पूर्ण अनुशासन, समर्पण व लगन से ही जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने का रास्ता खुलता है। सफलता के ये सुझाव आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमति वल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन के दौरान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कुछ कर गुजरने का जुनून है तो कोई लक्ष्य कितना भी कठिन क्यों न हो, उसे प्राप्त कर सकते हैं। जब तक समर्पण नहीं होता, तब तक सच्चा सुख नहीं मिलता। सच्चे सुख की प्राप्ति के लिए समर्पण किया जाता है। लेकिन यहां जानने योग्य बात यह है कि समर्पण यदि कपटपूर्ण है तो सुख भी दिखावा मात्र ही होगा। समर्पण से ही परमात्मा सहाय बनते हैं। आचार्य श्री ने उदाहरण से समझाते हुए कहा कि एक बन्दर का बच्चा अपनी माँ से चिपका रहता है। वह जानता है कि माँ के साथ वो सुरक्षित रहेगा। कहाँ, क्या, कब, कैसे इन सब का निर्णय वह माँ पर छोड़ देता है। यह शरणागति का एक अच्छा...
जैन साध्वी ने बताया कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप है मोक्ष के मार्ग Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। भगवान महावीर स्वामी की अंतिम वाणी उत्तराध्यन सूत्र का वाचन करते हुए साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि अपने जीवन और आत्मा को सरल बनाने के लिए साधक को गुरू के समक्ष अपने पापों की आलोचना करना चाहिए और गुरू द्वारा बताए गए दण्ड को स्वीकार कर प्रायश्चित्त करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ज्ञान दर्शन चारित्र और तप मोक्ष के मार्ग है। धर्मसभा को गुरूणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज साहब ने भी संबोधित किया। गुरू की महिमा का बखान करते हुए साध्वी जयश्री जी और साध्वी वंदना श्री जी ने सुमधुर स्वर में भजनों का गायन किया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि जो व्यक्ति अपने अपराधों और पापों की आलोचना करता है उसकी आत्मा सरल भाव में चली जाती है और उसे आने वाले भाव में स्त्री तथा नपुंसक भव नहीं मिलता है। ऐ...
नार्थ टाउन में ए यम के यम स्थानक में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि आत्म बधुओ, जिनेशवर भगवान महावीर की वाणी धर्म को प्रस्तुत करने वाली हैl उनकी वाणी से ही जन-2 को ये ज्ञान प्राप्त होता है कि धर्म क्या है, धर्म पालन कैसे करना है। शुद्ध रूप से धर्म का मार्ग बताने वाली धर्म में आगे बढाने वाली एक मात्र वाणी जिनवाणी है। जिसने भी इस जिनवाणी को सुना और अपने साम्थर्य से अपनाया, अपनायेगें और अपनाते रहेंगे वे सभी जीव मोक्ष में जायेगे। जिनेश्वर ने दो प्रकार धर्म के बताये श्रुत धर्म, चारित्र धर्म । भगवान कहते है कि पहले सुनो श्रद्धा करो फिर आचरण में लाओ। क्योंकि सुनने से ही ज्ञान होता है और श्रद्धा जागृत होती है। इसलिए श्रुतवाणी का भी बड़ा महत्व है। भगवान कहते है धर्म पालन में प्रमाद मत करो जितना हो सके पालन करो। संसारियों को भी भगवान ने धर्म जोड़ने के लिए आगार धर्म का निरुपण कीया है। सामाय...
