Author: saadhak

रेल अधिकारी को रक्षा सूत्र बांध अणुव्रत का दिया संदेश 

चेन्नई : अणुव्रत समिति द्वारा मानव में मानवता के विकास की तर्ज पर समिति शिष्टमंडल दक्षिण रेलवे कार्यालय में कार्यरत अधिकारीयों से मिला।  अध्यक्षा श्रीमती सुभद्रा लुणावत के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने चेन्नई सेंट्रल के पास अवस्थित रेलवे कार्यालय में गया। मुख्य ट्रांसर्पोटेशन प्लानिंग मैनेजर श्री एस बालाजी अरुणकुमार से शिष्टाचार भेंट की। अध्यक्षा ने अधिकारी को राखी बांध कर उनके प्रति शुभकामना सम्प्र...

जीव को अनुकूल प्रतिकूल सुख दुख काअनुभव का कारण वेदनीय कर्म

वेदनीय कर्म सुख-दुःख का वेदन (अनुभव) कराता है। जैसे तलवार की धार पर लगे हुए शहद को चाटने से सुख का संवेदन होता है, उसी प्रकार साता वेदनीय कर्म के उदय से साता (सुख) का अनुभव होता है। साथ ही मधुलिप्त तलवार को चाटते हुए जिह्वा के कट जाने पर दुःख का एहसास होता है, उसी भाँति असाता वेदनीय कर्म के उदय से दुःख का अनुभव होता है। साता वेदनीय कर्म के प्रभाव से सुविधाओं की सर्वत्र अनुकूलता, सुशील परिवार और ऐस...

बर्‍याचदा आम्हाला खूप खबरही सहन होत नाही-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : आत्मा हाच परमात्मा आहे, पण हे लक्षात कोण घेतो. त्यासाठी संकल्प करावा, परंतू आम्हाला तर संसाराशिवाय काहीही लागत नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना ...

ज्ञान से होता है जीवन का कल्याण: डॉ. वरुण गुरुदेव

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने शुक्रवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को ज्ञान विकास के अनेक आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि जिसमे आत्म ज्ञान का प्रकाश हो गया फिर उस जीवात्मा को दुसरे किसी भी बाह्य प्रकाश की जरूरत नहीं रहती है। संसार में अज्ञान ही सभी दुखों का कारण है। आशा, तृष्णा, वासना, कामना, इच्छा आदि सब काम...

ज्ञान है तीसरा नेत्र: डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने गुरुवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का तीसरा नेत्र कहा गया है। जिसके द्वारा जाना जाय, वह ज्ञान है। संसार के भौतिक पदार्थों और आध्यात्मिक तत्वों के स्वरूप को समझने के लिए ज्ञान के समान दूसरा और कोई नेत्र नहीं है। भगवान महावीर ने भी कहा है कि...

आत्मा के दर्शन गुण को उजागर होने में बाधक दर्शनावरणीय कर्म: साघ्वी संबोधि

दर्शनावरणीय कर्म आत्मा के दर्शन गुण को आवृत्त करता है। जैसे राजा के दर्शन हेतु उत्सुक व्यक्ति को द्वारपाल रोक देता है. ऐसे ही यह कर्म आत्मा की दर्शन शक्ति पर पर्दा डाल कर वस्तु के सामान्य बोध (जानकारी) को रोक देता है। इस कर्म के प्रभाव से इन्द्रियों का सामान्य एहसास भी स्पष्ट नहीं हो पाता। कान, नाक, आँख, जबान और त्वचा विकृत या नष्ट हो जाती है अथवा यह कर्म प्राणी को मूक, बधिर, नेत्ररोगी या अपंग बना...

तेरापंथ धर्मस्थल में मासखमण तपोभिनंदन समारोह

युगप्रधान आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनि रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में गुरुवार को तेरापंथ धर्मस्थल में राजेंद्र डोसी के मासखमण तप (31 दिन) एवं सम्पत देवी नाहटा के इक्कीस (21 दिन) तप के उपलक्ष्य पर तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अच्छी संख्या में लोग उपस्थित हुए। मुनि श्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया &...

दो – दो सामायिक, एवं एकासन दिवस के साथ तप त्याग, से मनाई जाएगी

प.पू .उपप्रवर्तिनी महासती श्री प्रमिलाजी म.सा. की सुशिष्याएं तप कौमुदी महासती श्री निर्मलाजी म.सा. आदि ठाणा-5 सुख साता पुर्वक राजाजीनगर स्थानक में विराजमान है। कल शुक्रवार 08.08.2025 * प्रातः *9.00 बजे से ठीक* *10.30*तक* प्रवचन रहेगा, ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधार कर जिनवाणी श्रवण करने का लक्ष्य अवश्य रखे कल *श्रमण सुर्य, मरुधर केसरी,श्री मिश्रीमलजी म. सा का 135 वां, एवं शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प...

मनुष्याला अज्ञान कधीही पुढे जाऊ देत नाही: प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : प्रभू पर्यंत आम्हाला कोण जाऊ देत नसेल ते अज्ञान आहे! मनुष्याला अज्ञान कधीही पुढे जाऊ देत नाही, आम्हाला प्रभूंची आठवण आणि संसाराशी जवळीकही साधू देत नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध...

अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का समायोजन

‘संविधान की धार, मर्यादाओं का हो आधार’ मुख्य विषय पर आधारित हुई प्रतियोगिताएं चेन्नई: अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में, चेन्नई अणुव्रत समिति की आयोजना में अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 की जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन साध्वी उदितयशा के सान्निध्य में साहुकारपेट तेरापंथ सभा भवन में आयोजित हुआ।  कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्रीजी द्वारा नमस्कार महामंत्र से हुआ। निर्णाय...

जैन धर्म में आत्मशुद्धि का उपाय है प्रतिक्रमण : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तपस्विनी पूर्वी नाहटा का तपोभिनंदन सामूहिक आयंबिल अनुष्ठान आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र जी कुमार, मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में बुधवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में पूर्वी नाहटा (धर्मपत्नी : पीयूष नाहटा) के अठाई (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तपस्विनी बहन का तेरापंथी सभा...

संत, धर्मात फरक करणारेच प्रभू महावीरांना बदनाम करु लागले-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : प्रभू महावीर कसे होते, हे सांगण्यासाठी मी आलो नाही. मात्र काहींनी गैरसमज करुन घेतला आहे, असो! देवी- देवता , श्रावक- श्राविका असूनही प्रभू महावीर वेगळेच होते. कारण ते होतेच वेगळे! परंतु दुर्देवाने संत, धर्मात फरक करणारेच प्रभू महावीरांना बदनाम करु लागले आहेत, हे मुळीच बरोबर नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्...

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