🙏🏻श्री महावीराय: नम 🙏🏻 🙏श्रमण संघ जयवन्त हो🙏 🙏जय गुरु श्री जैन दिवाकर🙏 श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ( पूर्वी क्षेत्र) *श्री जैन दिवाकर सामयिक साधना भवन , महावीर नगर इंदौर *🏳️🌈 प्रतिदिन प्रवचन प्रातः 9:00 से 10:00 एव रात्रि 8:00 से 9:00 जाप🏳️🌈* *आचार्य सम्राट ध्यान योगी श्री शिव मुनि जी महाराज,उत्तर भारतीय प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री सुभद्र मुनि जी महाराज एवं संयम शिरोमणि जैन भारती श्री सुशील कुमारी जी महाराज की शिष्या सेवाभावी श्री सौरभ जी महाराज की महावीर नगर स्थानक में विराजमान सुशिष्या सरलात्मा मृदु स्वभावी *पू श्री शीतल जी मा सा एव साध्वी मण्डल के प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 9:00 से 10:00 तक निरंतर जारी है। *उत्तर भारतीय प्रवर्तक पू सुभद्र मुनीज़ी मा सा की जन्म जयंती पर त्रिदिवसीय कार्यक्रम के अन्तर्गत आज दिनांक 11अगस्त रविवार को सजोड़े लोगस्स के जाप संपन्न हुए। ...
“श्री नेमीश्वर संभवस्वाम, सुविधि धर्म शांती अभिराम! अनंत सुव्रत नमिनाथ सुजाण,श्री जिनवर मुझ करो कल्याण!” आत्मा की बॅटरी प्रभु नामसे चार्ज करो- साध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. विश्वास, सुसंवाद, सहनक्षमता, समय, धन्यवाद यह पंचसुत्री जीवन को उत्सव बना देती है! साध्वी डॉ. मेघाश्री जी। आकुर्डी-निगडी-प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे आज डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघा श्री जी म.सा. आदि ठाणा 4 के निश्रा मे “श्री पैंसठियाॉं” सजोड जाप का ( 65 जोडियॉं) आयोजन किया गया! इसके अलावा भी अनेक धर्मप्रेमीयोंने जाप अनुष्ठान में सहभाग लिया! जप तप की महत्ता महासाध्वीयोंने अपने प्रवचन के माध्यमसे बताई और नियमित रुपसे चातुर्मास कालमें जिनवाणी सुननेका एहलान किया! साध्वी समिक्षा श्री जी और जिनआज्ञा श्री जी ने अपने मधुरकंठ द्वारा स्तवन सुनाए! पिंपरी चिंचवड़ क्षेत्र के विविध संघ के पदाधिकारीयोने भी जाप एवं प्रवचन का लाभ उठाया!...
आमेट के जैन स्थानक महावीर भवन मे साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा हर आदमी को अपने जीवन में अच्छे स्वभाव, अच्छी सोच का मालिक होना ही चाहिए। यही वे सद्गुण हैं जो आदमी के वर्तमान को भी उज्ज्वल बनाते हैं। जैसा आदमी का नेचर होता है, वैसा ही फ्यूचर होता है। ‘आनंद और खुशियां” जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत है। यह जिंदगी अच्छे रंग के साथ नहीं अच्छे ढंग से जी जानी चाहिए। अच्छे नेचर का मालिक बनना चाहते हो तो अपने स्वभाव में पलने वाले गुस्से को गुडबाय कर दो।लोगों के साथ हमारे रिश्ते कैसे रहेंगे, ये भी हमारा स्वभाव और व्यवहार तय करता है। यदि आपको लगता है कि आपका चेहरा सुंदर नहीं है तो कोई दिक्कत नहीं, अपने स्वभाव को सुंदर बना लो। आपका स्वभाव सुंदर बन गया तो आप लोगों के दिलों में राज करोगे। साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा आदमी का शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाता है। पत्थर को भी जब तराशकर प्रतिमा बनाया जा ...
*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 2️⃣1️⃣ 💛 *उदारता* *सागर सा ह्रदय..* परहित की मनोवृत्ति, निर्मल बोध युक्त सद्ज्ञान.. *पाप प्रवृत्ति के प्रति अप्रीति,* शत्रुता भाव का अभाव.. जीवमात्र के लिए करुणा.. *गुण संपन्न का विनय,* *गुणहीन के प्रति दयाभाव..* किसीके दुख में आत्मकंपन, *खुद के दुख में समभाव..* चंचलता का त्याग, *विकट संजोगों के निर्भयता.!* ईर्ष्या का अभाव, मैत्रिभाव का विकास.. *निःस्वार्थ लोकप्रियता..* *सर्वत्र औचित्य का पालन* ये सब धर्मसिद्धि के लक्षण है.! 🟡 *धर्मसिद्धि प्राप्त होने से* मतिभ्रम, मूढ़ता नही रहती, अति विषयतृष्णा नही रहती.. जिनवचनों के प्रति अरुचि नही होती.! 🌅 ऐसे जीवो में ही जिनकथित मैत्री आदि भावनाओ का विकास होता हैं.! *📘श्री षोडशकजी प्रकरण📘* *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन कृपाप्राप्त* श्रुत-स्वाध्यायनिष्ठ शिष्यरत्न मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श...
