*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈*
1️⃣8️⃣
🪔
86)
कदाग्रह से
अशांति ही मिलेगी.!
87)
साधक को
बंधक बनाता है
उसका अपना विकारी भाव.!
88)
समकित से
प्रारंभ हुई धर्मयात्रा
वीतरागता में पूर्ण होती हैं.!
89)
जितना अंतर
सूर्य और चंद्र में नही
उससे अधिक अंतर तो
कथनी और करणी में है फिर
रोना रोते हो की दुख ही दुख हैं.!
90)
समझ का दीप
महाभाग्यवान के
अंतर में ही प्रगट होता हैं,
ज्ञानरूपी घी से प्रज्वलित होता है.!
🌧️
*प्रवचन प्रवाहक:*
*मार्गस्थ कृपानिधि*
*सूरि जयन्तसेन कृपापात्र*
श्रुत संस्करणप्रेमी,शिष्यरत्न
मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.
*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ
@ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर