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जिन शासन की अनमोल धरोहर है: साध्वी विनीत प्रज्ञा

जिन शासन की अनमोल धरोहर है: साध्वी विनीत प्रज्ञा

आमेट की पुण्य धरा पर मनाई गई तप, त्याग के साथ परम पूज्या गुरुणि मैय्या जिनशासन चन्द्रिका झणकार कुवर जी महाराज की 114 वी जन्म जयन्ती जैन साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा

 गुरुणि मैया का जन्म लवेरा ग्राम में हुआ था आपकी माता को लक्ष्मी का सपना आया था इसलिए इनका नाम झंकार रखा गयाl आपने नागौर जिला में दीक्षा ली थी, आपका स्वभाव बड़ा ही सरल और सहज थाl आप कभी भी किसी से तू करके बात नहीं करते थेl आपको घंटाकर्ण का इष्ट थाl आपके द्वारा रोते-रोते लोग आते थे और हंसते-हंसते जाते थे रोगी आता था निरोगी होकर जाता था खाली झोली लेकर आते भारी झोली ले जाते थे ऐसी हमारी गुरुणि मैय्या का जीवन चरित्र था।।

आज हम जो कुछ भी है अपनी गुरुणि मैया की कृपा से है।। हम उनका उपकार कभी भी भूल नहीं सकते, वह आज हमसे दूर हो गई पर हमारे दिल में हमेशा रहेंगे।। गुरुणि मैय्या के चरणों मैं वंदन नमन करती हूं और यही कहूंगी आपका आशीर्वाद आपका वात्सल्य हमारे ऊपर हमेशा बरसता रहेl

 

साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा व्यक्तित्व जिन शासन की अनमोल धरोहर है। उनके गुणों का जितना बखान किया जाए उतना कम है। सरलता, सहजता, वात्सल्यता और निरहंकारिता की वह प्रतिमूर्ति थी उनके दर्शन और वंदन करने वाले श्रद्धालुओं से जब वह कहती हैं दया पालो पुण्यवानो तो रोम-रोम पुलकित हो उठता है। अनुशासित और संस्कारित जीवन जीने की वह प्रेरणा देती थी और भारतीय संस्कृति को विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति बताकर उसका आचरण करने की नसीहत वह अपने अनुयायियों को देती थी

साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा अनुशासनमय संयम यात्रा, सहज सरलता, बच्चों का निर्मल मन बिल्कुल मधुर सी छवि आप में दिखती थी क्रोध तो दूर तनाव, खिन्नता, विषाद आदि चेहरे पर नहीं झलकते थे, हमेशा एक सी प्रसन्न, अपूर्व सौम्यता युक्त, भावभीनी मुस्कुराहट आपके चेहरे पर चमकती थी, जैसी आप अंदर थी वैसे ही बाहर थी आपकी कथनी करनी में कोई अंतर नहीं था, हमारा सौभाग्य है कि हमें ऐसी परम पूज्य गुरु माता के सानिध्य में दीक्षा का लेना काशुभ अवसर मिला! !

मीडिया प्रभारी प्रकाश चंद्र बडोला ने बताया कि इस अवसर पर मुमुक्षु सोनू , शिवानी, चीनू, अनुष्का ने भी गीतिका गाकर अपने भाव प्रकट किया महिला मंडल ने तीन-तीन सामायिक, उपवास एवं एकासना करके त्याग का समर्पण दिया। इस धर्म सभा का संचालन राकेश हिरण ने किया ।

इस धर्म सभा मे धर्मेश कोठारी, सुरेंद्र सूर्या, भंवरलाल सरणोत, ललित डाँगी, सुरेश दक, पारस बाबेल, कैलाश हिरण, नाथूलाल हिंगड़, नरेश संचेती, चंदनमल बापना, सुशील सूर्या, उदयसिंह पंवार, पार्षद दिनेश सरणोत, चंदन सिंह राठौड़, अनमोल सरणोत, अरिहंत सिरोया, कैलाश खाब्या, दिनेश बाबेल, राहुल दक, मुकेश सिरोया, राजेन्द्र डाँगी, सुरेश डाँगी, पवन मेहता, प्रकाश हिरण, आदि श्रावक एवं श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही ।

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