आमेट के महावीर भवन मे वीरपत्ता की पावन भूमि पर चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा की दूध का सार मलाई है तो जीवन का सार भलाई हैl किसी के काम आओगे तो कोई तुम्हारे काम आयेगा, वरना इतना किसके पास वक़्त है जो हर बार दौड़ा आयेगा। दूसरों को दोष देने में ही इंसान आधी ज़िंदगी निकाल देगा तो, खुद के लिए हमेशा दूसरों से भले की उम्मीद कहाँ से कर पायेगा। हम जब भी निस्वार्थ भाव से किसी की मदद के लिए कोई काम करते हैं तो उसका लाभ जरूर मिलता है। ऐसा काम करते समय ये नहीं सोचना चाहिए कि इस काम से हमें क्या लाभ मिलेगा। निस्वार्थ भाव से किया गया काम हमारे पुण्यों में बढ़ोतरी करता है और दूसरों को इससे लाभ मिलता हैदूध का सार मलाई है, वैसे ही जीव का सार भलाई है। हम अपने जीवन में भलाई को इसलिए अपना नहीं पाते, क्योंकि बुराई का दामन हमसे छूटता नहीं। जब तक हम बुराई को बुरा नहीं मानेंगे, तब तक हम उसका त...
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बार ऐसोसिएशन भीम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया, जन परमार्थ संस्थान का भी किया अवलोकन । निकटवर्ती नंदावट गांव में तपाचार्या गुरुमाता जयमाला जीजी म.सा. की प्रेरणा से संचालित जय आनन्द जनपरमार्थ संस्थान भीम में राजसमंद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश राघवेन्द्र काछवाल, मोटरयान दावा दुर्घटना अधिकार जिला न्यायाधीश अश्विनी वैष्णव, जिला पारिवारिक न्यायाधीश संतोष मित्तल एवं सिविल न्यायालय भीम के न्यायाधीश ब्रह्मानंद शर्मा ने संस्थान परिसर का अवलोकन कर संस्थान द्वारा संचालित जन परमार्थ की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली। संस्थान के मंत्री रतनलाल मारु एवं बार एसोसिएशन भीम के अध्यक्ष हितेष मेहता ने उन्हें संस्थान की विस्तृत जानकारी से अवगत कराया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री काछवाल ने संस्थान संचालको को साधुवाद देते हुए कहा कि जैन समाज हमेशा समय-समय पर अपने अर्थ का सदुपयो...
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 🪔 101) अपेक्षा रखेंगे तो हमारी उपेक्षा होगी.! 102) ईच्छाओं के बंधन से मुक्ति ही मोक्ष हैं.. जब तक ये बंधन रहेगा तब तक संसार परिभ्रमण यूंही चलता रहेगा..! 103) लक्ष बलबान है तो प्राप्ति का उपाय भी बलवान होना चाहिए..! 104) विशेष ही ईतिहास बना सकते हैं.. सामान्य तो इतिहास बन जाते हैं.! 105) सामूहिक कर्म का उदय भी सामूहिक होगा..! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन कृपाप्राप्त* श्रुत संस्करणप्रेमी,शिष्यरत्न मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की योजना भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत स्थापित जैन गणित केन्द्र, इंदौर के मुख्य अन्वेषक डॉ. अनुपम जैन का चेन्नई में आगमन पर शुक्रवार को श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु द्वारा सम्मान किया गया | श्रावक संघ के कार्याध्यक्ष आर. नरेन्द्र कांकरिया ने डॉ. जैन और उनकी पत्नी निशा का शॉल,हार और उपहार से सम्मान किया और बताया कि विश्व मैत्री सेवा सम्मान,जैन आगम मनीषी अवार्ड,शास्त्री परिषद जरनिलश्म व तीर्थंकर ऋषभ देव अवार्ड,अहिंसा इंटरनेशनल जरनिलश्म वागीश्वरी अवार्ड,आचार्य योगेंद्र सागर मेमोरियल अवार्ड आदि अनेक पुरस्कारों से पुरस्कृत व्यक्तित्व का सम्मान करते हुए जैन समाज गौरान्वित हैं | साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने डा जैन को साहित्य भेंट किया और परिचय देते हुए कहा कि डा जैन ने पन्द्रह विज्ञान व गणित संबंधित अति उपयोगी पुस्तके लिखी हैं व अनेक लेख लिखे हैं व जिनशा...
