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उदारता सागर सा ह्रदय

उदारता सागर सा ह्रदय

*🌧️विंशत्यधिकम्*

*📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️*

2️⃣1️⃣

💛

*उदारता*

*सागर सा ह्रदय..*

परहित की मनोवृत्ति,

निर्मल बोध युक्त सद्ज्ञान..

*पाप प्रवृत्ति के प्रति अप्रीति,*

शत्रुता भाव का अभाव..

जीवमात्र के लिए करुणा..

*गुण संपन्न का विनय,*

*गुणहीन के प्रति दयाभाव..*

किसीके दुख में आत्मकंपन,

*खुद के दुख में समभाव..*

चंचलता का त्याग,

*विकट संजोगों के निर्भयता.!*

ईर्ष्या का अभाव,

मैत्रिभाव का विकास..

*निःस्वार्थ लोकप्रियता..*

*सर्वत्र औचित्य का पालन*

ये सब धर्मसिद्धि के लक्षण है.!

🟡

*धर्मसिद्धि प्राप्त होने से*

मतिभ्रम,

मूढ़ता नही रहती,

अति विषयतृष्णा नही रहती..

जिनवचनों के प्रति अरुचि नही होती.!

🌅

ऐसे जीवो में ही

जिनकथित मैत्री आदि

भावनाओ का विकास होता हैं.!

*📘श्री षोडशकजी प्रकरण📘*

*तत्त्वचिंतन:*

*मार्गस्थ कृपानिधि*

*सूरि जयन्तसेन कृपाप्राप्त*

श्रुत-स्वाध्यायनिष्ठ शिष्यरत्न

मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*

श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ

@ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

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