साध्वी जी ने बताया भगवान महावीर ने कहा साधना के जो आठ सूत्रों को उपलब्ध है उसे ही बोलने का अधिकार है Sagevaani.com /शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी भगवान महावीर की अंतिम वाणी उत्तराध्यन सूत्र का वाचन कर रही हैं। उत्तराध्यन सूत्र के 25 वें अध्ययन में उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने साधू और साध्वियों के लिए साधना के आठ सूत्र बताए हैं। इन आठ सूत्रों में पारंगत होने पर ही उन्हें धर्म के संबंध में बोलने का अधिकार है। इन सूत्रों को भगवान महावीर ने प्रवचन माताऐं कहा है। साधक और संयमी के लिए आठ प्रवचन माताऐं हैं। इनमें पांच समितियां ईर्या, भाषा, ऐषणा, आदान प्रदान और उच्चार निसर्ग समिति और तीन गुप्तियां-मनो गुप्ति, वचन गुप्ति और काया गुप्ति शामिल हैं। साध्वी जयाश्री जी ने अमोलक है जीवन गवांकर न जाऐं, सांसों के यह ये मोती लुटाकर न जाऐं, भजन का गायन किया। इसके बाद साध्वी नूतन प्रभाश्...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि 10 प्रकार की संज्ञा की परिभाषा भगवान ने किया। इन संज्ञाओ में संसार बढ़ाने का बहुत साम्थर्य है ये सभी जीवों में पायी जाती है। आहार संज्ञा की सभी जीवों में प्रधानता होती है।आहार के बिना शरीर का निर्माण नहीं होता। ये आहार जन्म से मरण तक निरन्तर चलता रहता है। ये संज्ञा का कभी विराम नही होता चारों आहार का त्याग होने पर भी रोम आहार निरन्तर चालू रहता है। नारकी में खेती-बाड़ी कुछ नही होती फिर भी नारकी जीव मात्र रोम से आहार ग्रहण करते है और सागरोपम जीवित रहते ज़मीन से व्यक्ति जीवित रहते है। व्यक्ति ज्यादा भोजन ग्रहण करता है। तप में आहार त्याग करने से मृत्यु नहीं होती। बार बार भोजन ग्रहण करना गलत है क्योंकि बीमारियों की शान्ति तप से होती है न की औषधि से। यदि चारों आहार का प्याग कर धूप में बैठ जाओ तो शरीर के सभी रोग स्वतः ही शान्त हो जाते हैं। ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैंl बंधुओं जैसे कि वर्धमान जैन स्थानक वासी भायंदर मैं कल हमारे यहां पर विराज सत्य साधना जी महाराज साहब अर्हत ज्योति जी महाराज साहब तन्मय श्री जी महाराज साहब हित साधना जी महाराज साहब हर्ष प्रज्ञा जी महाराज साहब गुरु छाया जी महाराज साहब सौम्य ज्योति जी महाराज साहब आदि 7 ठाणा के सानिध्य में उप वर्तनी संथारा प्रेरिका सत्य साधना जी महाराज साहब की 50 दीक्षा जयंती बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाई गईl U हमारे संघ के अध्यक्ष मोहनलाल जी सिसोदिया मंत्री बाबूलाल जी दूगड़ कोषाध्यक्ष श्री दिनेश जी कोठारी, हस्तीमल जी पोखरना, सुरेश जी कागरेचा, संपत जी पामेचा कृष्ण जी तलेसरा भुरीलाल जी इटोदिया, रतन जी नागोरी, उमेश जी सिसोदिया, भगवती लाल जी ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि आज हमारे गूदनी मैया का 50 वन जन्म दिवस मनाया गयाl उसमें 1500 से अधिक संख्या थी गुना बेंगलुरु हैदराबाद औरंगाबाद सभी जगह से बहुत लोग पधारे थेl सभी का सम्मान कियाl सुचारू रूप से बहुत ही अच्छा प्रोग्राम रहा हैl इसी के साथ जिसने समय की कीमत और महत्व को पहचान वही तो समय पर चल पाएगा जो समय का सही उपयोग करते हैंl मेरे कामयाबियों को उपलब्ध कराते हैंl संविधान है दुनिया का सबसे कीमती धन पर क्या हम समय का उतना सम्मान करते हैं जितना कि पैसे काl समय किन कर दिया अपने बच्चों के लिए इस समय को हम किस तरह उपयोग करते हैं जीवन में हमारे सफलता हैl इसके अनुसार अपने समय को व्यवस्थित कीजिए इसका इस तरह प्रश्न बंद...
स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई :- आचार्यश्री हीराचंद्रजी म.सा का 61 वां दीक्षा दिवस श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट चेन्नई में सामायिक दिवस के रुप मे मनाया गया | उपस्थित श्रद्धालुओं ने महावीर चालीसा, हस्ती चालीसा व हीरा चालीसा की सामुहिक स्तुति की | आचार्यश्री के 61 वें दीक्षा दिवस कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्रावक संघ के कार्याध्यक्ष आर. नरेन्द्रजी कांकरिया ने कहा कि माटी हैं पीपाड़ की चन्दन,जन्मे दो-दो रघु नन्दन | आचार्य हस्ती व आचार्य हीरा दोनों की जन्मभूमि पीपाड़ हैं | पिता मोतीलालजी माता मोहिनी देवीजी गांधी के यहां जन्म लेने वाले हीरा के बाल्यकाल, दृढमय वैराग्य व दीक्षा का विवरण करते हुए वर्तमान में जिनशासन की स्थानकवासी परम्परा में वय,दीक्षा काल व आचार्य काल की दृष्टि से वरिष्ठतम आचार्यश्री हीराचंद्रजी म.सा के जिनशासन,चतुर्विध ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में बिराजमान पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि कुछ नया करना है, तो संकल्प लेना ही होगा। संकल्प तो हम ले लेते हैं, लेकिन जीने के आधुनिक तौर-तरीके हमें अपने संकल्प, अपनी शपथ से भटका देते हैं। और कभी-कभी रास्ते में ही अटका देते हैं। एक अच्छे इंसान आप तभी बन सकते हो जब आपके अंदर आत्मविश्वास हो, कुछ कर गुजरने का दृढ़ निश्चय हो, साहसी निर्णायक क्षमता हो, आशावादी दृष्टिकोण हो, सकारात्मक सोच हो, उत्साही मन हो, दुःख में भी सुख खोज लेने की चाहत हो।सोचना यह है कि हम गहरे में जमे संस्कारों को कैसे सुधारें? जड़ तक कैसे पहुंचें? बिना जड़ के सिर्फ फूल-पत्तों का क्या मूल्य? पतझड़ में फूल-पत्ते सभी झड़ जाते हैं, मगर वृक्ष कभी इस वियोग पर शोक नहीं करता। उसके पास जड़ की सत्ता सुरक्षित है, जिससे वसंत आने पर पुन: वृक्ष फूल-पत्तों से लहलहा उठता है। अंधेर...
