ चरण की परीक्षा का आयोजन 

युवक परिषद् तमिलनाडु द्वारा प्रतिक्रमण सीखों अभियान के अंतर्गत चेन्नई में 3 अगस्त को चतुर्थ चरण की परीक्षा का आयोजन  आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा की प्रभावी प्रेरणा हैं कि जैनी परिवार के हर सदस्यों को प्रतिक्रमण के पाठ कंठस्थ हो | इसी लक्ष्य को लेकर अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,जोधपुर के अंतर्गत अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिक्रमण की परीक्षाओं का आयोजन इस वर्ष गतिमान हैं | र...

हमारे कर्म और विचार हमारे भविष्य को आकार देते हैं: साध्वी स्नेहाश्री जी म. सा.

जैसी मति, वैसी गति” का अर्थ है कि मनुष्य की मृत्यु के समय जैसी मानसिक स्थिति या विचार होते हैं, उसी के अनुसार उसे अगला जन्म मिलता है. इसका मतलब है कि हमारे कर्म और विचार हमारे भविष्य को आकार देते हैं, खासकर मृत्यु के समय. – साध्वी स्नेहाश्री जी म. सा. का उद बोधन। आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण में आज साध्वी स्नेहाश्री जी म. सा. ने अपने प्रवचन में समयका महत्व समझाते हुये कह...

सन्त समागम हितकारी- डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी महाराज ने शनिवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संत समागम हितकारी है। संत के दर्शन मात्र से हमारे पाप,ताप और संताप सभी दूर हो जाते है। गुरु हमारे जीवन निर्माता है। गुरु की शरण में जाएं तो अंहकार को छोड़कर निर्विकार भाव से जाना चाहिए। तभी आप गुरु कृपा आशीर्वाद प्राप...

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