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साध्वी श्री लावण्याश्री जी की गुनानुवाद सभा- माधावरम चेन्नई

डा. साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा- छोटे से गांव में जन्मी साध्वी लावण्यश्रीजी ने अर्हता हासिल की। अपनी एक पहचान बनाई।। जिन उत्कृष्ट भावों से आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से संयम ग्रहण किया उसी सिंहवृत्त से अंतिम समय तक पालन किया। आपका स्वभाव मिलनसार था,व्यवहार कुशलता, बेजोड़ थी । गुरुद्वाष्टि की आराधना में ही संघ प्रभावना की। दिव्य आत्मा की दिव्य कहानी का परिचय देते हुए साध्वीश्री ने कहा,साध्वीश्री लावण्यश्रीजी एक अनुभवी और सेवायरायण साध्वी थी।। साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा- हमारे तेरापंथ धर्म- संघ की वयोवृद्धा साध्वी थी। संघ और संघपति के प्रति , पूर्ण समर्पित थी। महत्त्वपूर्ण बात थी वे कर्नाटक में ही जन्मे, दीक्षा भी कर्नाटक में हुई और देवलोक गमन भी कर्नाटक में हुआ,यह भी एक संयोग था। साध्वी मेरुप्रभाजी व साध्वी दक्षप्रभाजी ने सुमधुर स्वरों के द्वारा साध्वी लावण्यश्रीजी का गुनानुवाद किया उ...

क्रोध नरक का द्वार: साध्वी डॉ. अर्पिता

आज साध्वी डॉ. अर्पिता जी ने फरमाया क्रोध जन्मों की साधना को जला देता है । बड़े से बड़ा साधक अगर क्रोध करे तो उनकी तपस्या का पूरा फल खत्म हो जाता है । क्रोध से आज परिवार टूट रहे है । सभी लोग गुस्से से ग्रस्त है । गुस्सा भी एक गंभीर बिमारी का रूप लेकर हमारे शरीर और समाज को नुक्सान पहुंचा रहा है । आज ब्रेन ट्यूमर , बी.पी , पैरालाइसिज , ड्रिप्रेशन जैसी बिमारियां इस गुस्से की वजह से ही पैदा हो रही है। इस गुस्से को खत्म करना होगा और इस पर नियंत्रण करना होगा। क्रोध नरक का द्वार है क्रोध करने से पहले जीवन नरक बनता है और फिर मृत्युपरांत व्यक्ति नरक में धक्के खाता है ।

कदाग्रह से अशांति ही मिलेगी

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 1️⃣8️⃣ 🪔 86) कदाग्रह से अशांति ही मिलेगी.! 87) साधक को बंधक बनाता है उसका अपना विकारी भाव.! 88) समकित से प्रारंभ हुई धर्मयात्रा वीतरागता में पूर्ण होती हैं.! 89) जितना अंतर सूर्य और चंद्र में नही उससे अधिक अंतर तो कथनी और करणी में है फिर रोना रोते हो की दुख ही दुख हैं.! 90) समझ का दीप महाभाग्यवान के अंतर में ही प्रगट होता हैं, ज्ञानरूपी घी से प्रज्वलित होता है.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र* श्रुत संस्करणप्रेमी,शिष्यरत्न मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

मानव की नही मानवता की पूजा होती है

राष्ट्रसंत आचार्य सम्राट पु. आनंद ऋषिजी म.सा. का 125 वाँ एवं गुरुमैय्या चारित्रप्रभा जी का जन्मोत्सव धर्म -तप आराधना से संप्पन्न! राष्ट्र धर्म के लिए जीवन समर्पित! मानव की नही मानवता की पूजा होती है! साधु की नही सजकता आचरण की पुजा की जाती है! साध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. गुरुदेव का जीवन रमणीय थे, इसलिए स्मरणीय बने! समयका सदउपयोग, सजगता, सावधानता, अहंकार विरहीत जीवन, अनासक्त योगी सम जीवन यह आचार्य भगवंत की गुण विशेषता- साध्वी डॉ. मेघाश्री जी म. सा. आकुर्डी- आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे साध्वी रत्ना पु. डॉ. राजश्री म.सा. डॉ. मेघाश्री जी म.सा. साध्वी समिक्षाश्री जी म.सा. साध्वी जिनआज्ञा श्री जी म.सा. के निश्रा में बड़े उत्साहवर्धक वातावरण में जप, तप, धर्म आराधना, दान, रक्तदान आदि विविध सप्त दिवसीय कार्यकमोके माध्यमसे मनाया गया! गुरु चरणोमे 101 एकासन और 101 आयंबील के तप आराधन...