कार्यकर्त्ताओं,तप-त्याग, श्रावक व्रत एवं विशेष धर्म आराधना करने वालों का श्री संघ की तरफ बहुमान 26 नवम्बर रविवार को भगवान महावीर सेवा समिति द्वारा 364 वां अन्नदानं कार्यक्रम भी आयोजित Sagevaani.com /चेन्नई : श्री एस एस जैन संघ माम्बलम के तत्वावधान एवं चातुर्मासार्थ विराजित स्वर्ण संयम आराधक गुरुदेवश्री वीरेन्द्रमुनीजी म.सा. के सान्निध्य में कर्नाटक गज केसरी खद्दरधारी गुरुदेव श्री गणेशलालजी म .सा. की 144 वी जन्म जयन्ती तप त्याग सामुहिक जाप एवं सामायिक दिवस के रूप में मनाई गई। सवेरे ठीक 7.30 बजे से गुरू गणेश प्रार्थना के साथ सामूहिक नव पद नवकार जाप का आयोजन हुवा। गुरूदेव श्री वीरेन्द्रमुनीजी म.सा. ने गुरु गणेश के व्यक्तित्व-कृतित्त्व एवं संयम जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु गणेश आध्यात्मिक जगत के ऐसे महापुरुष हुए जिन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा अपरिग्रह व अनेकान्तवाद आदि सिद्धांतों क...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि धर्म धारण करने योग्य हैl ये सदाकाल साथ रखना है धर्म तो हमारे हृदय के कण कण में होना चाहिएl धर्म के बिना जीवन व्यर्थ है धर्म के बिना जीवन भार है। धर्म हितकारी है ये सभी प्रकार से साता पहुँचा कर जीव को भव सागर से तारता हैl यदि धर्म न हो तो संसार में सिर्फ दुःख ही होगा। परम सुख को पाने के लिए धर्म मार्ग का निरुपण जिनेश्वर भगवान द्वारा किया गया है। राग, द्वेष, ममत्व से युक्त धर्म आगार धर्म और राग- द्वेष, ममत्व से रहित धर्म अणगार धर्म है। अणगारc धर्म पालन करने वाले अपनी साधना द्वारा आत्मा के कर्म मैल को साफ करते है। आगार धर्म में राग द्वेष होने से भगवान ने पापों की मर्यादा का निर्देश दिया और श्रावक के 12 व्रतों का अनुपम, निरूपण किया। ये पालन करने में सरल है इनका पालन जीव अपने साथ अनेक अन्य संसारी आत्माओं का भी भला करता है ।धर्म ही एक मात्र भलाई का ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने ज्ञान पंचमी के दिन विशेष प्रवचन देते हुए कहा कि ज्ञानपंचमी पर्व ज्ञान की आराधना का महान् पर्व है, जो मानव समाज को वीतरागी संतों की वाणी, आराधना और प्रभावना का सन्देश देता है। इस पवित्र दिन श्रद्धालुओं को श्रद्धाभक्ति से महोत्सव के साथ आगमो की पूजा-अर्चना करनी चाहिएl अज्ञान के अन्धकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले इस महापर्व के सुअवसर पर प्राकृत, संस्कृत, प्राचीन भाषाओं में हस्तलिखित प्राचीन मूल शास्त्रों को शास्त्र भंडार से बाहर निकालकर, शास्त्र-भंडारों की साफ-सफाई करके, प्राचीनतम शास्त्रों की सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें नए वस्त्रों में लपेटकर सुरक्षित किया जाता हैl इन ग्रंथों को उचित स्थान पर विराजमान करके उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। आचार्य श्री ने आगे कहा कि यदि एक मंदिर गिर भी जाता है त...