आमेट के महावीर भवन मे वीरपत्ता की पावन भूमि पर चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा मानव जीवन अनमोल है, इसका सदुपयोग जीवन को संवारने में करेl हमारी आत्मा पर कर्मों की धूल जम गई है। इसे साफ कर पाना केवल इस दुर्लभ मानव जीवन में ही संभव है। यदि अब भी नहीं संभले तो आत्मा 84 लाख योनियों में कष्टों को भोगते हुए भ्रमण करेगी। मानव जीवन अनमोल है, इसका सदुपयोग जीवन को संवारने में करेंमन की पवित्रता से जीवन आगे बढ़ता है। क्योंकि जीवन में मन ही है जो भटकता है और जीवन को भी भटकाता है। यदि वह अपने वश में हो जाता है तो सब कुछ सही रहता है। जीवन का उत्थान होता है।मनुष्य जीवन की तुलना वृक्ष से करते हुए कहा जिस प्रकार से एक बार किसी वृक्ष के जल जाने पर वह फिर से वृक्ष बन जाए यह संभव नहीं है। इसी प्रकार फिर से मनुष्य जन्म प्राप्त हो जाने के पश्चात भी अच्छा देश, अच्छे कुल, निरोगी काया, परम वैभव और ...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि जीवन में कोई भी सदकार्य करो विनय भाव से करो। अभिमान ऐसा पत्थर है जो जीवन की नौका को डुबो देता है। अभिमान को जीतने का एकमात्र उपाय है विनय भाव। विनम्रता भी चंदन की तरह है जिसके दो गुण होते है एक सुगंध और दूसरा शीतलता। विनम्रता भी हमारे जीवन में सुगंध और शीतलता प्रदान करती है। जिस तरह चंदन और चंद्रमा किरणे शीतलता देती है शांति प्रदान करती है उसी तरह विनम्रता जिस व्यक्ति के जीवन में आ जाती है वह व्यक्ति लोकप्रिय सर्वप्रिय बन जाता है। उन्होंने कहा शिष्य दो प्रकार के होते है -विनीत और अविनीत। विनीत शिष्य विनयवान और अविनीत शिष्य अहंकारी होता है। अविनीत शिष्य अहंकारी और अभिमानी होते है। और विनीत शिष्य विवेकवान और शांत स्वभावी होते है। जिनके जीवन में विनम्रता के गुण आ...
आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सानिध्य में शंका slow poison का डंका” कार्यशाला का आयोजन हुआ l साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा- शंका, संशय, सन्देह सभी पर्यायवाची शब्द है। शंका तत्व के प्रति, साधना के प्रति, मंत्र जाप, परिवार, समाज के प्रति भी हो सकती है। श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया- संशयात्मा विनश्यति । संशयशील आदमी की आत्मा नष्ट हो जाती है। रात को सोता हुआ मन में शंका करें छत गिर गई तो,बाहर बाइक में जाये और मन में आये एक्सीडेंट हो जाये तो? यो दिमाग में शंका बनाये रखने से जीना भी मुश्किल हो जाता है। यह संदेह धीरे-धीरे जहर का काम कर लेती है, अंदर से व्यक्ति को खोखला बना देती है। साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा- जहर को अमृत में बदलना है तो छोटी-छोटी बातों में न उलझे, उन्हें अपनी विचारों की गंदगी का माध्यम न बनाये l सम्यक्त्व के पांच दूषण बताये गये...
Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में ‘शंका स्लो पोइजन का डंका’ कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् के तीर्थंकर समवसरण में हुआ। साध्वी डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा कि शंका, संशय, सन्देह सभी पर्यायवाची शब्द है। शंका तत्व के प्रति, साधना के प्रति, मंत्र जाप, परिवार, समाज के प्रति भी हो सकती है। श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया कि संशयात्मा विनश्यति। संशयशील आदमी की आत्मा नष्ट हो जाती है। रात को सोता हुआ मन में शंका करें छत गिर गई तो, बाहर बाइक में जाये और मन में आये एक्सीडेंट हो जाये तो? यो दिमाग में शंका बनाये रखने से जीना भी मुश्किल हो जाता है। यह संदेह धीरे-धीरे जहर का काम कर लेती है, अंदर से व्यक्ति को खोखला बना देती है। साध्वी मयंकप्रभाजी ने कहा कि जहर को अमृत में बदलना है तो छोटी-छोटी बातों में न...