आत्मिक सुख के लिए जिनवाणी श्रवण करनी चाहिएँ- साध्वी डॉ. राजश्री जी

मॉं पद् मावती एकासना प्रारंभ, 7० भाई-बहनो का सहभाग! “आत्माके अंदरही आद्यात्मिक सुख छिपा है! आत्मिक सुख के लिए जिनवाणी श्रवण करनी चाहिएँ- साध्वी डॉ. राजश्री जी का उद् बोधन! आकुर्डी-निगडी-प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे उपाध्याय पु. गुरुदेव पुष्करमुनीजी म.सा. की सुशिष्याएं डॉ. राजश्री म.सा. आदि ठाणा 4 का चातुर्मास सुचारू रुपसे जारी है ! आजसे मॉं पद्मावती के एकासन आजसे प्रारंभ हुये! 70 धर्मप्रेमी माताओंने एकासन आराधना की शुरुवात कर प्रत्याख्यान लिए! सौ. छायाजी मुनोत के 9 उपवासकी कल शनिवार को पछकावणी है! 30 जुलाई से गुरुआनंद चारित्र सप्ताह का आयोजन विविध कार्यक्रमोके माध्यमसे श्री संघ द्वारा किया गया है! यह जानकारी संघाध्यक्ष सुभाष ललवाणी ने दी!

जिन शासन की अनमोल धरोहर है: साध्वी विनीत प्रज्ञा

आमेट की पुण्य धरा पर मनाई गई तप, त्याग के साथ परम पूज्या गुरुणि मैय्या जिनशासन चन्द्रिका झणकार कुवर जी महाराज की 114 वी जन्म जयन्ती जैन साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा  गुरुणि मैया का जन्म लवेरा ग्राम में हुआ था आपकी माता को लक्ष्मी का सपना आया था इसलिए इनका नाम झंकार रखा गयाl आपने नागौर जिला में दीक्षा ली थी, आपका स्वभाव बड़ा ही सरल और सहज थाl आप कभी भी किसी से तू करके बात नहीं करते थेl आपको घंटाकर्ण का इष्ट थाl आपके द्वारा रोते-रोते लोग आते थे और हंसते-हंसते जाते थे रोगी आता था निरोगी होकर जाता था खाली झोली लेकर आते भारी झोली ले जाते थे ऐसी हमारी गुरुणि मैय्या का जीवन चरित्र था।। आज हम जो कुछ भी है अपनी गुरुणि मैया की कृपा से है।। हम उनका उपकार कभी भी भूल नहीं सकते, वह आज हमसे दूर हो गई पर हमारे दिल में हमेशा रहेंगे।। गुरुणि मैय्या के चरणों मैं वंदन नमन करती हूं और यही कहूंगी आपका आशीर्वाद...

कोमल मुनि जी मा.सा के मुख से जिनवाणी

!जय आत्मानन्द-देवेन्द्र-शिव-महेन्द्र!! 🙏 जयगुरू अम्बेश-सौभाग्य -मदन के पठ्धर सुशिष्य *मेवाड़ भास्कर उप प्रवर्तक युवामनीषी परम् पुज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी म.सा. करुणाकर* नवदीक्षित श्री हर्षित मुनि जी मा.सा आदि ठाना -2 चातुर्मास मंगलवाड की पावन पुण्य धरा धाम पर पोषद शाला मंगलवाड चौराहा 🙏🙏  *आज दिनांक 7 अगस्त 2024 का प्रवचन* कई क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं ने आकर *मेवाड़ भास्कर उपप्रवर्तक युवामनीषी परम् पूज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी मा.सा आदि ठाना 2* के दर्शन लाभ लिए व जिनवाणी स्मरण करके खुद के जीवन को धन्य बनाया🙏🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

धर्म सभा का आयोजन

आज परम श्रद्धेय श्रमण संघीय प्रथम पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आत्मा राम जी महाराज के पौत्र शिष्य एवं वाचना आचार्य वरिष्ठ उपाध्याय श्री मनोहर मुनि जी महाराज के सुशिष्य रत्न भारत संत गौरव उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं आगम ज्ञाता प्रबल पुरुषार्थी महासाध्वी श्री राजेश्वरी जी महाराज की सुशिष्या सरलमना तपोनिधि मौनसाधिका अनथक पराक्रमी श्री सुलक्षणा जी महाराज की सुशिष्या प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में धर्म सभा का आयोजन जैन स्थानक गुड़ मंडी जालंधर में किया गया। सर्वप्रथम मंगलाचरण से सभा का शुभारंभ सेवा भावी श्री अभिनव मुनि जी महाराज ने किया। ओजस्वी वक्ता श्री संयमेश मुनि जी महाराज ने सामायिक के बत्तीस दोषों पर अपने भाव रखे।। उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज ने सारगर्भित पावन प्रवचन फ़रमाया। मंच संचालन...

