डा. साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा- छोटे से गांव में जन्मी साध्वी लावण्यश्रीजी ने अर्हता हासिल की। अपनी एक पहचान बनाई।। जिन उत्कृष्ट भावों से आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से संयम ग्रहण किया उसी सिंहवृत्त से अंतिम समय तक पालन किया।
आपका स्वभाव मिलनसार था,व्यवहार कुशलता, बेजोड़ थी । गुरुद्वाष्टि की आराधना में ही संघ प्रभावना की। दिव्य आत्मा की दिव्य कहानी का परिचय देते हुए साध्वीश्री ने कहा,साध्वीश्री लावण्यश्रीजी एक अनुभवी और सेवायरायण साध्वी थी।।
साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा- हमारे तेरापंथ धर्म- संघ की वयोवृद्धा साध्वी थी। संघ और संघपति के प्रति , पूर्ण समर्पित थी। महत्त्वपूर्ण बात थी वे कर्नाटक में ही जन्मे, दीक्षा भी कर्नाटक में हुई और देवलोक गमन भी कर्नाटक में हुआ,यह भी एक संयोग था।
साध्वी मेरुप्रभाजी व साध्वी दक्षप्रभाजी ने सुमधुर स्वरों के द्वारा साध्वी लावण्यश्रीजी का गुनानुवाद किया उनकी आत्मा शीघ्र मोक्ष को प्राप्त करे यही मंगल भावना।
इस दौरान माधावरम ट्रस्ट बोर्ड अध्यक्ष श्री घिसूलाल बोहरा , तेयुप चेन्नई अध्यक्ष श्री संदीप मुथा , तेयुप निवर्तमान अध्यक्ष श्री दिलीप गेलडा , संसारपक्षीय संचेती परिवारजन से भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी श्री मेरूप्रभा जी ने किया।। आभार ज्ञापन माधावरम ट्रस्ट के मंत्री श्री पुखराज चोरडिया ने दिया।।