श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि जीवन में कोई भी सदकार्य करो विनय भाव से करो। अभिमान ऐसा पत्थर है जो जीवन की नौका को डुबो देता है। अभिमान को जीतने का एकमात्र उपाय है विनय भाव। विनम्रता भी चंदन की तरह है जिसके दो गुण होते है एक सुगंध और दूसरा शीतलता। विनम्रता भी हमारे जीवन में सुगंध और शीतलता प्रदान क...
आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सानिध्य में शंका slow poison का डंका” कार्यशाला का आयोजन हुआ l साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा- शंका, संशय, सन्देह सभी पर्यायवाची शब्द है। शंका तत्व के प्रति, साधना के प्रति, मंत्र जाप, परिवार, समाज के प्रति भी हो सकती है। श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया- संशयात्मा विनश्यति । संशयशील आदमी की आत्मा नष्ट हो जाती है। रात को सोत...
Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में ‘शंका स्लो पोइजन का डंका’ कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् के तीर्थंकर समवसरण में हुआ। साध्वी डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा कि शंका, संशय, सन्देह सभी पर्यायवाची शब्द है। शंका तत्व के प्रति, साधना के प्रति, मंत्र जाप, परिवार, समाज के प्रति भी हो सकती है। श्रीमद्भगवद्...
डा. साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा- छोटे से गांव में जन्मी साध्वी लावण्यश्रीजी ने अर्हता हासिल की। अपनी एक पहचान बनाई।। जिन उत्कृष्ट भावों से आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से संयम ग्रहण किया उसी सिंहवृत्त से अंतिम समय तक पालन किया। आपका स्वभाव मिलनसार था,व्यवहार कुशलता, बेजोड़ थी । गुरुद्वाष्टि की आराधना में ही संघ प्रभावना की। दिव्य आत्मा की दिव्य कहानी का परिचय देते हुए साध्वीश्री ने कहा,साध्वीश्री ...
आज साध्वी डॉ. अर्पिता जी ने फरमाया क्रोध जन्मों की साधना को जला देता है । बड़े से बड़ा साधक अगर क्रोध करे तो उनकी तपस्या का पूरा फल खत्म हो जाता है । क्रोध से आज परिवार टूट रहे है । सभी लोग गुस्से से ग्रस्त है । गुस्सा भी एक गंभीर बिमारी का रूप लेकर हमारे शरीर और समाज को नुक्सान पहुंचा रहा है । आज ब्रेन ट्यूमर , बी.पी , पैरालाइसिज , ड्रिप्रेशन जैसी बिमारियां इस गुस्से की वजह से ही पैदा हो रही है। ...
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 1️⃣8️⃣ 🪔 86) कदाग्रह से अशांति ही मिलेगी.! 87) साधक को बंधक बनाता है उसका अपना विकारी भाव.! 88) समकित से प्रारंभ हुई धर्मयात्रा वीतरागता में पूर्ण होती हैं.! 89) जितना अंतर सूर्य और चंद्र में नही उससे अधिक अंतर तो कथनी और करणी में है फिर रोना रोते हो की दुख ही दुख हैं.! 90) समझ का दीप महाभाग्यवान के अंतर में ही प्रगट होता हैं, ज्ञानरूपी घी से प्रज्वलित होता है.! 🌧️ *प्रवचन प्...
राष्ट्रसंत आचार्य सम्राट पु. आनंद ऋषिजी म.सा. का 125 वाँ एवं गुरुमैय्या चारित्रप्रभा जी का जन्मोत्सव धर्म -तप आराधना से संप्पन्न! राष्ट्र धर्म के लिए जीवन समर्पित! मानव की नही मानवता की पूजा होती है! साधु की नही सजकता आचरण की पुजा की जाती है! साध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. गुरुदेव का जीवन रमणीय थे, इसलिए स्मरणीय बने! समयका सदउपयोग, सजगता, सावधानता, अहंकार विरहीत जीवन, अनासक्त योगी सम जीवन यह आचार्य ...
मॉं पद् मावती एकासना प्रारंभ, 7० भाई-बहनो का सहभाग! “आत्माके अंदरही आद्यात्मिक सुख छिपा है! आत्मिक सुख के लिए जिनवाणी श्रवण करनी चाहिएँ- साध्वी डॉ. राजश्री जी का उद् बोधन! आकुर्डी-निगडी-प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे उपाध्याय पु. गुरुदेव पुष्करमुनीजी म.सा. की सुशिष्याएं डॉ. राजश्री म.सा. आदि ठाणा 4 का चातुर्मास सुचारू रुपसे जारी है ! आजसे मॉं पद्मावती के एकासन आजसे प्रारंभ हुये! 70 धर्मप्रेमी मा...
आमेट की पुण्य धरा पर मनाई गई तप, त्याग के साथ परम पूज्या गुरुणि मैय्या जिनशासन चन्द्रिका झणकार कुवर जी महाराज की 114 वी जन्म जयन्ती जैन साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा गुरुणि मैया का जन्म लवेरा ग्राम में हुआ था आपकी माता को लक्ष्मी का सपना आया था इसलिए इनका नाम झंकार रखा गयाl आपने नागौर जिला में दीक्षा ली थी, आपका स्वभाव बड़ा ही सरल और सहज थाl आप कभी भी किसी से तू करके बात नहीं करते थेl आपको घंटाकर...
!जय आत्मानन्द-देवेन्द्र-शिव-महेन्द्र!! 🙏 जयगुरू अम्बेश-सौभाग्य -मदन के पठ्धर सुशिष्य *मेवाड़ भास्कर उप प्रवर्तक युवामनीषी परम् पुज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी म.सा. करुणाकर* नवदीक्षित श्री हर्षित मुनि जी मा.सा आदि ठाना -2 चातुर्मास मंगलवाड की पावन पुण्य धरा धाम पर पोषद शाला मंगलवाड चौराहा 🙏🙏 *आज दिनांक 7 अगस्त 2024 का प्रवचन* कई क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं ने आकर *मेवाड़ भास्कर उपप्रवर्तक युवा...
आज परम श्रद्धेय श्रमण संघीय प्रथम पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आत्मा राम जी महाराज के पौत्र शिष्य एवं वाचना आचार्य वरिष्ठ उपाध्याय श्री मनोहर मुनि जी महाराज के सुशिष्य रत्न भारत संत गौरव उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं आगम ज्ञाता प्रबल पुरुषार्थी महासाध्वी श्री राजेश्वरी जी महाराज की सुशिष्या सरलमना तपोनिधि मौनसाधिका अनथक पराक्रमी श्री सुलक्षणा जी महाराज की सुशि...
आमेट के जैन स्थानक मे जैन साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा हम सभी को क्षणभर का प्रमाद नहीं करना चाहिए। प्रमाद ही जीवन निर्माण में बाधक होता है। प्रमाद तजे बिना सम्यक मार्ग पर नहीं बढ़ सकते हैंसाधना का मार्ग कठिन एवं कड़वा होता है, लेकिन फल जरूर मीठा होता है। साधना के साथ जीवन में सहनशीलता तथा जीवन उज्जवल बनता है। त्यागी एवं भोगी में अंतर बताते हुए कहा कि त्यागी संसार के पदार्थों में अनासक्त भाव रखता हुआ ...