प्रमाद ही जीवन निर्माण में बाधक होता है: साध्वी आनन्द प्रभा

आमेट के जैन स्थानक मे जैन साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा हम सभी को क्षणभर का प्रमाद नहीं करना चाहिए। प्रमाद ही जीवन निर्माण में बाधक होता है। प्रमाद तजे बिना सम्यक मार्ग पर नहीं बढ़ सकते हैंसाधना का मार्ग कठिन एवं कड़वा होता है, लेकिन फल जरूर मीठा होता है। साधना के साथ जीवन में सहनशीलता तथा जीवन उज्जवल बनता है। त्यागी एवं भोगी में अंतर बताते हुए कहा कि त्यागी संसार के पदार्थों में अनासक्त भाव रखता हुआ पहले ही मुक्त हो जाता है, लेकिन भोगी जीवन पर्यंत सांसारिक सुखों को भोगने में अमूल्य मानव जीवन को बर्बाद कर देता है। त्यागी सभी को सहज छोड़ देता है जबकि भोगी पूरे जीवन में सबका भोग नहीं कर सकता है। यह मन ही हमें त्याग एवं भोग मार्ग पर ले जाता है। इसलिए मन पर नियंत्रण आवश्यक है। साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा जीवन क्षण भंगुर है, चंचल विद्युत के समान, ओस की बूंदों के समान है। इसलिए जब तक वृद्धावस्था, रो...

“राजस्थानी ओलिम्पयाड” के खो खो व कबड्डी में चंदाबाई पगारिया स्कूल, पेरम्बुर विजेता रहे

राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु द्वारा राजस्थान रत्न के सुभाषचंद रांका प्रस्तुति “राजस्थानी ओलिम्पयाड” तथा पावर्ड बाय राजस्थान रत्न मोहन गोयंका फाउंडेशन के अंतर्गत खो खो व कबड्डी प्रतियोगिता 4 अगस्त रविवार को DG वैष्णव कालेज में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। स्वागत भाषण अध्यक्ष प्रवीण टाटिया ने दिया। ओलंपियाड चेयरमैन डॉ अशोक जे मुंदड़ा ने राजस्थानी ओलम्पियाड के बारे में जानकारी दी। मुख्य अतिथि श्री सुलेख जैन, आईआरएएस (उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी दक्षिण रेलवे) तथा विशिष्ट अतिथि तमिलनाडु क्रिकेट टीम के बालींग कोच एडवार्ड केन्नडी ने शुभारंभ किया। अतिथि का सम्मान शाल व स्मृति चिन्ह से पुर्वाध्यक्ष मोहनलाल बजाज, चेयरमैन अशोक मुंदड़ा ने किया। प्रकाश सेठिया खो खो टूर्नामेंट के समन्वयक ज्ञानचंद कोठारी और नाकोडा मार्बल कब्बडी प्रीमियर लीग के समन्वयक नवनीत दमानी ने मोर्चा संभाला। सह सचिव अजय ...

पैंसठिया छंद “का महानुष्ठान

Sagevaani.com /माधावरम (चेन्नई): युवामनीषी आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में ” पैंसठिया छंद “का महानुष्ठान आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल में अनुष्ठान रखा गया। डा. साध्वी श्री गवेषणाश्री जी ने कहा- वर्तमान में हर व्यक्ति क्लेश अशांति, असुरक्षा तथा राहु के दोष से संत्रस्त है। इस पीड़ा से मुक्ति एवं सभी ग्रह दोषों की उपशांति के लिए यह पैंसठिया छंद रामबाण औषध है। इसमें 24 तीर्थंकरो की स्तुति की गयी है। चौबीस ही तीर्थकर महाशक्ति है। सर्प जैसे बांसुरी के नाद से जागृत होता है वैसे ही इन 24 तीर्थकरों की आराधना करने से आत्मा मोह निद्रा से जागृत होती है। इस छंद का प्रतिदिन कम से कम 7, 9, 11 अथवा 15 बार जप अवश्य करें। इस छंद का यंत्र है जिसमें 1 से लेकर 25 तक अंक है जिनमें तीर्थेकर के चौबीस अंक है और 25 वां अंक इष्ट की स्थापना के रूप...

धर्म सभा का आयोजन

आज परम श्रद्धेय श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आंनद ऋषि जी महाराज की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में धर्म सभा का आयोजन जैन स्थानक गुड़ मंडी जालंधर में किया गया। सर्वप्रथम मंगलाचरण से सभा का शुभारंभ सेवा भावी श्री अभिनव मुनि जी महाराज ने किया। तदोपरांत मधुर व्याख्यानी श्री पूजा जी महाराज ने आचार्य भगवन के जीवन पर प्रकाश डाला। उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज ने सारगर्भित पावन प्रवचन फ़रमाया। मंच संचालन जैन सभा मंत्री मुस्कान जैन ने किया। एस एस जैन बिरादरी आत्म गद्दी लुधियाना सह मंत्री दीपांशु जैन ने गुरू चरणों में अपने भाव रखे। इस अवसर पर एस जैन सभा रजि जालंधर प्रधान सतपाल जैन, धार्मिक कमेटी चेयरमैन अमित जैन, मंत्री नीरज ...

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