मनुष्य के स्वभाव के आधार पर जैसे उसके गुण और शक्तियों का आकलन किया जाता है वैसे ही कर्मों की प्रकृति (स्वभाव) के आधार पर उनका विभाजन किया जाता है। आत्मा और कर्म...
पुनाः आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण गुरु आनंद प्रार्थना मंडल का गुरु दर्शन यात्रा का प्रथम चरण उपाध्याय प्रवर पु. प्रविणऋषिजी म. सा. एवं मधुर गायक पु तिर्थेष ऋषि...
युवक परिषद् तमिलनाडु द्वारा प्रतिक्रमण सीखों अभियान के अंतर्गत चेन्नई में 3 अगस्त को चतुर्थ चरण की परीक्षा का आयोजन आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा क...
जैसी मति, वैसी गति” का अर्थ है कि मनुष्य की मृत्यु के समय जैसी मानसिक स्थिति या विचार होते हैं, उसी के अनुसार उसे अगला जन्म मिलता है. इसका मतलब है कि हमार...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी महाराज ने शनिवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को स...
तपस्वी भाई का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य ए...
वृक्ष की विशालता का मुख्य श्रेय बीज को जाता है इसलिए वृक्ष को जानने हेतु बीज को जानना जरूरी है। ज्ञानियों ने कर्म महावृक्ष के दो बीज बताये हैं, राग और द्वेष। कि...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने शुक्रवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को...
जालना : आसक्तीचं मनुष्यालाच कोणत्या थराला नेऊन ठेवील हे सांगता येत नाही. परंतू सोन्याने माणसाला बांधून ठेवले आहे. ज्यांच्या आहे, आणि ज्यांच्याकडे नाही, त्यांचाह...
आत्मा के भाव को परिणाम या अध्यवसाय कहा जाता है। राग-द्वेष रूप भाव-धारा के मिलने से भाव अशुभ हो जाते हैं जो कर्मबन्ध का कारण बनते हैं। यदि भाव शुभ या प्रशस्त हो ...
प्रवचन – 1.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) आपल्या जैन धर्मसंस्कृतीमध्ये अनेक तपस्वी मुनिराजांनी आपल्या संयमी जीवनातून...